मुख्यपृष्ठस्तंभअपने दागियों का काला चिट्ठा खोले भाजपा!

अपने दागियों का काला चिट्ठा खोले भाजपा!

दिल्ली से 
योगेश कुमार सोनी

अगले महीने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसको लेकर सभी राजनीतिक पार्टी दल-बल के साथ लगी हुई है। भारतीय जनता पार्टी अपनी सभाओं में विपक्षी दलों के नेताओं के काले चिट्ठे खोलने में लगी हुई है। इसको लेकर कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने हमलावर होते हुए कहा है कि यदि भाजपा काले चिठ्ठे खोलने में लगी है तो वह अपनी पार्टी के नेताओं के भी खोले। मार्च २०१९ में एडीआर ने एक रिपोर्ट जारी की थी। उसमें राज्यसभा और लोकसभा के ३३ फीसदी सांसद दागी बताए गए थे, जिसमें से १७ फीसदी सासंदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें सबसे आश्चर्य की बात यह है कि सबसे अधिक संख्या भाजपा के सांसदों की है। लोकसभा में ५४२ सासंदों में से १७९ सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो कुल संख्या का ३३ फीसदी है, वहीं ११४ के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। ठीक उसी तरह राज्यसभा के २२८ सांसदों में से ५१ सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं २० के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस तरह से दोनों सदन के सांसदों को मिलाकर देखें तो ७७० सांसदों में से २३० दागी हैं। यह आंकड़ा बताना इसलिए जरूरी है कि दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना बहुत आसान है, लेकिन अपने गिरेबान में झांकना बहुत मुश्किल काम है। प्रियंका गांधी ने कहा कि आंकड़े स्पष्ट बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में सबसे ज्यादा दागी नेता हैं, लेकिन वह अपने आपको सबसे साफ पार्टी बताती है। भाजपा को ये लगता है कि वो कुछ भी बोलेगी और जनता मान लेगी, लेकिन वो भूल गए हैं कि जनता अब सब समझ चुकी है। हमारे देश में अधिकतर नेताओं के रिकॉर्ड बेहद खराब है और वो ही लोग जनता को समाज सुधारने का आश्वासन देते हैं। क्या अद्भुत विडंबना है, हमारी राजनीति की जिसमें जो जैसा चाहता है, वैसा बोलता है और ऐसे भाजपा नेता बहुत कर रहे हैं। चुनावों में देश के अहम मुद्दों का कहीं कोई जिक्र नहीं है। देश की सुरक्षा व बेरोजगारी पर कोई बात नहीं करना चाहता। हम जिस कालखंड में जी रहे हैं वह किसी से छुपा नहीं है, लेकिन फिर भी न जाने क्यों हमें नादान समझा जा रहा है। भाजपा एक ही फॉर्मेट में राजनीति कर रही है, जिससे उसका जनाधार लगातार घटता जा रहा है। जनता को बदलाव की जरूरत है और वह अब धर्म व हवाई बातों में नहीं आ रही है। हिमाचल व कर्नाटक चुनाव ने अगले महीने होने वाले पांच राज्यों व अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव का मिजाज बता दिया। अब लोग मुद्दे की बात करना व सुनना चाहते हैं, जिसके लिए भाजपा का कोई नेता मुखर होकर उत्तर नहीं देना चाहता है। चुनावों में प्रâी की रेवड़ियां व योजनाओं का लॉलीपॉप देकर अब काम नहीं चलेगा। भाजपा को याद रखना होगा कि जनता जितनी जल्दी सिर पर चढ़ाती है, उससे ज्यादा जल्दी उतार भी देती है। मुद्दों व धरातल की स्थिति पर बात हो। दागी मंत्रियों की सूची बतानी हो तो सारी बताई जाए। अपनी छिपाकर दूसरों की बताने से सच्चाई छुप नहीं सकती और साथ ही जनता को बेवकूफ समझना भी बंद करना होगा। चूंकि सर्वे में पांचों राज्यों में भाजपा की हार दिखाई जा रही है और यदि ऐसा हो गया तो २०२४ में हार लगभग तय हो जाएगी। हर राज्यों में एक ही तरह की बात अब जनता को अच्छी नहीं लग रही, इसलिए ध्यान रखना होगा कि बात सही और काम की करनी होगी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

अन्य समाचार