मुख्यपृष्ठस्तंभपुस्तक समीक्षा : मानवीय संवेदनाओं को उभारने वाली कहानियों का गुलदस्ता 'फरिश्ते'

पुस्तक समीक्षा : मानवीय संवेदनाओं को उभारने वाली कहानियों का गुलदस्ता ‘फरिश्ते’

राजेश विक्रांत

‘फरिश्ते’ की सारी कहानियां पढ़ने के बाद लगता ही नहीं कि यह किसी लेखक का पहला कहानी संग्रह है। दरअसल, सारी कहानियां हैं ही इतनी जोरदार कि उन्हें बुनना किसी मंजे हुए लेखक के बस की ही बात है। लेकिन डॉ. अनिल कुमार का पहला कहानी संग्रह ही बेहद बड़ी उम्मीदें जगाता है।
‘फरिश्ते’ में फरिश्ते, कालरात्रि, कोरोना गली, कर्तव्यपथ, मेरी लता दीदी, लोकतंत्र, तुम कब आओगे, लव जिहाद, छोटकी मलकाइन, नियोग, जैनिटर यानी कुल दस कहानियां हैं। वैसे यह भी सच्चाई है कि डॉ. अनिल कुमार काफी समय से कहानियां लिख रहे हैं और उनकी कहानियां पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित होती रही हैं। वे मूलत: विज्ञान लेखक हैं। गांव की मिट्टी से, परंपराओं से उन्हें काफी प्यार है।
‘फरिश्ते’ हिंदी कहानियों की एक नई दुनिया खोलती है। आज जबकि हिंदी कहानियां अपनी संरचना व संवेदना की दृष्टि से जटिल हो रही हैं, ऐसे में डॉ. अनिल कुमार की कहानियां बहुत सरल व सधे तरीके से हमारी संवेदनशीलता को छूती हुई, मनुष्यता का पक्ष मजबूत करती हुई उपस्थित होती हैं। यह उनके कहानीकार मन की एक बड़ी उपलब्धि है।
संग्रह की पहली और शीर्षक कहानी ‘फरिश्ते’ है। यह कहानी पैâजान मियां जो समाज के प्रति बेहद ईमानदार, निष्ठावान और समर्पित हैं, जो अपनी निजता खोकर समाज की सेवा करते हैं, के इर्द-गिर्द बुनी गई है। कहानी जीवन शैली की प्रमाणिक बानगी से भरी पड़ी है। चरित्रों का अंकन खूबसूरती से किया गया है। दूसरी कहानी का शीर्षक है ‘कालरात्रि’। इसमें कहानीकार स्मृतियों को एक आख्यान में बदल देता है। बहुत सरलता से एक ‘मोटा भाई’ की कहानी कहती हुई आगे बढ़ती है और सुंदर और मोहक संसार/निश्छल संसार प्रकट होने लगता है। कुल मिलाकर, वह एक सुंदर आख्यान पेश करती हुई कहानी है, जिसमें सरल, ‘मोटा भाई’ का चित्र व चरित्र दर्ज है, जो हमारे समय के लोगों को अविश्वसनीय लग सकता है। संकलन में ‘लोकतंत्र, तुम कब आओगे शीर्षक से एक कहानी है, जिसमें कटु यथार्थ प्रकट हुआ है यानी समाज की कड़वी सच्चाई इस कहानी में देखी जा सकती है।
‘लव जिहाद’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण कहानी है। इस कहानी परिवेश-चित्रण बहुत जीवंत तरीके से किया है। अनिल कुमार की कहानियों की विशेषताओं की सूत्र रूप में चर्चा करते हुए उनके भारत-प्रेम, विस्थापन का दंश, स्त्री-पुरुष संबंध, स्त्री की निजता के प्रश्न, ऊब व अकेलेपन, दांपत्य-प्रेम व कम चर्चित किंतु बेहद मानवीय प्रसंगों को कहानियों में जगह देना है। इन खूबियों के साथ उनकी एक बड़ी खूबी नरेशन की ताकत भी है। वे अत्यंत रोचक तरीके से कहानी कहते हैं। इससे पाठक धीरे-धीरे खुद को भूलकर उनकी कहानी का हिस्सा बनने लगता है। उनकी कहानियों की भाषा सरल है, इससे कहानी में सर्मपण की कोई समस्या पैदा नहीं होती है। कुल मिलाकर, डॉ. अनिल कुमार मानवीय संवेदनाओं के कुशल चितेरे कहानीकार हैं। ‘फरिश्ते’ को शतरंग प्रकाशन, लखनऊ ने प्रकाशित किया है। २३४ पेज की इस पुस्तक की कीमत ३५० रुपए है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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