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पवार जब मुख्यमंत्री बने तब उनके साथ नहीं थी भाजपा …अजीत पवार के तंज पर सुप्रिया सुले का पलटवार

सामना संवाददाता / मुंबई
३८ साल की उम्र में जब शरद पवार मुख्यमंत्री बने थे, तब भाजपा उनके साथ सरकार में नहीं थी। इतना ही नहीं, उस वक्त शरद पवार पर परिवारवाद का लेबल भी नहीं था। यह कहते हुए राकांपा की सांसद सुप्रिया सुले ने अजीत पवार के तंज पर सीधा पलटवार किया।
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने सीधे तौर पर राकांपा अध्यक्ष शरद पवार पर निशाना साधा था। अजीत पवार ने शरद पवार का नाम लिए बिना कहा था कि मैंने ६० की उम्र में अलग होने का रुख अपनाया, कुछ ने तो उम्र के ३८वें साल में यह पैâसला ले लिया था। उनके इस तंज पर सांसद सुप्रिया सुले ने जवाबी पलटवार किया है। सुप्रिया सुले ने कहा कि अलग चूल्हा लगाते वक्त कांग्रेस के कई लोग उनके साथ थे। सुप्रिया सुले ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन पर परिवारवाद का लेबल नहीं लगा। अपनी खूबियों के दम पर वे महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। सुप्रिया सुले ने कहा कि दादा ने कहा था कि मोदी और शाह उनकी बात सुनते हैं। अगर ऐसा है तो दादा को जनता की समस्याओं को उनके सामने रखना चाहिए। शीघ्र कर्जमाफी की जाए, दूध, इथेनॉल, प्याज, मराठा आरक्षण का मुद्दा दिल्ली दरबार में उठाया जाए। अगर दादा के मार्गदर्शन से ये सभी समस्याएं हल हो जाएंगी तो दादा को भी राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए।
दिल्ली में होती है दमनशाही
अजीत पवार द्वारा की गई आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। सुले ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हम लोकतंत्र पर चलनेवाले लोग हैं। दमनशाही दिल्ली में होती है। हम दमनशाही करनेवाले नहीं हैं।
सी वोटर के सर्वेक्षण पर भी प्रतिक्रिया
साल २०२४ चुनाव से पहले सी वोटर का ओपिनियन पोल जारी हो गया है। इसमें बताया गया है कि महाविकास आघाड़ी को महाराष्ट्र में बड़ी सफलता मिलेगी। इस पर बोलते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि लोकतंत्र में जनता तय करती है कि किसे चुनना है। साथ ही शरद पवार की आलोचना पर बात करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा आप शरद पवार की आलोचना करेंगे तो चर्चा तो होगी ही। लेकिन हर किसी को आलोचना करने का अधिकार है।

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