मुख्यपृष्ठटॉप समाचारसियासी सर्वे में भाजपा का सूपड़ा साफ : ४० प्रतिशत से अधिक...

सियासी सर्वे में भाजपा का सूपड़ा साफ : ४० प्रतिशत से अधिक सीटें खोएगी बीजेपी! … अधिकतम २०० सीटें ही जीत पाएगा एनडीए

सामना संवाददाता / मुंबई
पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी भाजपा पूरे देश पर एकछत्र राज करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। खासकर २०२४ में होनेवाला लोकसभा एवं इसी दौरान होनेवाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों सहित मुंबई मनपा का चुनाव जीतने का लक्ष्य उन्होंने निर्धारित किया है। इस दौरान राजनीतिक गलियारे में चल रही एक विशेष चर्चा से महाराष्ट्र का सियासी पारा चढञने लगा और पीएम मोदी तथा भाजपा के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। चल रही चर्चा के अनुसार, भाजपा अपनी वर्तमान सीटों में से ४० फीसदी सीटें वर्ष २०२४ में खो सकती है। इस तरह से बाजपा अधिकतम १९० जबकि पूरा एनडीए मिल कर २०० सीटें मुश्किल से जीत पाएगा। ऐसा दावा किया जा रहा है कि महाराष्ट्र की घाती सरकार में अजीत पवार के सामिल होने के बाद भाजपा ने अंदरूनी सर्वे करवाया। उक्त अंदरूनी सर्वे में लोगों के मन की जो बात सामने आई है, उसके अनुसार, जनता भाजपा के ४० फीसदी सासंसदों विधायकों को बदलवाना चाहती है। सर्वे में लोगों ने ४० से ४५ फीसदी पुराने भाजपाई सासंदों, विधायकों को उम्मीदवारी ने देने की मांग की है ऐसा चौंकाने वाला निष्कर्ष भाजपा के सर्वे में आया है, जिसके कारण भाजपा के विधायकों और सांसदों को टिकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। भाजपा द्वारा हाल ही में कराए गए एक सर्वे के मुताबिक, मौजूदा सांसदों और विधायकों में करीब ६० फीसदी सीटें भाजपा जीत सकती है और ४० फीसदी सीटें खतरे में हैं, यह जानकारी भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने दी है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा निजी कंपनियों के मार्फत पिछले ढाई महीनों में तीन-चार राजनीतिक सर्वेक्षण राज्य के प्रत्येक लोकसभा-विधानसभा क्षेत्रों में कराए गए। खासकर अजीत पवार गुट के महाराष्ट्र की घाती सरकार में शामिल होने के बाद भाजपा द्वारा प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, विधायक-सांसदों के कामकाज, जनता और पदाधिकारियों के साथ उनके व्यवहार, सोशल मीडिया पर भागीदारी, मोदी और विधायक- सांसदों के बारे में जनता की राय आदि पर विषयों पर व्यापक सर्वेक्षण कराया गया। इसके मुताबिक, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय सह संयुक्त मंत्री शिव प्रकाश और प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने शुक्रवार को पूरे दिन और देर रात तक राज्य के प्रत्येक विधायक-सांसद के निर्वाचन क्षेत्रों में स्थिति की समीक्षा की।
इसमें भाजपा के हर विधायक- सांसद को सर्वे के मुताबिक रिपोर्ट कार्ड दिया गया और चेतावनी दी गई कि इसके बारे में कहीं भी बात न करें।
जनप्रतिनिधि के प्रदर्शन के अनुसार, वर्गीकृत किया जाता है, तो निर्वाचन क्षेत्र भाजपा के लिए कितना सुरक्षित या धोखा है। इस संदर्भ में बारीकी से अध्ययन सर्वे में किया गया है। भाजपा अपने मौजूदा विधायकों-सांसदों के अलावा शिवसेना (शिंदे गुट) और अजीत पवार गुट को अधिक सीटें नहीं देगी। आमतौर पर भाजपा विधानसभा की १७० सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और बाकी सीटें शिंदे और पवार गुट को दी जाएंगी। अजीत पवार के पास विधायकों की संख्या अभी भी गुलदस्ते में है, इसलिए उन्हें अपने पास मौजूद विधायकों के अलावा ज्यादा सीटें नहीं दी जाएगी। सर्वे (फीड बैंक) में मोदी और विधायक-सांसदों को लेकर जनता से ली गई प्रतिक्रिया के मुताबिक ५०-६० फीसदी लोगों ने मोदी को पसंद किया है। लेकिन उम्मीदवार बदलने की राय व्यक्त की गई है। कोरोना काल में संबंधित जन प्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी मदद नहीं करने, अन्य कार्य नहीं करने, अभद्र व्यवहार करने, भ्रष्टाचार होने आदि की कई शिकायतें की गई हैं। मुंबई में भाजपा सांसदों में से, मनोज कोटक उपनगरीय रेलवे और रेल यात्रियों की समस्याओं से अवगत हैं, जबकि अन्य सांसद नहीं हैं, ऐसा सर्वे में उल्लेख किया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है और अगला सर्वे दिसंबर में होगा, ऐसा सूत्रों ने बताया।

अन्य समाचार