" /> तन की सेहत, मन का खेल… गायत्री शंकर की सुपर डीलक्स स्वास्थ्य सलाह

तन की सेहत, मन का खेल… गायत्री शंकर की सुपर डीलक्स स्वास्थ्य सलाह

ब्लैक कॉमेडी फिल्म ‘सुपर डीलक्स’ से सफलता के नए झंडे गाड़नेवाली अभिनेत्री गायत्री शंकर का जन्म २ मई १९९३ को कर्नाटक के बंगलुरु में हुआ। उनके दादा और पिता भारतीय सेना में थे, इसलिए बचपन से परिवार में अनुशासन और फिटनेस के प्रति जागरूकता बनी रही। मनोविज्ञान में स्नातक अभिनेत्री गायत्री शंकर शारीरिक स्वास्थ्य के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरूरी मानती हैं।
मूल रूप से तमिलनाडु से संबंध रखनेवाली गायत्री की परवरिश और पढ़ाई कर्नाटक के बंगलुरु में हुई। मनोविज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने सम्मोहन चिकित्सा की ट्रेनिंग भी ली। गायत्री को बारहवीं कक्षा में फिल्म का ऑफर मिला, लेकिन यह फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। बाद में २०१२ में तमिल फिल्म ‘१८ वसुया’ से उन्होंने अपना अभिनय करियर शुरू किया। तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगु, हिंदी और मराठी भाषा का ज्ञान रखनेवाली गायत्री अब स्पेनिश सीख रही हैं। उनका कहना है कि सीखने की प्रक्रिया मन को स्वस्थ रखती है और स्वस्थ मन आपके तन को स्वस्थ रखता है।
हल्के-फुल्के एक्सरसाइज पसंद
गायत्री को जिम में कड़ी वेट ट्रेनिंग करने के बजाय हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना पसंद है। अपनी पहली फिल्म के दौरान उन्हें कड़ी जिम ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा था। यहीं से उन्हें नियमित एक्सरसाइज करने की आदत पड़ी। अब वे सुबह छह बजे उठकर बीच पर या फिर अपने गार्डन में योग-अभ्यास, कार्डियो आदि करती हैं। गायत्री का कहना है कि आप एक्सरसाइज करें या नहीं करें, लेकिन पंद्रह-बीस मिनट वार्म-अप और स्ट्रेचिंग जरूर करना चाहिए। इससे शरीर की स्वाभाविक सक्रियता बनी रहती है।
जीवन में जरूरी है खेल
गायत्री का मानना है कि हर व्यक्ति को किसी न किसी खेल में रुचि लेना चाहिए। इससे स्वाभाविक एक्सरसाइज होती है। वे अक्सर बैडमिंटन खेलती हैं। पशु संरक्षण में गहरी आस्था रखनेवाली गायत्री अपने कुत्ते को टहलाने या उसके साथ खेलने के दौरान काफी रिलैक्स महसूस करती हैं। यह भी उनकी एक्सरसाइज रूटीन का हिस्सा है।
मानसिक स्वास्थ्य को अनदेखा न करें
गायत्री का कहना है कि लोग अपने शरीर को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन मन की दशा पर पूरा ध्यान नहीं देते। मानसिक स्वास्थ्य शायद हमारे समय की सबसे अनदेखी समस्या है। आपको स्वयं से प्रेम करना चाहिए और अपने शरीर की बनावट के अनुरूप एक्सरसाइज करना चाहिए। घूमने, टहलने, लोगों से मेल-मिलाप पर जोर देना चाहिए। यह सब सेहत की प्रक्रिया का हिस्सा है।
पारंपरिक भोजन पसंद
गायत्री सुबह गरम पानी में नींबू और शहद लेने के बाद पौना घंटा कुछ नहीं खाती हैं। नाश्ते में इडली-सांभर या उतप्पा पसंद है। दोपहर के भोजन में दाल, चावल, सब्जी, रोटी, सलाद और नारियल पानी शामिल होता है। रात के भोजन में सूप, सलाद के साथ चिकन पसंद है। उन्हें तमिलनाडु का पारंपरिक व्यंजन ‘चिकन चेट्टीनाड’ विशेष रूप से पसंद है। इसमें मिलने वाला नारियल की चटनी और प्याज का जबरदस्त स्वाद उन्हें खूब भाता है।
चिकन चेट्टीनाड की रेसिपी
सामग्री- ५०० ग्राम चिकन, आधा कटोरी तेल, १५० ग्राम प्याज, १०० ग्राम टमाटर, २ ग्राम दालचीनी स्टिक, २ ग्राम लौंग, २ ग्राम इलायची, ५ ग्राम जीरा, २ ग्राम कढ़ी पत्ता, १० ग्राम हल्दी पाउडर, २५ ग्राम धनिया पत्ती और नमक। पेस्ट बनाने के लिए १०० ग्राम प्याज, ५० ग्राम अदरक, ५० ग्राम लहसुन, ५० ग्राम सौंफ, २० ग्राम जीरा, १० ग्राम लाल मिर्च और १०० ग्राम नारियल।
वि​धि- पेस्ट बनाने में लगनेवाली सारी सामग्री को एक साथ मिलाकर पीस लें। चिकन के छोटे-छोटे टुकड़े कर इस पेस्ट में मसलकर रख लें। एक पैन में तेल गर्म कर उसमें दालचीनी स्टिक, इलायची, लौंग और जीरा डालकर भूनें। इसके बाद इसमें कटी हुई प्याज और कढ़ी पत्ता डालकर हल्का भूरा होने तक भूनें। फिर इसमें टमाटर डालें। सभी चीजों के भुन जाने के बाद इसमें चिकन और हल्दी पाउडर मिक्स करके दस मिनट तक पकाएं। फिर इसमें स्वादानुसार नमक डालकर इसे ढंककर १० मिनट तक पकने दें। इसके बाद ऊपर से लाल मिर्च या काली मिर्च डालकर एक मिनट तक पकाएं। अब इस पर हरा धनिया डालकर गार्निश करें और पराठे या चावल के साथ परोसें।
फायदे- चिकन चेट्टीनाड के पारंपरिक मसाले कफनाशक और सूजन को कम करते हैं, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरुस्त करते हैं, श्वसन-तंत्र को स्वस्थ करते हैं। चिकन चेट्टीनाड से पर्याप्त प्रोटीन मिलता है, जो मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
(लेखक स्वास्थ्य विषयों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार व अनुवादक हैं। ‘स्वास्थ्य सुख’ मासिक के संपादक रह चुके हैं।)