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भाजपा के एमपी में एसडीएम को है भजन-कीर्तन से परेशानी!

-ध्वनि प्रदूषण के नाम पर बंद कराया कार्यक्रम…कानून के रक्षक को ही नहीं है कानून का ज्ञान

नागमणि पांडेय / मुंबई

एक बार फिर से भाजपा की दोगली नीति सामने आई है, जहां एक तरफ भाजपा अयोध्या में मंदिर बनाने का ‘श्रेय’ लूट रही है तो वहीं उसी भाजपा के एमपी में एक एसडीएम को भजन-कीर्तन से परेशानी हो रही है। इस एसडीएम ने मुंबई से मैहर की महशूर देवी मां शारदा के दर्शन करने गए भक्तों को परेशान किया। सुरेश जाधव नाम के इस एसडीएम ने न केवल ध्वनि प्रदूषण के नाम पर भजन-कीर्तन का कार्यक्रम बंद कराया, बल्कि भक्तों के साथ दुर्व्यवहार भी किया। भक्तों द्वारा लाख मिन्नतें करने के बाद भी उसने एक न सुनी। एक भक्त ने बताया कि यह सब वाकया दिन के समय हुआ और उस समय कार्यक्रम में लगे लाउडस्पीकर की आवाज मध्यम रखी गई थी। जिसके बाद से इस एसडीएम के कानून के ज्ञान पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या था मामला?
मुंबई और यूपी के रहनेवाले कुछ भक्त पिछले ९ वर्षों से मैहर धाम जाकर माता शारदा का दर्शन करते हैं। ये भक्त मंदिर परिसर में ही सुंदरकांड का पाठ व जगराता का कार्यक्रम करते हैं। इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। इस समूह में शामिल एक भक्त राष्ट्रीय कवि देवराज मिश्र ने बताया कि इस कार्यक्रम की सूचना शासन-प्रशासन को ४ महीने पूर्व ही दे दी जाती है। इस कार्यक्रम में डीएम-एसपी व स्थानीय विधायक उपस्थित रहकर सहयोग करते हैं। लेकिन इस बार स्थानीय एसडीएम सुरेश जाधव ने आयोजक सदस्यों को बेवजह परेशान किया और कार्यक्रम को बंद करा दिया, साथ ही भक्तों को धमकी देते हुए उनके साथ बदतमीजी भी की। मिश्र ने आगे बताया कि २३ दिसंबर को एसडीएम मौके पर पहुंचे और ध्वनि प्रदूषण के नाम पर हो रहे ‘सुंदरकांड’ पाठ को बंद करा दिया। आयोजकों ने लाउडस्पीकर की आवाज को और भी कम कर दी लेकिन एसडीएम नहीं माने।
जबकि २४ तारीख को दिनभर मंदिर परिसर में ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजता रहा।
क्या कहता है कानून
बता दें कि मध्य प्रदेश के किसी भी धार्मिक स्थल सहित अन्य जगहों पर लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि यंत्र तेज आवाज में नहीं बजाया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पदभार ग्रहण करने की बाद सबसे पहले यही आदेश जारी किया था। यह नियम कई राज्यों में पहले से ही लागू है। कानून के मुताबिक, दिन में ४५ डेसिबल से ज्यादा शोर नहीं होना चाहिए, जबकि रात में ४० डेसिबल से ज्यादा आवाज कानूनन अपराध है। यही नहीं नियम यह भी है कि तेज आवाज को धीमा भी कराया जा सकता है। तो ऐसे में यह सवाल उठता है कि लाउडस्पीकर की आवाज कम होने के बाद भी आखिर एसडीएम ने कार्यक्रम को क्यों बंद करा दिया?

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