" /> भाजपा के इरादों की जीत पर.. बिहार सरकार गई हार!

भाजपा के इरादों की जीत पर.. बिहार सरकार गई हार!

सेंसेक्स की तरह कल दिनभर बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे और रुझान भी ऊपर-नीचे होते रहे। देर रात जब तस्वीर साफ हुई, तब बिहार में खुद को ही सरकार माननेवालों की ‘हार’ का चित्र शीशे की तरह साफ हो गया। सही मायनों में देखें तो इस चुनाव में अगर किसी की सबसे बड़ी हार हुई है, तो वह बिहार ‘सरकार’ यानी नीतीश बाबू की हुई है क्योंकि भाजपा ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार भी चलाई थी और चुनाव भी लड़ा था। वर्ष २०१५ के चुनाव में आरजेडी महागठबंधन का हिस्सा रहे नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे, उस समय भी उन्हें गुमान था कि वे ही बिहार के ‘सरकार’ हैं। उनके बिना कोई बिहार में सरकार नहीं चला सकता। इसी गुमान में वे पाला बदलकर भाजपा के साथ हो लिए और बिहार के मुख्यमंत्री बने रहे लेकिन उनका यह गुमान इस चुनाव में नहीं टिक पाया। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार वे फिसलकर तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। बिहार चुनाव में उनके गठबंधन की चाहे जो उपलब्धि रही हो पर उनके मित्रपक्ष की मंशा के अनुसार नीतीश बाबू की राजनैतिक कटिंग तो हो ही गई। चुनाव के पहले ही लग रहा था कि नीतीश का कद कम करना ही भाजपा का असल गेम प्लान था। भाजपा भले ही जेडीयू के नेतृत्व में २००५ से ही सरकार बनाती रही हो, लेकिन इस बार नीतीश का कद छोटा करके वो अपने दीर्घकालीन इरादों में जीत गई है। अपनी इसी इच्छापूर्ति के लिए उसने चिराग का दीया जलाया था, जो ‘जलता’ नीतीश से रहा और ‘रोशनी’ भाजपा को देता रहा। भाजपा ने अपनी इसी इच्छा की पूर्ति के लिए इस बार चिराग पासवान को नीतीश के खिलाफ बगावत के लिए उतारा था। चिराग ने इस चुनाव में अपनी पार्टी से सबसे ज्यादा उम्मीदवार जेडीयू के उम्मीदवारों के खिलाफ उतारे जबकि भाजपा को पूरा साथ दिया। चिराग की एलजेपी ने जेडीयू के वोट कटवा की भूमिका निभाई और भाजपा के इरादों को इस चुनाव में जीत दिलाई।

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुशासन बाबू के नाम पर चर्चित रहे हैं, लेकिन कल आए बिहार चुनाव के परिणाम से इस सुशासन का सिंहासन पूरी तरह हिल गया। इस बार सुशासन बाबू वर्ष २०१५ में हुए पिछले चुनाव की तुलना में फिसल कर तीसरे स्थान पर आ गए जबकि उस समय आरजेडी महागठबंधन का हिस्सा रहे सुशासन बाबू की जदयू दूसरे स्थान पर थी और भाजपा की एनडीए तीसरे स्थान पर। इस बार एनडीए का हिस्सा बनने के बावजूद सुशासन बाबू अपना स्थान नहीं बचा पाए।
बता दें कि कल बिहार चुनाव का परिणाम जैसे-जैसे घोषित होता गया, वैसे-वैसे सुशासन बाबू को अपना सिंहासन डगमगाता हुआ दिखाई दिया। वर्ष २०१५ के चुनाव में ७१ सीट जीतकर दूसरे स्थान पर रही जेडीयू इस चुनाव में सिर्फ ४० के आंकडे को ही छू पाई। इस चुनाव में नीतीश की सहयोगी दल भाजपा उनसे आगे निकल गई। वर्ष २०१५ के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहनेवाली भाजपा इस चुनाव में छलांग लगाकर दूसरे स्थान पर आ गई। इस बार भाजपा को ७० से ज्यादा सीटें मिली हैं जबकि पिछली बार ५३ सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी। नीतीश की जेडीयू से आगे आने पर भाजपा के पदाधिकारियों ने जनादेश का हवाला देकर बिहार में भाजपा का ही मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर डाली। इस मांग के साथ ही सुशासन बाबू को अपना सिंहासन और भी डगमगाते हुए दिखा। दूसरी ओर इस चुनाव में आरजेडी महागठबंधन के तेजस्वी यादव मैन ऑफ द मैच साबित हुए। इस चुनाव में तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी नीतीश कुमार और उनके मित्रपक्ष भाजपा के दिग्गजों का चुनाव प्रचार में अकेले मुकाबला किया और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया।
दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान ही जनता के क्रोध का सामना करनेवाले नीतीश कुमार को अपनी हार दिख गई थी। प्रचार के दौरान जनता से मिले नकारात्मक प्रतिसाद और विरोधियों के हमलों के सामने खुद को पस्त होता देख आखिर में नीतीश बाबू ने इमोशनल कार्ड खेल डाला। उन्होंने इस चुनाव को अपना आखिरी चुनाव तक बता डाला। हालांकि नीतीश का यह इमोशनल कार्ड भी मतदाताओं पर नहीं चल पाया लेकिन उनके द्वारा आखिरी चुनाव लड़ने की बात शायद सच साबित होती नजर आ रही है।

मोदी के सामने तेजस्वी की सफलता सराहनीय -शरद पवार ने की प्रशंसा
बिहार चुनाव के अंतिम परिणामों की घोषणा देर रात की जाएगी। जब तक अंतिम परिणामों की आधिकारिक तौर पर घोषणा होगी, तब तक अखबार निकल चुका होगा। बिहार चुनाव के आए नतीजों के आंकड़ों के अनुसार बिहार में राजद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आ रही थी। इसी बीच राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कल बिहार चुनाव के नतीजों पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में शरद पवार ने तेजस्वी यादव की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मैंने पूरा चुनाव अभियान देखा, उसके अनुसार प्रधानमंत्री स्वयं इसमें बहुत रुचि ले रहे थे। एक ओर प्रधानमंत्री, नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता थे तो वहीं दूसरी ओर अनुभवहीन तेजस्वी यादव पहली बार चुनाव लड़ रहे थे। इसके बाद भी तेजस्वी यादव को जो सफलता मिली है, वह बहुत ही सराहनीय है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह कई युवाओं में जोश पैदा करेगा। यह कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार को बिल्कुल भी फटका नहीं लगेगा, लेकिन भाजपा की संख्या बढ़ी व नीतीश की संख्या में कमी आई है, ऐसा भी पवार ने कहा।
इसके अलावा राज्यपाल द्वारा अर्नब गोस्वामी पर जताई गई चिंता पर भी शरद पवार ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है, परंतु मुझे लगता है कि जिस घर के दो लोगों ने आत्महत्या की है, उस परिवार के प्रति राज्यपाल ने यदि चिंता व्यक्त की होती तो अच्छा होता।

नीतीश का कद कम करने में भाजपा सफल – पृथ्वीराज चव्हाण

बिहार में नीतीश कुमार का कद कम करना भाजपा की रणनीति थी। एलजेपी को अलग चुनाव लड़ाकर भाजपा ने वैसा प्रयास भी किया और उसमें वह सफल भी हो गई, ऐसा कटाक्ष कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भाजपा पर किया। चुनाव के दौरान होनेवाली सभाओं का उपयोग वातावरण बनाने के लिए होता है, लेकिन राजनीति बदल गई है। बड़ी सभा हुई तो भी लोग प्रभावित होंगे, ऐसा नहीं लगता। कांग्रेस राष्ट्रीय विपक्षी दल है। भाजपा को रोकने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है, ऐसा भी चव्हाण ने कहा।