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ब्रजभाषा व्यंग्य: संतोष मधुसूदन चतुर्वेदी सौ दबा’न की एक ही दबा परिवार कौ पियार

भौत टैम सों दादी मादी हतीं। बेटा-बऊ नें बिनकी देखभार कूं नर्स कौं लगायौ। डाक्टरन नेउँ अपने हाथ उठाय दीये, जोऊ सेवा करनों है कर लेओ। औखद असर नाँय कर रर्इं। बेटा-बऊ नें घर के काज मै हाथ बटाइबे कूं बच्चन कौं होस्टल सों बुलबाय लीये। दोनों नौक्री पै चले जामते। बच्चा बार-बार अपनी दादी कौं कबरा में देखबे जामते। दादी ने आँखें खोलीं तौ बच्चा दादी सों चिपटकें कहबे लगे- ‘दादी! पापा कहते हैं कि हमें होस्टल कौ खाइबौ अच्छौ नाँय लगै। का हमारे लियें खाइबौ बनाओगी?’
नर्स ने बच्चन कौं डांटकें भार जायबे कौं कही। अचानक सों, दादी नर्स पै बिफर पड़ीं।’ आप जाओ यहाँ सों। बच्चन कौं डांटबे कौ हक्क कौननें दीयौ? खबरदार, अगर बिनकूं डांटबे की कोसिस करी!’
‘कमाल करौ आप। आपके लीयें ही तो मैनें बच्चन कूं मनौ करौ। बार-बार आइकें आपकूं परेसान कर रह्ये।’
‘अरे! इनकूं देखकें मेरी आँखन कौं कित्तो आराम मिलै, तू कहा जानें! ऐसौ कर मोकूं गुसलघर तलक लै चल।’
नर्स हैरान! कल्ल तलक तौ औखद काम नाँय कर रहीं, आज यै बदलाव। सब समझ के बाहिर ओ नहाइबे के बाद दादी ने नर्स कौं खाइबौ बनाइबे मै सहारे कौं कह्यो। पैलें तौ नर्स नें नाँय करी फिर कछू सोचकें वौ सहारौ देन लगी। खाइबौ बनबे के बाद बच्चन कूं बुलायौ गयौ, रसोई मैई खाइबे की कही।
‘दादी! हम जमीन पै बैठकें ही खामिंगे आपके हाथन सों, मम्मी तौ टेबल पै खाइबौ देंय और खबामें हू नाँय कबू।’
दादी के चैरा पै खुशी हती। बौ बच्चन के पास बैठकें बिनकूं खबान लगीं। बच्चन नें हू दादी के मुंह मै कौर दीये। दादी की आँखन सों आंसू भैन लगे।
‘दादी! तुम रोय कायकों रई औ? दर्द है रौ का? मै आपके पांव दबाय दौं।’
‘अरे! नाँय, यै तौ बस तेरे बाप कूं याद करकें आय गये अंसुआ, बौ ऊ ऐसेंई खामतो मेरे हाथन सों। अब कामयाबी कौ भूत ऐसौ चड़ों हतै की खाइबे कौ हू बखत नांयनें बाके पास और मईया सों मिलबे कौ टैम।’
‘दादी! तुम ठीक है जाओ, हम दोनों आपके ही हाथन सों खाइबौ खामिंगे।’
‘और पढबे कौन जाइगौ? तिहारी मईया रहबे देयगी का तुमकूं?’
‘दादी! अब हम नाँय जामिंगे यहीं रहकें पढींगे।’ दादी ने बच्चन कूं करेजे सों लगाय लियौ।
नर्स ने ऐसौ इलाज कबू नाँय पढो जिनगी मै। अनोखी दवाई हती अपनेन के संग हिल मिलकें रहबे की। यै सब केवल परिवार कौ पियार मिलबे सूं होबै। नर्स तौ यै सुनकें हैरान रै गई, दादी दूसरे ई दिन चंगी है गर्इं।

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