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गुजरात में भाजपा विपक्षी उम्मीदवारों को दे रही है धमकी! … विदेशी अखबारों में भी थू-थू…

सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा अबकी बार ४०० पार करने के लिए सारी सीमाएं लांघ रही है। वह विपक्षी व निर्दलीय उम्मीदवारों को धमकी देने से भी बाज नहीं आ रही है। हालत यह है कि देशी मीडिया तो भाजपा की पोल खोल ही रही है, अब इस मामले में विदेशी अखबारों में भी भाजपा की थू-थू हो रही है।
ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ में छपा है कि जब गुजरात के लोगों ने पिछले हफ्ते हिंदुस्थान के छह सप्ताह तक चले चुनाव में अपना वोट डाला, तो राज्य में एक निर्वाचन क्षेत्र था जो चुप था। वहां कोई मतदान केंद्र या लोगों की कतारें नहीं थीं और न ही कोई उंगली में काली स्याही लगानेवाला था। धमकी देने के बाद निर्दलीय मैदान छोड़ चुके थे और सूरत में भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध जीत चुका था। गांधीनगर में प्रजातंत्र पार्टी के राजेश मौर्या और सुमित्रा मौर्या ने धमकी दिए जाने का आरोप लगाया।

७३ वर्षों में पहली बार सूरत में … प्रत्याशी हुआ नियुक्त!
ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ ने भाजपा की खोली कलई

सूरत में सत्तारूढ़ भाजपा के प्रत्याशी मुकेश दलाल ने अन्य सभी उम्मीदवारों के अयोग्य घोषित होने या मैदान से हटने के बाद सीट जीत ली। ७३ वर्षों में यह पहली बार था कि सूरत के उम्मीदवार को निर्वाचित नहीं, बल्कि नियुक्त किया गया था। इस खबर के साथ ब्रिटिश अखबार ‘गार्जियन’ ने भाजपा की कलई खोली है।
गुजरात में सूरत एकमात्र निर्वाचन क्षेत्र नहीं है, जहां भाजपा के खिलाफ खड़े होने वाले कई उम्मीदवार अचानक दौड़ से हट गए। गृहमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दाहिने हाथ माने जानेवाले अमित शाह गांधीनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। वहां मतदान से पहले १६ विपक्षी उम्मीदवार बाहर हो गए। ऐसे में गुजरात चुनाव में भाजपा के लिए आसान जीत की संभावना है, जिससे मोदी के तीसरी बार सत्ता में लौटने की भी उम्मीद है। यह मोदी का गृह राज्य और उनकी पार्टी का गढ़ है, जिसने १९९५ के बाद से यहां राज्य का हर चुनाव जीता है। भाजपा ने २०१९ में पिछले आम चुनाव में सभी २६ सीटें जीतीं। २०२४ के लोकसभा चुनाव के दौरान कई लोगों ने आरोप लगाया है कि राज्य में भाजपा के आधिपत्य को मजबूत करने और विपक्ष को पूरी तरह से खत्म करके भारी अंतर से जीत की घोषणा करने के लिए काफी कल, बल और छल का सहारा लिया गया है। गांधीनगर में भाजपा ने शाह को अभूतपूर्व १० लाख वोटों से जिताने का लक्ष्य रखा है। सूरत और गांधीनगर में विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर पार्टी कार्यकर्ताओं और पुलिस का इस्तेमाल करके विरोधी उम्मीदवारों को डराने-धमकाने और नाम वापस लेने के लिए दबाव डालकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है। कभी-कभी हिंसा की स्पष्ट धमकी या उनके परिवारों को सीधे परेशान करने की धमकी भी दी जाती है। इस माहौल में भाजपा के जिला और राज्य प्रवक्ताओं ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। गुजरात के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय और गृहमंत्री शाह ने भी कोई जवाब नहीं दिया।

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