मुख्यपृष्ठनए समाचारब्रेकिंग ब्लंडर : चुनाव से ज्यादा मजा स्टार प्रचारक में

ब्रेकिंग ब्लंडर : चुनाव से ज्यादा मजा स्टार प्रचारक में

राजेश विक्रांत

प्रश्न- नेता जी आप खुश हैं न। पार्टी ने आपको एक वीआईपी सीट चंदौर १ से एमएलए का टिकट दे दिया है?
उत्तर-मैं भगवान के सामने हाथ जोड़कर कहता हूं कि मेरा चुनाव लड़ने का मन नहीं है, एक फीसदी भी इच्छा नहीं है, तो भी पार्टी ने मुझे टिकट दे दिया। लेकिन मैं टिकट मिलने से दिल से खुश नहीं हूं।
प्रश्न- क्यों खुश नहीं हैं। टिकट तो किस्मत वालों को मिलता है?
उत्तर-मैंने इस चुनाव के लिए अलग प्लान बनाया था। सोचा था स्टार प्रचारक की हैसियत से रोज ८ सभाएं करूंगा। ५ में हेलिकॉप्टर से तथा तीन में कार से पहुंच सकूं, ऐसी जगह जाने की तैयारी में था। मैं दूसरे उम्मीदवारों के लिए भाषण देना चाहता हूं, जन सभाएं करना चाहता हूं। उन जनसभाओं में जनता को वादों व आश्वासनों का टॉनिक पिलाना चाहता हूं। अपनी पार्टी भारतीय लोक पार्टी-भालोपा की ओर से लोकलुभावन घोषणाएं करना चाहता हूं। सोच रहा था कि हेलिकॉप्टर से चुनाव क्षेत्रों में जाऊंगा और धुंआधार भाषण दूंगा। लेकिन सारा गुड़ गोबर हो गया। भगवान को कुछ और ही मंजूर था, भालोपा के मेरे आका चाहते हैं कि मैं चुनाव लडूं और फिर से जनता के बीच जाऊं। लेकिन मेरे आकाओं को ये नहीं पता कि हाल फिलहाल भालोपा कार्यकर्ताओं व टॉमीज के बीच कुछ फर्क नहीं रह गया है।
प्रश्न-टॉमीज वाली फीलिंग का क्या मतलब?
उत्तर- आप पत्रकार हैं। आप सब जानते हैं। भालोपा अपने कार्यकर्ताओं को टॉमी की तरह ट्रीट करती है। अब आप ही बताओ कि जिसे हेलीकॉप्टर में उड़ना, दूसरे उम्मीदवारों के लिए प्रचार करना पसंद है, उसे क्यों चुनाव में खड़ा कर दिया है।
प्रश्न- आप केंद्रीय प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम है, आपको भालोपा का कद्दावर नेता माना जाता है, फिर चुनाव लड़ने से इतनी एलर्जी क्यों? सुना है कि केंद्रीय मंत्री किंदिया जी को भी पार्टी एमएलए का टिकट दे रही है!
उत्तर-भाई, जले पर नमक मत छिड़को! किंदिया जी की बात किंदिया जी जानें। लेकिन किंदिया जी भी दिल से खुश नहीं होंगे। हाल ही में भालोपा ने केंद्रीय प्रदेश के उम्मीदवारों की अपनी दूसरी लिस्ट जारी की है, जिसमें पार्टी ने प्रदेश के कई बड़े नेताओं को टिकट दिया है। इसमें चार सांसद और तीन केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। क्या जरूरत थी पार्टी को इन्हें घोड़े से उतारकर गधे पर बिठाने की? और मैं क्या खाक बड़ा नाम हूं? पार्टी ने मुझे चुनावी राजनीति में धकेल दिया है। सच कह रहा हूं, मैं अंदर से खुश नहीं हूं, इसलिए कि मेरी चुनाव लड़ने की इच्छा ही नहीं थी। चुनाव लड़ने का एक माइंड सेट होता है। अपने को तो दूसरों के प्रचार के लिए जाना है। वहां भाषण देना है। ब़ड़ी-बड़ी फेंकना है। वोटरों से बोलबचन करना है। उन्हें लुभाना है। बड़े नेता हो गए अब तो अपन। हाथ जोड़ने कहां जाएं? खुद चुनाव लड़ो तो बहुत हाथ जोड़ना पड़ता है। बड़े नेता ये थोड़े करते हैं। मंच पर चढ़े भाषण दिया, तालियां बजवाई और काफिले के साथ निकल गए। मैंने तो यही सोचा था।
प्रश्न-तो फिर क्या करेंगे आप?
उत्तर-क्या करेंगे, कुछ नहीं करेंगे। कोई विकल्प नहीं है मेरे पास। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि मैं उम्मीदवार हूं। मुझे लग ही नहीं रहा है कि मुझे टिकट मिल गया है। अब मैं कुछ नहीं कर सकता। पार्टी के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। फिर घर बैठना पड़ सकता है, ऊपर से ईडी व सीबीआई के पीछे पड़ जाने की संभावना है। मैं जानबूझकर अपना करियर क्यों खराब करूं।
प्रश्न-आप पर चंदौर शहर के कई अपराधिक तत्वों को संरक्षण देने के आरोप हैं?
उत्तर-तो इसमें गलत क्या है। समाजसेवा की शुरुआत घर से होती है। नगर निगम चुनाव में मैंने अपने बेटे प्रकाश के हर कदम का समर्थन किया था। बेटे का समर्थन न करूं तो किसका करूं। प्रकाश की सिफारिश पर युवराज उस्ताद की पत्नी को पार्षद का टिकट दे दिया तो विरोधियों ने युवराज को गैंगस्टर का खिताब दे दिया। लेकिन मैं युवराज का साथ क्यों छोडूं्? छोडूंगा भी नहीं। आपने देखा भी होगा कि चंदौर के एक सार्वजनिक गणेश उत्सव की आरती में मेरे साथ युवराज भी पूरे समय साए की तरह मौजूद था। युवराज मेरे परिवार का शुभचिंतक है।
(लेखक तीन दशकों से पत्रिकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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