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 दलित छात्र की मौत को लेकर दलित संगठनों में उबाल, …कैंडल मार्च निकाल कर दी श्रद्धांजलि

उमेश गुप्ता / वाराणसी

राजस्थान के जालोर जिले के सायला स्थित एक निजी स्कूल में कथित तौर पर शिक्षक के मटके से पानी पीने के मामले में छात्र की बेरहमी से पिटाई करने के बाद हुई मौत का मामला इस राज्य की सरहद पार कर काशी पहुंच गया है। इस घटना को लेकर समूचे पूर्वांचल में जबर्दस्त आक्रोश है। मंगलवार की शाम बीएचयू गेट से स्टूडेंट्स और प्रबुद्धजनों ने कैंडिल मार्च निकाला तो अधिवक्ताओं ने कचहरी पर मौन जुलूस। इस दौरान पूर्वांचल के दलित संगठनों ने आरोपी को फांसी और जयपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर से मनु की प्रतिमा हटाने की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि देश एक ओर आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और दूसरी ओर मनुवाद व छुआछूत को बढ़ावा देने वाले सवर्णों की फौज दलितों को प्रताड़ित करने से बाज नहीं आ रही है।

पूर्वांचल में पीड़ित परिवार को न्याय, सरकारी नौकरी और मुआवजा दिलाने के लिए मांग की जा रही है।  लंका स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) गेट से विशाल कैंडिल मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, शिक्षक, कर्मचारी और शहर के प्रबुद्धजन शामिल हुए। कैंडल मार्च के मद्देनजर लंका गेट पर ;बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। यह मार्च पहले बीएचयू गेट से रविदास गेट होते हुए रविंद्रपुरी तक प्रस्तावित था, लेकिन ट्रैफिक और सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनकारियों को आगे नहीं जाने दिया गया। पुलिस के जवान प्रदर्शनकारियों के आगे दीवार की तरह खड़े हो गए। सुरक्षा बलों का कहना था कि प्रशासन ने मार्च निकलाने की अनुमति नहीं दी है। काफी देर तक जद्दोजहद के बाद बीएचयू परिसर में ही कैंडिल मार्च निकालने पर सहमति बनी।

कैंडिल मार्च का नेतृत्व बीएचयू कर्मचारी यूनियन के काशीनाथ, पूर्णिमा अहिरवार सुभाष चंद्र साहनी, बृजेश भारती, गौरव कैंडिल मार्च के बाद श्रद्धांजलि, सभा में तब्दील हो गया।

दलित बालक इंद्र कुमार द्वारा सवर्ण शिक्षक की मटकी का पानी पीने की गई बर्बर पिटाई से हुई मौत के खिलाफ वाराणसी के अधिवक्ताओं ने भी मोमबत्ती लेकर मौन जुलूस निकाला। आक्रोशित अधिवक्ता बनारस कचहरी के गेट नंबर तीन पर इकट्ठा हुए। उनके हाथों में दलित छात्र इंद्र कुमार मेघवाल की फोटो थी। एक हाथ में फोटो और एक हाथ में मोमबत्ती लेकर अधिवक्ताओं ने गेट नंबर तीन से गोलघर चौराहे होते हुए अंबेडकर पार्क तक गए। मौन जुलूस निकालने वाले अधिवक्ता अपने हाथों में तख्तियां लिखे लिए हुए थे, जिस पर हत्यारों को फांसी दो आदि नारे लिखे हुए थे। मौन जुलूस का नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता रामदुलार व नित्यानन्द राय कर रहे थे। मौन जुलूस में राजेश प्रजापति, सैयद अफाक हुसैन शान, सुरेंद्र कुमार, साहिल अहमद, सुभाष प्रसाद पटेल, अनूप कुमार, रमेश चंद्र शास्त्री, मुकुंद कुमार कश्यप, सुशील कुमार मौर्य, चंदन, विनोद कुमार, अशोक कुमार उपाध्याय समेत तमाम अधिवक्ता थे। बाद में अधिवक्ताओं ने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है।

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