मुख्यपृष्ठनए समाचारसीमा के सवाल पर भाजपा का कर-नाटक-फडणवीस और बोम्मई भिड़े

सीमा के सवाल पर भाजपा का कर-नाटक-फडणवीस और बोम्मई भिड़े

• महाराष्ट्र का एक भी गांव कर्नाटक को नहीं देंगे, बल्कि बेलगांव, निपाणी व कारवार वापस लेंगे
• सीमा क्षेत्र छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता
• सोलापुर, अक्कलकोट यह कन्नड़ भाषाई हिस्सा कर्नाटक को मिले
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर दोनों राज्यों की भाजपा सरकार का नाटक जारी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई द्वारा सांगली के ४० गांवों पर दावा करने के बाद भाजपा के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके दावे का मजाक उड़ाया है। हालांकि बोम्मई ने ट्विटर के माध्यम से इसका जवाब देते हुए सीधे सोलापुर, अक्कलकोट को भी कर्नाटक में शामिल करने की बात कहते हुए जैसे फडणवीस को मूर्ख ही मान लिया है।
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसी बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई के महाराष्ट्र की सीमाएं तोड़ने की बात कहने से मसला और भी बढ़ गया है। बोम्मई ने सबसे पहले सांगली अंतर्गत तालुकाओं के ४० गांवों पर दावा किया, इससे महाराष्ट्र में संताप की लहर उमड़ी व तीव्र प्रतिक्रियाएं आने लगीं। इसी बीच बोम्मई ने एक बार फिर महाराष्ट्र के अधिक हिस्सों पर दावा किया है, जिससे यह विवाद और भी गरमा गया है।

बोम्मई सुप्रीम कोर्ट से बड़े नहीं -फडणवीस
महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा विवाद पर हम सबूत के साथ सुप्रीम कोर्ट गए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस पर पैâसला करेगा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट से बड़े नहीं हैं, ऐसा अपने प्रत्युत्तर में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा। बेलगांव, निपाणी और कारवार यह हमारा हिस्सा है। यही हमारी भूमिका है। हमने अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखी है। हमने कानून के दायरे में रहकर मांग की है, ऐसा फडणवीस ने उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए। फडणवीस ने कहा कि सीमा क्षेत्र के लिए महाराष्ट्र की लड़ाई जारी रहेगी और महाराष्ट्र का कोई गांव कर्नाटक में शामिल नहीं होगा।

बोम्मई ने अब क्या कहा?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा मुद्दे पर चुनौतीभरा बयान दिया है और उनका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। कर्नाटक सरकार प्रदेश की भूमि, जल संसाधन और सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि कर्नाटक के सीमावर्ती जिलों को छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता, बल्कि महाराष्ट्र का सोलापुर, अक्कलकोट इन कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को कर्नाटक में शामिल किया जाए, यह हमारी मांग है। वर्ष २००४ से महाराष्ट्र सरकार ने सीमा मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। लेकिन अब तक उन्हें कामयाबी नहीं मिली है और आगे भी नहीं मिलेगी। बोम्मई ने आगे कहा कि हम कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं।

कर्नाटक के सीएम पर बरसे अजीत पवार ऐसी बातें बर्दाश्त नहीं करेगा महाराष्ट्र!

महाराष्ट्र को मांगने निकले हो क्या? कर्नाटक के मुख्यमंत्री को क्या महाराष्ट्र ऐसा-वैसा लगता है? ऐसा तीखा व आक्रोशित सवाल राज्य के विपक्षी दल के नेता अजीत पवार ने किया है। राकांपा प्रदेश कार्यालय में कल राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की उपस्थिति में बैठक संपन्न हुई। इस बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अजीत पवार ने उक्त सवाल किया। सांगली जिले के जत तालुका के गांवों पर दावा करने के बाद अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अक्कलकोट पर भी दावा किया है। इसे लेकर अजीत पवार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को जमकर फटकार लगाई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री को ऐसे बयानों से खुद को रोकने की बात कहते हुए अजीत पवार ने उनके बयान का निषेध व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोगों का ध्यान महंगाई और बेरोजगारी से हटाने के लिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री के मन में इस समय क्या चल रहा है? यह आप जानते हैं। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के बयान पर कड़े शब्दों में उन्हें फटकार लगानी चाहिए। अजीत पवार ने भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि अब केवल मुंबई को ही मांगना रह गया है।

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