मुख्यपृष्ठस्तंभब्रेकिंग ब्लंडर : मन तड़पत ब्रेकिंग को आज

ब्रेकिंग ब्लंडर : मन तड़पत ब्रेकिंग को आज

राजेश विक्रांत

जब ब्रेकिंग व एक्सक्लुसिव के लिए किसी रिपोर्टर का मन तड़पने लगता है तो वह फेक न्यूजम चरणम समर्पयामि की दशा को प्राप्त हो जाता है। २१ अगस्त को एक रिपोर्टर की यही दशा थी। उनका मन किसी न्यूज को ब्रेक करने के लिए खूब तड़प रहा था। काफी सोच-विचार कर रिपोर्टर ने अपने घर में बैठकर सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर एक ख्याली पुलाव पकाया और अपने आका यानी नागरण अखबार को भेज दी। नागरण ने २२ अगस्त के अंक में पहले पन्ने पर आठ कॉलम की ये खबर छाप दी। रिपोर्टर ने भांग पीकर खबर भेजी तो संपादक ने नशा पत्ती की तरंग में उसकी सच्चाई को चेक नहीं किया या जानबूझकर छाप दिया।
चमचागीरी का कॉपीराइट
नागरण वैसे भी आरएसएस समर्थित अखबार है। भाजपा की चमचागीरी का कॉपीराइट उसके पास है। इसलिए देश व समाज के जरूरी मुद्दों से आम जनता का ध्यान भटकाना उसका परम् कर्तव्य भी है। दैनिक नागरण के राष्ट्रीय संस्करण में भारत ने पाकिस्तान पर की सर्जिकल स्ट्राइक की बैनर हेडलाइन से छपी खबर में कहा गया था कि १९ अगस्त की रात यह सर्जिकल स्ट्राइक हुई। सेना के स्पेशल फोर्स के १२ से १५ कमांडो ने राजौरी के तरकुंडी सेक्टर और पुंछ के भिंभर गली से रात के समय पैदल चलकर एलओसी पार की। पीओके में करीब ढाई किलोमीटर भीतर घुसकर कोटली जिला के नकयाल में आतंकियों के ४ लांचिंग पैड को तबाह कर दिया। इसमें कम से कम ७ से ८ आतंकवादी भी मारे गए।
ब्रेकिंग ब्लंडर
उसी दिन यह खबर तब ब्रेकिंग ब्लंडर बन गई जब रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में इसका खंडन कर दिया कि कोई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ नहीं की गई। लेकिन भारत ने पाकिस्तान की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया।
सर्जिकल स्ट्राइक
सर्जिकल स्ट्राइक सैन्य कार्रवाई का एक रूप होता है। इस तरह के आक्रमण में हवाई हमले का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें यह कोशिश की जाती है कि सटीक बमबारी की जाए, जिससे आस-पास कम से कम नुकसान हो। इस तरह के ऑपरेशन की सफलता के लिए सरकार, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच गहन समन्वय की आवश्यकता होती है।
फर्जीकल स्ट्राइक
जबकि फर्जीकल स्ट्राइक का उत्पादन मीडिया में होता है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया में। इस तरह के आक्रमण में कल्पना शक्ति और अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग किया जाता है, जिसमें यह कोशिश की जाती है कि खबर को ऐसा पेश किया जाए जिससे पूरी दुनिया में ज्यादा से ज्यादा सनसनी पैâले, सोशल मीडिया पर सरकार की प्रचुर जय-जयकार हो। इस तरह की फर्जीकल स्ट्राइक के लिए रिपोर्टर, एडिटर और मालिक के डीएनए में भक्त टाइप क्रोमोसोम होना जरूरी होता है। अगर खबर लिखते या उत्पादित करते समय रिपोर्टर नशापत्ती की तरंग में हो तो खबर में और दम आ जाता है। सूत्रों के अनुसार, दैनिक नागरण के जम्मू-कश्मीर के रिपोर्टर इस तरह का शौक रखते भी हैं।
रिपोर्टर के पीछे पड़ी सेना
नागरण की इस फर्जीकल स्ट्राइक के बाद रक्षा प्रवक्ता ने रिपोर्टर से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उसने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया। रिपोर्टर को भूमिगत होने की दशा को प्राप्त होना पड़ा। सेना के लोग कई दिनों तक उसके पीछे पड़े रहे।
संसद में मचता बवाल
ब्रेकिंग के चक्कर में इतनी बड़ी खबर एक राष्ट्रीय अखबार में छप गई, जरा सोचिए कि अगर उस समय संसद का सत्र चल रहा होता तो खूब बवाल मचता।
(लेखक तीन दशकों से पत्रिकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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