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शोर के मारे अजगर बेचारे! …अजगरों का सैरगाह बना बीकेसी

जितेंद्र मल्लाह / मुंबई
ऊंची-ऊचीं अट्टालिकाओं वाले मुंबई महानगर के ज्यादातर हिस्सों में समुद्र, जंगल-झाड़ी, मैदान खुली जगह सिमटती जा रही है। ऐसे ज्यादातर स्थानों पर कॉन्क्रीट के जंगल यानी ऊंची अट्टालिकाओं वाली बस्ती ही नजर आती हैं। कई इलाकों में पेड़ नाम मात्र के लिए ही शेष रह गए हैं। इसके बावजूद मुंबई महानगर में कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां अजगर का निकलना आम हो गया है। ऐसा ही एक इलाका है, बांद्रा-पूर्व स्थित बीकेसी। जहां 7 से 15 फुट के अजगर अक्सर घूमते दिख जाते हैं। पिछले 6 महीनों सर्प मित्र इस क्षेत्र से छोटे-बड़े करीब 15 अजगर सर्पों को पकड़ कर संरक्षित वन क्षेत्रों में पहुंचा चुके हैं।

बता दें कि बी.के.सी स्थित पटाका मैदान में बरसात के दौरान बढ़ी घास की सफाई २१ सितंबर की सुबह १०:०० बजे के करीब जे.सी.बी. की मदद किए जाने के दौरान कर्मचारियों ने वहां एक अजगर को घास में घूमते देखा। तुरंत इसकी सूचना सर्पमित्र अतुल कांबले एवं विक्की दुबे को दी गई। उक्त सर्प मित्रों ने मौके पर पहुंच कर उक्त अजगर को सुरक्षित पकड़ा बीकेसी पुलिस को इसकी सूचना देकर वनविभाग यांच्या मार्गदर्शन में उसे सुरक्षित जंगल में मुक्त कर दिया। इसी तरह 15 सितंबर को ही बीकेसी के टाटा कॉलोनी बस स्थानक के पास एक 10 फुट लंबा अजगर सड़क पर घूमते देखा गया। अतुल कांबले को मिली सूचना के आधार पर सर्पमित्र तन्मय शींघटे ने मौके पर पहुंचकर उक्त अजगर को पकड़ा और दोनों सर्पों को वन अधिकारियों के मार्गदर्शन में वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। जबकि १५ सितंबर की रात १० बजे के करीब जीओ वर्ल्ड डॉयव (ओपन थियेटर) गेट क्र. १ से सेक्यूरिटी सूपर वायजर ने एक अजगर को देखे जाने की सूचना दी। जो कि वहां पानी की टंकी के नीचे बैठा था। सूचना मिलने पर पहुंचे सर्प मित्र विक्की दुबे ने उक्त अजगर को सावधानी पूर्वक रेस्क्यू किया।

खाने की तलाश में भी निकलते हैं बाहर
सर्प मित्र अतुल कांबले के अनुसार पहले मुंबई में पकड़े गए सर्पों को धारावी स्थित खाड़ी क्षेत्र (में ग्रोव्स) में छोड़ा जाता था। इससे इस क्षेत्र में अजगर और दूसरे सर्पों की संख्या हजारों में पहुंच गई होगी। पिछले 25-30 वर्षों में बीकेसी में विकास कार्य तेजी से बढ़ा है। सरकारी व राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय निजी कंपनियों, प्रतिष्ठानों के कार्यालयों का यहां हजारों की संख्या में निर्माण हुआ है। इससे इ, क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बढ़ने और खासकर मेट्रो के निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जाने वाली बड़ी-बड़ी मशीनों के कारण शोर-गुल काफी बढ़ा है। इससे अजगर और दूसरे सर्पों के आराम में खलल पड़ती है और वे सुकून की तलाश में लगातार रेंगते रहते हैं। इसी दौरान कई बार सड़क पर पहुंच जाते हैं। इसके अलावा बीकेसी में खुले बड़े होटलों एवं कंपनियों की कैंटीन में बनने वाले खाद्य पदार्थों के अवशेष, जूठे भोजन आदि की गंध भी अजगर को आबादी की ओर आने के लिए आमंत्रित करती है।

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