मुख्यपृष्ठनए समाचाररोटी हुई रुआंसी! : गरीबों को लगा आटे का चांटा

रोटी हुई रुआंसी! : गरीबों को लगा आटे का चांटा

दोगुनी हुई कीमत

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
महंगाई की मार से कोई बचा नहीं है। पेट्रोल-डीजल और गैस सहित अन्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। अब महंगाई का चांटा रोटी के आटे पर लगा है। जिस प्रकार सभी वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार अब आटा भी महंगा हो गया है। पेट भरने के लिए आम जनता को रोटी खाने के लिए पहले से अधिक पैसे देने पड़ेंगे। महंगाई की मार झेल रही आम जनता की परेशानी देखकर अब रोटी भी रुआंसी हो गई है।
बता दें कि महंगाई का असर गरीबों के भोजन की थाली पर पड़ रहा है। डीजल, पेट्रोल और गैससहित अन्य खाद्य सामग्रियों के दाम बढ़ रहे हैं। इसी में अब आटे के दाम बढ़ने की वजह से आम जनता परेशान है। दुकानदारों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार खुदरा बाजार में आटे का दाम ५० रुपए प्रति किलो के भी पार जा पहुंचा है। जबकि बीते साल मई में आटा २९.१४ रुपए प्रति किलो के करीब मिल रहा था।

और महंगा होगा आटा

गेहूं की कीमत आनेवाले दिनों में और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। २०२१-२२ के रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन भी घटा है। इसलिए आनेवाले दिनों में आटे का भाव बढ़ने की संभावना व्यापारियों ने व्यक्त की है।

ब्रेड और बिस्कुट भी होगा महंगा

लगातार बढ़ रही महंगाई से आम आदमी त्रस्त है। एक साल में खाद्य तेल से लेकर सब्जियों और चायपत्ती तक की कीमतें बढ़ी हैं। गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी से आटे के दाम १२ साल में सबसे अधिक महंगे हुए हैं। इसी वजह से ब्रेड, बिस्कुट और आटे से बनने वाले उत्पादों का महंगा होना निश्चित है। बिस्कुट, ब्रेड, बन पाव के दाम १० से १५ फीसदी तक बढ़ सकते हैं। कंपनियां गेहूं के बढ़े हुए दाम का भार कीमतें बढ़ाकर आम जनता पर डाल सकती है।

पूरा बजट ही बिगड़ गया

गृहिणी प्रमिला सिंह ने कहा कि हमारे परिवार में बच्चे और बुजुर्ग दोनों हैं इसलिए हम बहुत ज्यादा कटौती नहीं कर सकते। हमें अच्छे खाने और फल-सब्जियों की जरूरत होती है लेकिन बेतहाशा बढ़ती महंगाई ने पूरा बजट बिगाड़ कर रख दिया है। पहले हर महीने कुछ पैसों की बचत हो जाती थी लेकिन अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।

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