मुख्यपृष्ठसमाचारजम्मू-कश्मीर पर स्तन कैंसर का कहर!

जम्मू-कश्मीर पर स्तन कैंसर का कहर!

सुरेश एस डुग्‍गर / जम्मू

जम्मू-कश्मीर में हर साल ७०० से अधिक महिलाएं स्तन वैंâसर से अपनी लड़ाई हार रही हैं। नए आंकड़ों से एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिदिन औसतन २ महिलाएं इस खतरनाक बीमारी के कारण दम तोड़ देती हैं। प्रत्येक संख्या के पीछे अधूरे सपनों और तबाह परिवारों की कहानी छिपी है।
यह सच है कि जम्मू-कश्मीर में स्तन कैंसर ने खतरनाक रूप धारण कर लिया है और नवीनतम आंकड़ों से केंद्र शासित प्रदेश में महिलाओं के बीच मामलों की बढ़ती घटनाओं और मृत्यु दोनों का पता चलता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना औसतन दो मरीज इस बीमारी से जंग हार जाते हैं।
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले २०२३ में जम्मू-कश्मीर में ७३२ महिलाओं की स्तन कैंसर से मौत हो गई। इसका मतलब यह है कि पिछले साल औसतन प्रतिदिन दो महिलाएं इस बीमारी की शिकार हुर्इं। इसके अलावा, २०१९ और २०२३ के बीच ५ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कुल २,०२४ महिलाओं ने स्तन वैंâसर से अपनी जान गंवाई, जो एक चिंताजनक आंकड़ा है।
साल-दर-साल मौतों की संख्या लगातार बढ़ी: २०२३ में ७३२, २०२२ में ७१२, २०२१ में ६९४, २०२० में ६७४ और २०१९ में ६५४। विशेषज्ञों का मानना है कि मृत्यु दर के आंकड़ों में यह बढ़ोतरी गंभीर चिंता का कारण है। इसके साथ ही, महिलाओं में स्तन कैंसर के ताजा मामलों में भी वृद्धि देखी गई। रिकॉर्ड के अनुसार, २०१९-२०२३ के दौरान जम्मू-कश्मीर में ९,३२१ महिलाओं में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। वार्षिक विवरण बढ़ती घटनाओं पर प्रकाश डालता है – २०२३ में १,९६७ नए मामले, २०२२ में १,९१५, २०२१ में १,८६४, २०२० में १,८१२ और २०१९ में १,७६३ मामलों का निदान किया गया।
डॉक्टरों ने डेटा पर चिंता व्यक्त की है, जो दर्शाता है कि अधिक मामले सामने आने के अलावा, समय पर निदान की कमी और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुंच की कमी के कारण भी सालाना अधिक संख्या में मौतें हो रही हैं। वरिष्ठ सलाहकार स्तन, कोलोरेक्टल और पेरिटोनियल सरफेस मैलिग्नेंसीज, डॉ. शबनम बशीर के मुताबिक, स्तन कैंसर विश्व स्तर पर और कश्मीर में भी बढ़ रहा है, जिसमें जीवनशैली में बदलाव सहित कई योगदान कारक हैं। स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर हत्यारों में नंबर एक है। इसे अक्सर शहरी आबादी की बीमारी कहा जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में यह दर २२ महिलाओं में से एक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह ६० में से एक है। बीएमआई में वृद्धि, मोटापा, देर से पहला बच्चा पैदा करना, कम स्तनपान और जीवनशैली में बदलाव के कारण जोखिम बढ़ रहे हैं। डॉ. शबनम के अनुसार, स्वस्थ वजन बनाए रखने, जंक फूड से परहेज करने, पर्याप्त व्यायाम करने और अन्य जीवनशैली उपायों के माध्यम से ३० प्रतिशत तक कैंसर को रोका जा सकता है।

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