मुख्यपृष्ठस्तंभपुस्तक समीक्षा : दोहा विधा में परिपूर्ण कृति ‘भारत के उस पार'

पुस्तक समीक्षा : दोहा विधा में परिपूर्ण कृति ‘भारत के उस पार’

राजेश विक्रांत

यह एकदम सच है कि दोहा एक कठिन विधा है। दोहे दो पंक्तियों और चार चरणों में निबद्ध, इतने ही आकार में बड़ी से बड़ी बात कहने में पूर्ण सक्षम होते हैं। इसका प्रथम और तृतीय चरण १३ मात्राओं तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण ११ मात्राओं का होता है। विषम चरणांत लघु दीर्घ होना अच्छा माना जाता है, जैसे- गया। और सम चरणांत का दीर्घ या गुरु लघु होना आवश्यक है, जैसे- मौन। विद्वानों ने दोहों के कुल २३ प्रकार बताए हैं- भ्रमर दोहा, शुभ्रम या भ्रामर, शरब, श्यन, मंडूक, मर्कट, करभ, नर, हंस, मदुकल या गयंद, पयोधर, बल अथवा चल दोहा, पान या वानर, त्रिकल, कक्षप, मच्छ, शार्दूल, अहिबर, व्याल, विडाल, स्वान या सुनक, उदर और सर्प दोहा। प्रख्यात कवि अशोक पांडेय ‘अनहद’ के दोहा संग्रह ‘भारत के उस पार’ में पाठकों को दोहों की एक अलग दुनिया देखने को मिलती है।
अशोक पांडेय ‘अनहद’ साहित्य जगत के एक नामचीन हस्ताक्षर हैं, पुलिस विभाग में होते हुए भी मानवीय अनुभूतियों से लबरेज हैं। निरंतर सृजन करना उनका प्रिय शगल है। इनकी पुस्तकों में- ‘अंतर्मन की अभिव्यक्ति’, ‘अनुभूतियों का धरातल’, ‘खामोशी चुप कहां’, ‘हर अधर गाये’, ‘ऋषियों के देश में’, गद्यकृति ‘ओंकारेश्वर से अमरनाथ’, ‘सप्तम सोपान’ और ‘देवघर से प्रयागराज’ है। अनेक पुस्तकें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत व उ.प्र. शिक्षा विभाग, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालयों, राजाराम मोहनराय पुस्तकालय प्रतिष्ठान, कोलकाता के पुस्तकालयों हेतु चयनित हुई हैं। ‘भारत के उस पार’ में कुल ५८० दोहे हैं। इनके विषयों में विविधता है- देव, देवी वंदना, वायुयान, हमारे महापुरुष, अभिव्यक्ति की आजादी, समता का अधिकार, मैकाले की नीति, न्याय, आस्तीन का सांप, पर्यावरण, हिंदी, धरती, यातायात सुरक्षा, कार्यस्थलों पर सुरक्षा, मत हो कभी उदास, मानव-प्रकृति, कोरोना, दिल्ली हुई निराश, पुलिस, खिलाड़ी, त्योहार, शृंगार, दिशाशूल आदि।
कुछ उदाहरण देखें-
अनहद बुरे विचार का, सदा बुरा परिणाम।
इसकी उसकी चाह में, माया मिली न राम।।
तरुवर कटते जा रहे, जंगल हैं वीरान।
संकट में अतिशय फंसे, जीव-जंतु के प्राण।।
दूजे का सुख देखकर, मत हो कभी उदास।
उसमें ही संतुष्ट रह, जो है तेरे पास।।
किसी काम से जा रहे, दिन है यदि रविवार।
शुभ है पत्ता पान का, खालें बेड़ा पार।।
घर से निकलो सोम को, तो दर्पण लो देख।
कहा बुजुर्गों ने यही उनका ही आलेख।।
पूरी पुस्तक में ऐसे ही मार्गदर्शक दोहे हैं। इनसे कवि की रचना दृष्टि का पता चलता है। सुलतानपुर जनपद के जयसिंहपुर के अहदा गांव के मूल निवासी ‘अनहद’ को अब तक २०० के करीब सम्मान व पुरस्कार मिल चुके हैं। वे ‘लखनऊ गीत’ के रचनाकार हैं, जिसे पद्मभूषण उदित नारायण ने गाया तथा आदेश श्रीवास्तव ने संगीतबद्ध किया है। आकाशवाणी, दूरदर्शन व चैनलों पर आपकी रचनाओं का प्रसारण होता रहता है। देश की विभिन्न स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं द्वारा आपके लेख, कविता व कहानियों का नियमित प्रकाशन होता है। ‘भारत के उस पार’ को विनीता पब्लिशिंग हाउस, नोएडा ने प्रकाशित किया है। कवि सूर्य प्रकाश ‘सूरज’ एवं यशपाल चौधरी का आवरण मनमोहक है। पुस्तक में डॉ. शिवभजन ‘कमलेश’, डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ‘मृदुल’, अनिल तिवारी, रामकिशोर तिवारी ‘किशोर’, अशोक ‘अंजुम’, डॉ. अशोक ‘अज्ञानी’ व डॉ. कृष्णमणि चतुर्वेदी ‘मैत्रेय’ के आशीर्वचन हैं। ‘भारत के उस पार’ दोहा प्रेमियों के लिए उपयोगी कृति है।

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