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महाभयंकर साजिश! …गुजरात को उद्योग और कर्नाटक को जमीन देने का भाजपाई शिंदे सरकार का दांव

राज्य सरकार के विरुद्ध जनता में जबरदस्त संताप
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की नई सरकार के सत्ता में आने के साथ ही महाराष्ट्र से एक के बाद एक कई बड़ी परियोजनाएं भाजपा गुजरात ले गई। अब महाराष्ट्र के बॉर्डर के पास ४० गांवों को तोड़कर ले जाने की ‘महा’भयंकर चाल भाजपा की कर्नाटक सरकार की ओर से चली जा रही है। इसके तहत सांगली के ‘जत’ तालुका पर कर्नाटक की वक्रदृष्टि पड़ी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने दावा किया है कि ‘जत’ तालुका के सीमा से जुड़े ४० गांवों पर हम दावा ठोकेंगे। उनके इस बयान से महाराष्ट्र में हलचल मच गई है। भाजपा सरकार की इस महाराष्ट्रद्रोही भूमिका के खिलाफ पूरे राज्य में नाराजगी की लहर पैâल गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तीव्र निषेध दर्ज कराया है।

महाराष्ट्र में ‘संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन’ के लिए १०७ लोगों ने बलिदान दिया है। उनका यह बलिदान दिवस अभी दो दिन पहले २१ नवंबर को मनाया गया। उस दिन महाराष्ट्र में १०७ हुतात्माओं का अभिवादन किया गया और उसके दूसरे दिन ही कर्नाटक की भाजपा सरकार की कूटनीति का खुलासा होने से राज्य में खलबली मच गई है। महाराष्ट्र के ४० गांवों को तोड़ने की खुली भाषा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई कर रहे हैं और उस पर ‘मिंधे’ सरकार अपनी आंखें बंद कर बैठी हुई है। कर्नाटक सरकार के इस बयान को २४ घंटे बीत जाने के बाद भी महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है। इस पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि इस विषय को हम बातचीत कर सुलझाएंगे। एक प्रकार से उसके सामने झुकने की नीति उन्होंने अपनाई है।
बोम्मई ने की हदें पार…
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा प्रश्न को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में मामला प्रलंबित रहते हुए भी ४० गांव तोड़ने की बोली बोलनेवाले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने अपनी हदें पार की हैं। बोम्मई ने कहा कि सांगली जिला के ‘जत’ तालुका में ४० गांवों पर दावा ठोकने की तैयारी में हैं, इस पर हम गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं। बोम्मई ने अपने बयान में कहा कि इन ४० गांवों को कर्नाटक को दें, ऐसा प्रस्ताव २०१२ में किया गया था। यहां पानी के प्रश्न और तमाम असुविधा की वजह से इस गांव के लोग त्रस्त होकर कर्नाटक के साथ आने का प्रस्ताव दे चुके हैं।

‘जनरल डायर के जैसा कामकाज’
केंद्र की सरकार अंग्रेजों की सरकार लग रही है। जनरल डायर ने जैसा अन्याय किया था, वैसा ही अन्याय यह सरकार कर रही है। जनरल डायर जब इस देश में आया तो उसने तय किया कि महाराष्ट्र के टुकड़े-टुकड़े करेगा। क्या आज वही काम सरकार कर रही है?

नेहरू हैं जिम्मेदार… भाजपा का जवाब
कर्नाटक के मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि इस सीमा विवाद के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जिम्मेदार हैं। महाराष्ट्र- कर्नाटक सीमा विवाद पंडित नेहरू की देन है। जब राज्य पुनर्रचना आयोग की रिपोर्ट आई तब सीमा भाग के मराठी लोगों को जबरदस्ती कर्नाटक भेजा गया। उस वक्त अगर सख्त भूमिका ली गई होती तो आज यह प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
एक भी गांव कर्नाटक में नहीं जाएगा -देवेंद्र फडणवीस
सांगली जिला के ‘जत’ तालुका का एक भी गांव कर्नाटक में नहीं जाएगा। इसके उलट सर्वोच्च न्यायालय में लड़ाई को और बल दिया जाएगा। बेलगांव महाराष्ट्र के पास ही रहेगा।
जत गांव के लोग कर्नाटक की साजिश का शिकार नहीं होंगे -पाटील
गांव के लोग कहते हैं कि हमें पानी नहीं मिला, इसलिए कर्नाटक में जाने की हमें अनुमति दें। कर्नाटक का यह दावा गलत है। गांववालों को भ्रमित किया गया है। मौजूदा समय में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
हमारी सरकार की आंखें बंद हैं -रोहित पवार
छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करनेवाले कर्नाटक के इस मुख्यमंत्री की हिम्मत देखिए कि अपने जत तालुका के गांव पर दावा ठोकने की बात कर रहे हैं। एक तरफ जहां सीमा भाग के प्रश्न को लेकर कई वर्षों से मामला कोर्ट में प्रलंबित है। वहीं कर्नाटक सरकार नए विवाद को जन्म दे रही है।
‘जनरल डायर के जैसा कामकाज’ -सुप्रिया सुले
केंद्र की सरकार अंग्रेजों की सरकार लग रही है। जनरल डायर ने जैसा अन्याय किया था, वैसा ही अन्याय यह सरकार कर रही है। जनरल डायर जब इस देश में आया तो उसने तय किया कि महाराष्ट्र के टुकड़े-टुकड़े करेगा। क्या आज वही काम सरकार कर रही है?

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