मुख्यपृष्ठस्तंभब्रेकिंग ब्लंडर : ७१ में तलवार! ...किस पर वार?

ब्रेकिंग ब्लंडर : ७१ में तलवार! …किस पर वार?

राजेश विक्रांत

७१ साल की उम्र में उनकी इस तरह की फुर्ती देखकर लोग हैरान हो गए। कुछ लोगों ने सोचा कि बुजुर्गवार खुन्नस में तलवारें भांज रहे हैं। इस उम्र में वे किसको अपनी तलवार का निशाना बनाना चाहते हैं? भांजे के निशाने पर कहीं मामा तो नहीं हैं? कुछ लोग फटाफट जनरल नॉलेज की पुस्तकें खोजने लगे कि ओलिपिंक तलवारबाजी में एंट्री एज क्या है? इन्हें अगर भेजा जाए तो सीनियर वर्ग में जरूर गोल्ड मेडल ला सकते हैं।
थोड़ी देर में पता चला कि वायरल वीडियो एमपी के सागर जिले की रेहली के विधायक जी का है। विधायक जी मंत्री भी हैं और मोहर्रम के अवसर पर तलवारबाजी में शौकिया हाथ आजमा रहे थे।
गोपाल बाबू की वायरल कहानी कुछ मिनटों की ही रही। इसमें उनके कई कर्म हो गए। तेजी, चुस्ती-फुर्ती से लेकर खुन्नस तक की संभावनाओं का जन्म हो गया। यह था एमपी के वरिष्ठ भाजपा नेता और पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव का एक अलग ही रूप। मोहर्रम के मौके पर उन्होंने ऐसी तलवारबाजी की कि लोग दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो गए। कुछ लोगों ने उनसे ओलिंपिक में हिस्सा लेने का सुझाव दे डाला कि सर आप तलवारबाजी में जरूर गोल्ड मेडल जीत सकते हैं। वहां पर मौजूद एक दिलजले ने इस तलवारबाजी को दूसरा ही रंग दे दिया। भाई, ऐसा है कि टिकट मंजूरी की उम्र ज्यादा-से-ज्यादा ७० साल है और गोपाल बाबू अब ७१ के हो गए हैं। यानी टिकट सुख प्राप्त करने की सीमा क्रॉस कर चुके हैं। इस बार अगर पार्टी पिछले साल चुनाव का फार्मूला लागू करती है तो उम्र की वजह से उनका टिकट खतरे में पड़ सकता है। यानी कि गोपाल बाबू की चुनावी टिकट पर फिलहाल उम्र की सीमा की तलवार लटक रही है और उस तलवार का असर कम करने के लिए वे मौका मिलने पर तलवार भांजते हैं। देखा आपने, वायरल और ब्लंडर के बीच कितना कम फासला होता है? मोहर्रम की तलवारबाजी को भाई लोग टिकट बचाने की कवायद करार देते हैं।
हम सब जानते हैं कि आमतौर पर राजनेता राजनीति के मैदान में करतब दिखाते ही हैं। ये उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। करतब से ही उनका नेता जन्म या अवतार सार्थक होता है। पक्ष-विपक्ष में उठापटक होती है। इसमें कोई जीतता है तो कोई हारता है। मगर कुछ नेता राजनीति के २४ वैâरेट योद्धा होते हैं। गोपाल बाबू राजनीति में अपराजेय योद्धा कहे जाते हैं और माना जाता है कि अपने क्षेत्र की जनता के दिलों में राज करने की वजह से वो हर दौर में चुनाव जीत जाते हैं। साथ में उनके भीतर कुछ ऐसी कलाबाजियां भी अवतरित हो जाती हैं जिनको देखकर लोग अचंभित रह जाते हैं, गोपाल बाबू ऐसे ही जियाले नेता हैं। इसलिए वो इन दिनों अपनी तलवारबाजी को लेकर जमकर वायरल हो रहे हैं। लेकिन अब तो देखना ही होगा कि सुर्खियों में आने के बाद गोपाल बाबू अपना चुनावी टिकट बचा पाते हैं या नहीं।
लेखक तीन दशकों से पत्रिकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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