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कृषि कानूनों को फिर से लाने का जाल, केंद्र सरकार की मंशा पर उठा सवाल, भाजपा सांसद बोले वापस आएगा कृषि कानून

सामना संवाददाता / मुंबई। उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तीनों कृषि संशोधित कानूनों को रद्द कर देनेवाली भाजपा प्रणीत केंद्र सरकार की मंशा पर फिर सवाल उठे हैं। कृषि कानूनों को फिर वापस लाने का जाल बुना जा रहा है। इसकी सुगबुगाहट भाजपा नेताओं द्वारा फिर शुरू कर दी गई है। अब अभिनेता से नेता बने भाजपा सांसद सुरेश गोपी ने कृषि कानूनों को फिर से लाने का राग अलापा है। उन्होंने यह कहते हुए वकालत की है कि कृषि कानून वापस जरूर आएंगे, क्योंकि असली किसान यही चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो किसान सरकार बदल देंगे।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुरेश गोपी केरल में ‘विशु उत्सव’ का उद्घाटन करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा कि मैं एक भाजपा नेता हूं। मैं केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने से बेहद नाराज हूं।
आपको पसंद हो या न हो, लेकिन मैं कहूंगा कि ये कानून वापस आएंगे। असली किसान कृषि कानून की मांग करेंगे और इसलिए ये वापस जरूर आएंगे, अन्यथा किसान इस सरकार को बदल देंगे। मैं बतौर असली किसान कृषि कानूनों को वापस लाने की मांग करूंगा। याद दिला दें कि बीच-बीच में कृषि कानूनों को वापस लाने की चर्चाएं होती रही हैं। कभी भाजपा के नेता इस तरह के संकेत देते हैं कि कानून वापस आ रहा है, तो कभी विपक्ष की पार्टियां भी आरोप लगाती रही हैं कि भाजपा सरकार कई राज्यों में कृषि कानून चोर दरवाजे से लागू करने का प्रयास कर रही है।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित भाजपा के कई नेता यह कहते हुए कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं कि हम कृषि संशोधन कानून लाए हैं लेकिन कुछ लोगों को ये कानून पसंद नहीं आए। आजादी के ७० साल बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह एक बड़ा सुधार था,‌ लेकिन सरकार निराश नहीं है। हम एक कदम पीछे हटे हैं, हम फिर आगे बढ़ेंगे। आंदोलनकारी किसानों को फर्जी किसान तक ठहराने की कोशिश की गई थी। आंदोलनकारी किसानों की तुलना खालिस्तानी आतंकवादियों से की गई थी।
एमएसपी पर भी केंद्र सरकार का ढुलमुल रवैया
गौरतलब हो कि पंजाब, पश्चिमी यूपी और हरियाणा के किसानों ने कृषि कानूनों को काला कानून बताते हुए इसके खिलाफ तकरीबन एक साल तक दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन किया था। इस आंदोलन में ७०० से अधिक किसान शहीद हो गए। आखिरकार केंद्र सरकार को बैकफुट पर लौटना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने १९ नवंबर २०२१ की सुबह में तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने किसानों से माफी भी मांगी थी। इसके बाद संसद के शीत सत्र में कानून आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया गया था। किसानों ने एमएसपी पर कानून की मांग की थी। नवंबर २०२१ में कानून वापस लेते वक्त सरकार ने वादा किया था कि जल्द इस मामले में कमेटी बनाई जाएगी और पैâसला लिया जाएगा, लेकिन अब तक इससे जुड़ा कोई अपडेट नहीं आया है।

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