मुख्यपृष्ठसमाचारदो साल बाद टूटा ... कोरोना का `बंधन'!

दो साल बाद टूटा … कोरोना का `बंधन’!

• अमेरिकी भाई को भेजी गई धारावी की राखी
• १५० परिवारों का पटरी पर लौटा व्यवसाय
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में दो साल बाद कोरोना पूरी तरह काबू में आने के बाद धारावी में रोजगार पर निर्भर करीब १५० परिवारों ने इस साल बड़ी संख्या में राखियां बनाई हैं। इसके अलावा दो साल बाद एक बार फिर राखियां अमेरिका समेत कई देशों में भेजी गई हैं। इसके अलावा देश के कई राज्यों में भी बड़े पैमाने पर राखियां भेजी गई हैं। इसलिए साल भर का रोजगार पटरी पर आने से व्यापारियों ने संतोष व्यक्त किया है।

मार्च २०२० में कोरोना मुंबई में दाखिल हुआ था। इसके कुछ ही दिनों बाद भीड़भाड़ वाली मुंबई में कोरोना के सैकड़ों `हॉटस्पॉट’ बन गए। इसमें एशिया की सबसे बड़ी और घनी आबादी वाली धारावी झोपड़पट्टी में कोरोना को पैâलने से रोकने के लिए मनपा को सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। हालांकि प्रशासन के सुनियोजित कार्य और धारावी के लोगों की जिम्मेदारी के चलते मनपा के `धारावी मॉडल’ की विश्व में सराहना हुई है। दूसरी तरफ कोरोना काल में चमड़ा उद्योग, वैâटरिंग, राखी बनाने, मिट्टी के बर्तन, रिसाइक्लिंग जैसे कई लघु उद्योग वाले धारावी को तगड़ा झटका लगा था। फिलहाल अब दो सालों के बाद धारावी में ये सभी व्यवसाय जोर पकड़ने लगे हैं। इसमें राखी व्यवसाय पर निर्भर रहनेवाले पटवा समुदाय के करीब १५० परिवार भी हैं।

संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता
विदेशों में रहनेवाले हिंदुस्थानियों को भेजी जानेवाली राखियों में पारंपरिक संस्कृति के अनुसार विभिन्न डिजाइन और रंग-बिरंगी राखियां हैं। इसमें छोटे बच्चों के लिए डोरेमॉन, छोटा भीम, बच्चों के लिए बाल गणेश जैसी राखियों को विदेशों में भी पसंद किया जाता है। इसके अलावा देवी-देवताओं की तस्वीरोंवाली और प्राकृतिक राखियों को भी पसंद किया जा रहा है। यह जानकारी दोस्ती राखी आर्ट की संगीता पटवा ने दी। व्यापारी अशोक कुमार पटवा ने कहा कि पारंपरिक होने के कारण हम इस व्यवसाय पर निर्भर हैं लेकिन कोरोना ने हमारे व्यवसाय को चौपट कर दिया था। पांच फीसदी भी व्यापार नहीं हुआ था। इस साल दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में राखियां भेजी गई हैं।

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