मुख्यपृष्ठस्तंभब्रजभाषा व्यंग्य: नासा नाँय करमनासा

ब्रजभाषा व्यंग्य: नासा नाँय करमनासा

संतोष मधुसूदन चतुर्वेदी

एक आदमी नें अमरीकन अंतरिक्ष एजेंसी नासा मै जाइबे की सोची। बौ चंद्र औरु मंगल गिरह पै जाइकें सोध करबो चाह रह्यो। नासा मै जाइबे के लीये डालर’न मै खरचा होबे। बा नें भौत पइसा जोरौ। नासा में काज करबे वारे’न मै ३६ परिसत भारतीय हतें या तरियां सौं अमरीका में काज करबे वारे डाक्टर’न मै सौं ३८ परिसत और वैज्ञानिक’न में १२ परिसत भारतीय हतैं। भारत मै नसा काऊ अमरीका के नासा सौ कम नांयनें। नसा की महामारी कौ लैकें गंभीर आंकड़े सामै आये हतें। राष्ट्रीय अस्तर पै भये सर्वे मै पतौ चलौ हतै की १० बरस सौ लैकें ७५ बरस तलक की आबादी मै नसा करबे वारेन की संख्या ३७ करोड़ सौं ऊपर चली गयी हतै। यै संख्या दुनिया की तीसरी सबसौ बड़ी आबादी वारे देस अमरीका सौ ऊं जादा हतै। नसा के चुंगल मै फसकें आदमी हर समै हबा हबाई बन जाबे। बिचार करबे वारी बात यै हतै की सराब पीबे वारेन मै सों करीब १९ परिसत ऐसे हतें जो सराब के बिना नाँय रह पामैं। अब बौ जो आदमी नासा पै जाइबे की बात कर रह्यो हतो वा नें छक कें सराब पी। जब सराब खोपड़ी पै चढ़ी तौ बौ एकली बैकली दैन लगौ। बौ घरबारी सों बोलौ- ‘अरी भागवान सुन रही है, आज तू मोकूं मत रोकियो, विगयानिक’न के संग अमरीका के नासा जाय रह्यौ।’ बौ घर सौ भौत जोस सौ निकसौ औरु खुले नाले मै धड़ाम सों गिर परयौ। परौसीन नें जब सबेरें बाकूं नाले मै परयो देखो तौ बा की घरबारी कों खबर करी की डाक्टर साब तौ नाले में परे हतें। घरबारी दौरी दौरी नाले पै पौची औरु बौ पतिदेव कों देखकें ठाड़े सौ पछार खाते भये बोली, ‘हाय दैया… मैनें इनकौ कितनों समझायौ की नसा मत करौ, बिननें मेरी यै बात नायनें मानी, मोसों कह रह्ये नासा जाय रह्यो, मोकूं का पतौ ही की बे नासा तौ नाँय पहुंचे, करमनासा के नाले मै जरूर पौच गये या लीये नसा करबो अच्छो नाँय यै नास की निसानी होबे।’

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