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विकास पर लगा ‘ब्रेक’!… ‘शहरी बुनियादी ढांचा विकास कोष’ की अनछुई पड़ी है ९३ फीसदी राशि

मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा तो खूब जोर-शोर से देती है, मगर समय- समय पर इसके विकास की पोल खुलती रहती है। अब एक ताजी रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने शहरों के विकास के लिए जो योजना बनाई है उसके ऊपर ब्रेक लग चुका है। दरअसल, वित्तीय वर्ष २०२३-२४ के लिए ‘शहरी बुनियादी ढांचा विकास कोष’ के लिए जो बजट जारी किया गया था, उसकी लगभग ९३ फीसदी राशि अनछुई पड़ी है। अब इस वित्तीय वर्ष को खत्म होने में सिर्पâ तीन महीने बचे हैं, ऐसे में शहरों के विकास का क्या होना है, इसे आसानी से समझा जा सकता है।
‘द प्रिंट’ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, २०२३-२४ वित्तीय वर्ष खत्म होने में सिर्पâ तीन महीने बचे हैं और वेंâद्र को १०,००० करोड़ रुपए के ‘शहरी बुनियादी ढांचा विकास कोष’ (यूआईडीएफ) के तहत लगभग ६५० करोड़ रुपए के ही प्रस्ताव मिले हैं। फरवरी में २०२३-२४ के वेंâद्रीय बजट के हिस्से के रूप में घोषित यह परियोजना जुलाई में शुरू की गई थी। उस समय राज्यों को योजना के तहत धन प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए सितंबर की समय सीमा दी गई थी, लेकिन वित्त मंत्रालय के साथ इस परियोजना का सह-संचालन कर रहे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, दिसंबर के पहले सप्ताह तक केवल आठ राज्य राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, गोवा, हरियाणा, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और असम ने लगभग ६५० करोड़ रुपए के प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का कुल मूल्य और भी कम है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्यों को पंâड का लाभ उठाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जमा करने के लिए कहा गया था। दिसंबर के पहले सप्ताह तक आठ राज्यों से ६५० करोड़ रुपए के लगभग ४८ प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसमें से अब तक २००-२५० करोड़ रुपए की १२ परियोजनाएं मंजूर की जा चुकी हैं। मंत्रालय के एक दूसरे अधिकारी ने इसका बचाव करते हुए कहा, ‘कोई देरी नहीं हुई थी, यह पहली बार है कि शहरी क्षेत्र के लिए पंâड की घोषणा की गई है। मानदंडों को अंतिम रूप देने में समय लगता है।’ पंâड २०२३-२४ के लिए उन प्रस्तावों के लिए जारी किया जाएगा जो ३१ मार्च तक स्वीकृत हैं। योजना के तहत धन के उपयोग पर वित्त मंत्रालय ने कहा कि आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय यूआईडीएफ के लिए नोडल मंत्रालय है। १९९५-९६ में बनाए गए ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (आरआईडीएफ) पर आधारित, यूआईडीएफ का लक्ष्य टियर-२ और टियर-३ शहरों में आवश्यक सेवाओं में अंतर को पाटने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद करना है और यह १०,००० करोड़ रुपए के वार्षिक आवंटन की अनुमति देता है। दिसंबर के पहले सप्ताह तक सिर्पâ ४८ परियोजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें जल उपचार संयंत्रों की स्थापना से लेकर श्मशान घाटों के विकास या उन्नयन तक शामिल हैं। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘यह एक लंबी प्रक्रिया है। इसके बाद एनएचबी की तकनीकी समिति इन परियोजनाओं का मूल्यांकन करती है।’ यूआईडीएफ दिशानिर्देशों के तहत, राज्यों को पंâड का लाभ उठाने के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जमा करनी होगी। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश (यूपी), छत्तीसगढ़, हरियाणा और तेलंगाना के अधिकारियों के अनुसार, परियोजनाओं की पहचान करने और डीपीआर तैयार करने में समय लग रहा है, क्योंकि इसे शहर प्रशासन के परामर्श से किया जाना है। इन राज्यों में से हरियाणा और तेलंगाना ने कुछ परियोजना प्रस्ताव भेजे हैं, उत्तराखंड और यूपी ने अभी तक कोई भी प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया है। यूपी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से उन परियोजनाओं के प्रकारों का उल्लेख है जिन्हें शुरू किया जा सकता है।

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