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बिहार विश्वकर्मा समाज सेवा संघ ने राज्य सरकार से की मांग, भगवान विश्वकर्मा की प्राचीन प्रतिमा की पुन: प्राण प्रतिष्ठा को मिले अनुमति

सामना संवाददाता / मुंबई
बिहार विश्वकर्मा समाज सेवा संघ ने चक्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर, नालासोपारा
स्थित भगवान विश्वकर्मा की पुन: प्राणप्रतिष्ठा एवं परिसर के जीर्णोद्धार हेतु महाराष्ट्र शासन से निवेदन कर ज्ञापन दिया। व्यापार-वाणिज्य के महत्वपूर्ण केंद्र होने के कारण यहां शिल्पी वर्ग (भगवान विश्वकर्मा की संतान-लोहार, बढ़ई, ठठेरा, राजमिस्त्री / मूर्तिकार और सुवर्णकार) विशेष रूप से पुष्पित पल्लवित हुए। अतएव यहां भगवान विश्वकर्मा की एक अति प्राचीन (पूर्व मध्यकालीन-हजार वर्ष पुरानी) तथा विशिष्ट मूर्ति पायी जाती है, जैसा शेष भारत में कहीं नहीं है। यहां की प्रतिमा त्रिमुखी है, भगवान विश्वकर्मा युवा रूप में चिह्नित हैं, उनके ऊपरी दाहिने हाथ में एक उपकरण है, जो आधुनिक थियोडोलाइट जैसा दिखता है, बाएं हाथ में पाटा है। कालचक्र में खोये इस परिसर का पता १८८२ ईस्वी में चला जब इतिहासकार पंडित
भगवान लाल ने उत्खनन किया।

इस स्थल के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व को देखते हुए सुखदेव शर्मा
अध्यक्ष, बिहार विश्वकर्मा समाज सेवा संघ ने इस वर्ष विश्वकर्मा दिवस पर संकल्प लिया कि विश्वकर्मा समाज की भागीदारी से भगवान की प्रतिमा की पुन:प्राण प्रतिष्ठा तथा परि सर का जीर्णोद्धार करवाएंगे। संस्था के सचिव मुकेश शर्मा ने मंत्री से मुलाकात कर उनसे निवेदन किया कि जिस तरह से उत्खनन में प्राप्त बौद्ध स्तूप को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया गया है, उसी तरह सनातन धर्म के अवयवों को भी राजकीय संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया जाए, परिसर का राज्य निधि से जीर्णोद्धार कर सनातन धर्म की अमूल्य निधियों के माध्यम से इस मंदिर के कार्यों को पूर्ण किया जाए, एैसी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से संस्था के अध्यक्ष सुखदेव ने दी है।

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