मुख्यपृष्ठस्तंभबीजेपी की तानाशाही ...ईडी-सीबीआई एजेंसियों का कर रही दुरुपयोग

बीजेपी की तानाशाही …ईडी-सीबीआई एजेंसियों का कर रही दुरुपयोग

दिल्ली से
योगेश कुमार सोनी

बृहस्पतिवार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से आबकारी नीति से जुड़े धन-शोधन मामले में पूछताछ करने के लिए बुलाया था और पूछताछ के लिए दो नवंबर को तलब किया था, लेकिन केजरीवाल नहीं पहुंचे और उन्होंने कहा कि समन का नोटिस अवैध और राजनीति से प्रेरित है। यह नोटिस भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर भेजा गया है। इसके द्वारा मुझे हाल ही में होने वाले चार राज्यों में चुनाव प्रचार करने के लिए रोका जाना है, जिससे आम आदमी पार्टी के चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज न करा पाए। ईडी को तुरंत नोटिस वापस लेना चाहिए। केजरीवाल ने यह भी कहा कि `आप’ का राष्ट्रीय संयोजक और एक स्टार प्रचारक होने के नाते मुझे चुनाव-प्रचार के लिए यात्रा करनी पड़ती है और `आप’ के अपने क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को राजनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना पड़ता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में, शासन और आधिकारिक प्रतिबद्धताएं हैं, जिनके लिए मेरी उपस्थिति आवश्यक है। केजरीवाल को ईडी का नोटिस आने के बाद दिल्ली की राजनीति में बड़ी हलचल मच गई है। सभी विपक्षी दलों ने बीजेपी को घेरा है और सबका मानना है कि यह तानाशाही की अंतिम हद तक जाकर केंद्र सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है, जो भारतीय राजनीति के लिए एक काला अध्याय है। इस मामले पर शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कहा कि कभी राहुल गांधी और सोनिया गांधी को भी बुलाया गया था। मुझे भी बिना वजह जेल भेजा गया था व इसके अलावा महाराष्ट्र के कई नेताओं को जेल में डाल दिया था। दो पश्चिम बंगाल के मंत्रियों को ईडी ने पकड़ लिया है। तमिलनाडु के दो मंत्री जेल में हैं। भाजपा की यही मंशा है कि पूरे विपक्ष को जेल में डाल दें और केवल वो ही चुनाव लड़ें। इसके अलावा `आप’ विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह न केवल हिंदुस्थान बल्कि पूरी दुनिया देख रही है कि केंद्र सरकार सत्ता के नशे में चूर है और वह इतनी अहंकारी है कि हर छोटी राजनीतिक पार्टियों को कुचल देना चाहती है और सारे विपक्ष को खत्म कर देना चाहती है, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। आम आदमी पार्टी एक उभरती हुई राष्ट्रीय पार्टी है और भाजपा सरकार उसे कुचलने के लिए हर कोशिश कर रही है। बहरहाल, लोकतंत्र का यह काला चेहरा पहली बार देखने को मिल रहा है। यदि सरकार इस तरह लगातार एजेंसियों का दुरुपयोग करती रही तो वह दिन दूर नहीं कि देश की जनता सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगेंगी। इस मामले में सवाल यही उठता है कि आखिर चुनावों के समय में ही ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां इस तरह क्यों एक्टिव हो जाती हैं? जिस तरह बीजेपी सरकार इन्हें चला रही है और यदि यही हाल रहा तो आने वाली सरकारें भी ऐसा करती रहीं तो देश में आनेवाले समय में निश्चित तौर पर लोकतंत्र की हत्या होना तय है। इस मामले में उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा स्थिति बहुत भयावह हो सकती है। आम आदमी पार्टी के सभी चोटी के नेता जेल में हैं या अब डर के मारे अपनी सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जिससे राजनीति प्रभावित हो रही है और कोई भी अच्छे से काम नहीं कर पा रहा है, जिससे हम हर रोज पिछड़ रहे हैं। भाजपा को तानाशाही बंद करनी पड़ेगी, अन्यथा अब विपक्षी दल नहीं जनता जवाब देगी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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