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ब्रेकिंग ब्लंडर : फटकार सरकार

राजेश विक्रांत

भर्त्सना, फटकार, लानत, दुत्कार, लताड़, धिक्कार, झिड़की, लानत आदि शब्द हमारी राज्य सरकार की किस्मत में परमानेंटली लिख दिए गए हैं। कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी हाई कोर्ट सरकार को फटकारते ही रहते हैं। हरेक मुद्दे पर सरकार को डांट, झिड़की, लानत का प्रसाद मिलता ही रहता है, लेकिन सरकार इन्हें आशीर्वाद के भाव से ग्रहण करती है। मतलब उसे सुधार की बजाय फटकार प्रिय है। लतखोरी से उसे खास प्यार है। सरकार चाहती है कि हर कोई उसे खूब लतियाए। सरकार को ऐसा काम करने में मजा आता है, जिसमें फटकार की संभावना उज्ज्वल रहती है। इसलिए समस्याओं, भ्रष्टाचार, असमानताओं व विसंगतियों का माउंट एवरेस्ट खड़ा होता रहता है, लेकिन सरकार न्याय का शीलभंग करना उचित नहीं समझती है।
आग हो, हवा-पानी हो, सेहत का मुद्दा हो, कानून व्यवस्था हो, पर्यावरण हो, सार्वजनिक सुविधाएं होें, विधायिका हो, पेंशन हो, इन मुद्दों पर जब-तब कोर्ट की फटकार से सरकार उपकृत होती रहती है। सरकार के लिए फटकार का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि सरकार की नीरसता मिट जाती है और उसके स्थान पर तनाव आ जाता है।
लगता है कि कोर्ट की फटकार खाने के मामले में सरकार रिकॉर्ड बनाने की तरफ अग्रसर है। फटकार की जितनी भी शास्त्र सम्मत प्रथाएं हैं सभी सरकार को हासिल हो रही हैं। अब तो ऐसी स्थिति आ गई है कि सरकार गर्व से अपना स्लोगन ये कर सकती है- महाराष्ट्र सरकार, कोर्ट की फटकार। जनता की धिक्कार। नागरिकों की दुत्कार। हमें चाहे जितना लतिआओ। हम नहीं सुधरेंगे।
ये बहुत बड़ी विसंगति है कि जनता के हितों की दुहाई देकर सत्ता में आने पर राजनीतिक दलों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। वे दावे तो आसमान से तारे तोड़ लाने के करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर निराशाजनक ही होती है। बात जब जनहित की आती है तो वे स्वहित को प्राथमिकता देने लगते हैं। सरकार मौन की मच्छर दानी ताने रहती है। इस पर भी तुर्रा ये है कि सरकार द्वारा थोड़े से काम को इस तरह प्रचारित किया जाता है, जैसे उनके सौजन्य से राज्यभर में स्वर्ग उतर आया हो। चारों तरफ खुशहाली का माहौल हो। राज्य के नागरिक स्वस्थ, मस्त व प्रसन्नचित हों, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ होता नहीं है। जनता के करों से अर्जित धन को निर्ममता से प्रचार-प्रसार में उड़ाकर प्रगति, विकास व खुशहाली का झूठा दावा किया जाता है। असत्य को सत्य का जामा पहनाने की कोशिश की जाती है।
हाई कोर्ट ने एक बार फिर सरकार की निंदा की। उसने कहा कि सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया और अदालत के आदेश जारी करने के बाद ही जागी, जब उसे सूचित किया गया कि अग्नि सुरक्षा नियमों और विनियमों के लिए अधिसूचना मई २०२४ तक जारी की जाएगी। हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति के सेवानिवृत्ति के दो साल से अधिक समय तक बकाया नहीं चुकाने को लेकर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने मैंग्रोव मामले में महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया में मैंग्रोव क्षेत्रों को वन विभाग को सौंपने के उसके २०१८ के आदेश का उल्लंघन हुआ है। इस तरह की खबरें सरकार के लिए आम हैं। इससे लगता है कि सरकार का लक्ष्य अधिक अन्न उपजाओ की तर्ज पर अधिक फटकार खाओ है। इससे वह न्याय से असहयोग आंदोलन करती रहती है, इसीलिए तो वह फटकार सरकार है।
(लेखक तीन दशक से पत्रिकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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