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सिंधिया का दबदबा कम कर रही भाजपा, `मामा’ के बाद ज्योतिरादित्य का बुरा हाल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

आगामी २०२४ के लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा अपनी नीतियों में कई बड़े परिवर्तन कर चुनाव जीतने की प्लानिंग कर रही है। इस कड़ी में पार्टी का फोकस अब नए चेहरों को तवज्जो देना रहा है। तीन राज्यों में नए चेहरों को मुख्यमंत्री पद पर बैठाकर पार्टी ने संकेत तो पहले ही दे दिए हैं। इससे पार्टी के दिग्गजों को बड़ा झटका लगा है। फिर चाहे वह वसुंधरा राजे हों या फिर शिवराज सिंह चौहान। लेकिन अब इस कड़ी में एक नया नाम और शामिल हो गया है और वह है ज्योतिरादित्य सिंधिया, जिसका दबदबा धीरे-धीरे भाजपा कम कर ही है। सोमवार को मध्य प्रदेश के नए मंत्रिमंडल के विस्तार में ये बात साफतौर पर दिखाई भी दी। जहां मध्य प्रदेश की पिछली सरकार में ७ सिंधिया समर्थक विधायकों को मंत्रीपद दिया गया था वहीं इस बार सिंधिया खेमे के महज ३ विधायकों को मंत्री बनाया गया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि शिवराज सिंह चौहान यानी `मामा’ के बाद सिंधिया का भी वर्चस्व पार्टी में खत्म हो रहा है।

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