मुख्यपृष्ठस्तंभब्रेकिंग ब्लंडर : ये नरेंद्रयान है!

ब्रेकिंग ब्लंडर : ये नरेंद्रयान है!

राजेश विक्रांत

मित्रों,
चंद्रयान-३ की सफल लैंडिंग के पहले टीवी के पर्दे पर मैं क्या आ गया देशभर के मीडिया ने मेरी खूब आलोचना की। अखबार ने तो अपने प्रâंट पेज पर `मोदी फर्स्ट, मून नेक्स्ट’ हेडलाइन के साथ खबर छाप दी। कई अन्य अखबारों ने लैंडिंग के दौरान मेरी तस्वीर दिखाने को लेकर तंज कसा।
क्यों तंज कसा? मैंने क्या गुनाह किया? जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं पब्लिसिटीफोबिया नामक बीमारी से पीड़ित हूं। इसके मरीज को हर एक बात का क्रेडिट लेने की आदत होती है। जब उसे क्रेडिट नहीं मिलती तो उसका ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है। हार्ट बीट कम हो जाती है। मैं आप सभी का प्रधानमंत्री हूं। मेरी सेहत ठीक रखना आप सभी का कर्तव्य है। इसलिए २३ अगस्त को शाम ६ बजे के आसपास चांद के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग सफलतापूर्वक होने वाली थी, इस क्षण का इंतजार देश के १४० करोड़ लोग सांस थामे कर रहे थे। टीवी चैनलों पर सबकी आंखें जमी हुई थीं। तभी स्क्रीन पर मैं प्रकट हो गया।
पब्लिसिटीफोबिया का मरीज और देश का प्रधानमंत्री होने के नाते ये मेरा कर्तव्य भी था। इसलिए टीवी पर मेरी मुस्कुराती तस्वीर आई। हालांकि, मैं दक्षिण अप्रâीका के दौरे पर था। मेरा शेड्यूल बहुत बिजी था, लेकिन मेरे लिए राष्ट्र प्रथम है। और फिर पब्लिसिटीफोबिया नामक मेरी बीमारी। इसलिए मैंने दूरदर्शन व इसरो को पहले बोल दिया था कि मेरे चेहरे को एक एनिमेटेड लैंडर के साथ स्क्रीन पर ऐन मौके पर पेश किया जाए। दरअसल, मुझे भी एहसास हो गया था कि आज हम इतिहास लिखकर रहेंगे। वैसे मुझे देखकर बहुत सारे दर्शक नाराज हो गए। अधिकांश ने मुझे गालियों के प्रसाद से नवाजा। बहुत सारे लोगों ने तो टीवी बंद भी कर दिया। लेकिन कोई बात नहीं। मैं देश के गौरव के लिए इतना अपमान सह लूंगा। चंद्रयान-३ ने विशाखा नक्षत्र में चांद पर लैंडिंग की है। यह बहुत शुभ फलदायक घड़ी मानी जाती है। इससे बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे और देश की पूरी दुनिया में धाक बढ़ेगी। इसका सबसे ज्यादा लाभदायक असर वैज्ञानिक क्षेत्र में पड़ेगा और देश नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। इसलिए मैंने सभी प्रकार के तंज, व्यंग्य और आलोचनाएं सहन कर ली हैं। इसरो को मेरा सुझाव है कि वो चंद्रयान का नाम नरेंद्रयान रख दे। तत्काल प्रभाव से नए नाम को लागू करे और मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिसने भी लैंडर का नाम विक्रम रखा है, उसे मेरे सामने पेश किया जाए। अब जब मेरे नाम पर स्टेडियम आदि के नाम रखे जा रहे हैं तो लैंडर का नाम मोदी लैंडर क्यों नहीं रखा गया? आपने देखा ही होगा कि लैंडिंग के पहले मेरे चेहरे पर भाव कुछ ऐसे थे कि जैसे कब घोषणा हो और हिंदुस्थान का जयघोष हो। वो पल दूर नहीं था। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ रोंगटे खड़े कर देनेवाला शोर सुनाई दिया। इसरो के कंट्रोल रूम में बैठे वैज्ञानिक उठे। सभी के चेहरे पर मुस्कान खिल गई। इसके पीछे भी मेरी प्रेरणा थी। भले ही मैं पब्लिसिटीफोबिया का रोगी हूं, लेकिन देश का प्रधानमंत्री भी हूं। इसलिए आप सभी अबसे चंद्रयान को नरेन्द्रयान कहें।
आपका अच्छेदिन वाला।
(लेखक तीन दशकों से पत्रिकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

अन्य समाचार

लालमलाल!