मुख्यपृष्ठसमाचाररेल अधिकारियों की दबंगई! ट्रैकमैनों का जीना हुआ मुहाल

रेल अधिकारियों की दबंगई! ट्रैकमैनों का जीना हुआ मुहाल

  • न्याय के लिए डीआरएम से लगाई गुहार

कुमार नागमणि / मुंबई
पश्चिम रेलवे के दादर रेलवे स्टेशन के अंतर्गत कार्य करनेवाले ट्रैकमैनों का पिछले कुछ समय से अधिकारियों की दबंगई से जीना मुहाल हो गया है। इसके लिए दर्जनों ट्रैकमैनों ने डीआरएम से न्याय के लिए गुहार लगाई है।
बता दें कि पश्चिम रेलवे के दादर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन लाखों की संख्या में यात्री लोकल ट्रेनों से यात्रा करते हैं। इन ट्रेनों के ट्रैक की सुरक्षा की जिम्मेदारी यहां के ट्रैकमैन पर होती है, जो प्रतिदिन रेलवे के ट्रैक पर नजर बनाए रखते हैं और उसकी देखभाल करते हैं लेकिन पिछले कुछ समय से ट्रैकमैनों के साथ यहां के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पी. वे. पर दबंगई किए जाने का आरोप लगाया है। इससे परेशान ट्रैकमैनों ने डीआरएम से न्याय की गुहार लगाते हुए निवेदन दिया है। जिसमें बताया गया है कि अधिकारी उन्हें जबरन अधिकारियों के यहां काम के लिए भेजते हैं। इसके अलावा दूसरे काम भी कराए जा रहे हैं। यह सब काम करने से मना करनेवाले ट्रैकमैन को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते हुए चार्जशीट देकर उनकी इंक्रीमेंट रोकी जा रही है। आरोप है कि इस तरह से अभी तक २३ ट्रैकमैनों को चार्जशीट दिया जा चुका है। इसको लेकर रेल मजदूर यूनियन के साथ मिलकर डीआरएम कार्यालय पर मोर्चा भी निकाला गया है। रेल मजदूर यूनियन के प्रफुल म्हात्रे ने बताया कि इन ट्रैकमैनों को परेशान कर जबरन चार्जशीट देनेवाले अधिकारी की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है। इसके साथ ही बिना कारण जिन ट्रैकमैनों को चार्जशीट देकर उनकी इंक्रीमेंट रोकी गई है उसे रद्द कर इंक्रीमेंट दिया जाए।
मां की मौत होने पर ट्रैकमैन को दिया चार्जशीट
रेल मजदूर यूनियन की तरफ से आरोप लगाया गया है कि कल रात को ट्रैकमैन अनर्जित रात पाली कर घर जाते समय मध्य रेलवे में पंजाब मेल से गिरकर मौत हो गई। यह सीनियर सेक्शन इंजीनियर पी वे दादर के अधीनस्थ कार्यरत था। पिछले माह में अनर्जित की मां का निधन हो गया था। अनर्जित की मां की तबीयत अधिक खराब होने पर वे अपने मूल गांव गए थे। जहां पर कुछ दिनों के बाद उनकी मां की मौत हो गई। जिसकी जानकारी कर्मचारी द्वारा अपने आफिस में दी गई। जब कर्मचारी अपने गांव से ऑफिस में आया तब सीनियर सेक्शन इंजीनियर पी वे दादर द्वारा लेट होने पर चार्जशीट देकर तीन साल का इंक्रीमेंट बंद कर दिया गया था लेकिन अपील करने पर चार्जशीट माफ कर दिया गया। जिसके कारण वे मानसिक रूप से काफी परेशान थे। इन सब आरोपों को लेकर जब सीनियर सेक्शन इंजीनियर पी वे दादर उमेश चंद गुप्ता से संपर्क किए जाने पर बताया कि यह सब आरोप बेबुनियाद है। रेलवे से वेतन ले रहे हैं तो काम करना ही पड़ेगा। गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है। किसी को भी किसी अधिकारी के यहां काम के लिए नहीं भेजा गया है जिसे भेजा गया है वह सामने आकर बताए है लेकिन जब गए ही नहीं तो आएंगे कैसे ? वे सभी तरह की जांच के लिए तैयार हैं।

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