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गड़े मुर्दे : दाऊद इब्राहिम की संपत्ति पर बोली लगानेवाले का ये हश्र होता है!

जिन्होंने नीलामी में संपत्ति खरीदी उनकी आपबीती

जीतेंद्र दीक्षित
आज फिर एक बार दाऊद इब्राहिम की संपत्तियों की नीलामी होने जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि कुछ लोग इन संपत्तियों पर बोली लगाने के लिए आएंगे। ऐसे लोगों का इरादा अपने आप को देशभक्त साबित करना होता है और दुनिया को ये जताना होता है कि वे दाऊद के नाम से डरते नहीं। ऐसी नीलामी कई लोगों के लिए खुद को चमकाने का भी एक मौका होता है, क्योंकि राष्ट्रीय मीडिया इनमें खासी रुचि लेता है। दाऊद की संपत्तियों की नीलामी का सिलसिला अब से २५ साल पहले शुरू हुआ था। दिसंबर २००० में इनकम टैक्स विभाग की ओर से पहली बार दाऊद की संपत्ति की नीलामी हुई थी, लेकिन दाऊद के खौफ के कारण एक भी बोली लगानेवाला नीलामी के ठिकाने पर नहीं आया।
मैं तब एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के लिए काम करता था और कोलाबा के डिप्लोमेट होटल में हुई उस नीलामी को मैंने कवर किया था। नीलामी के लिए दाऊद की ११ संपत्तियां रखी गई थीं, जिनके बारे में अखबार में विज्ञापन दिए गए थे। इनकम टैक्स के अधिकारी २ घंटे तक होटल के हॉल में बैठे रहे, लेकिन कोई बोली लगाने के लिए नहीं आया। उसके बाद मैंने न्यूज चैनल के लिए एक स्टोरी फाइल की कि भले ही दाऊद मीलों दूर कराची में बैठा हो, लेकिन मुंबई में अभी भी उसका खौफ बरकरार है। उसी के डर के कारण कोई भी शख्स दाऊद की संपत्ति पर बोली लगाने नहीं आया। शहर के एक प्रमुख इलाके में संपत्ति कौड़ियों के दाम मिल रही हो, फिर भी कोई उसको खरीददार न मिले तो उसके पीछे और क्या कारण हो सकता है।
मेरी इस खबर को देखने के बाद दिल्ली के अजय श्रीवास्तव ने मुझसे संपर्क किया। पेशे से वकील श्रीवास्तव ने मुझसे कहा कि अगली बार जब भी नीलामी होगी तो वे दाऊद की संपत्ति पर बोली लगाने के लिए मुंबई आएंगे। ये श्रीवास्तव का निजी फैसला था, किसी और का नहीं।
अगली नीलामी मार्च २००१ में हुई और उस नीलामी में अजय श्रीवास्तव बोली लगानेवाले एकमात्र शख्स थे। उन्होंने नागपाड़ा के जयराजभाई गली में दाऊद की दो दुकानों पर बोली लगाई और उसे खरीद लिया। भले ही कागज पर वे उन दोनों दुकानों के मालिक हो गए थे, लेकिन आज तक उन दुकानों का कब्जा अजय श्रीवास्तव को नहीं मिल पाया है। यहां तक कि वे उसे सिर्फ एक बार ही देखने जा सके, वो भी कड़े पुलिस बंदोबस्त के साथ। कब्जा हासिल करने के लिए उन्होंने लघुवाद न्यायालय में मुकदमा दायर किया था, जिसमें दाऊद की बहन हसीना पारकर प्रतिवादी थी। पहले तो कई तारीखों पर पारकर की तरफ से कोई अदालत में आया ही नहीं, लेकिन जब अदालत ने चेतावनी दी कि वो ‘एक्स पार्टी’ (एकतरफा) आदेश देगी तो हसीना के वकीलों ने आना शुरू किया। साल २०११ में श्रीवास्तव ने मुकदमा जीत लिया। इसके बावजूद आज तक संपत्ति का कब्जा उन्हें नहीं मिल पाया है और वे अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं।
इस बीच अजय श्रीवास्तव को डी-कंपनी की ओर से धमकी भरे फोन भी आए। एक बार दाऊद के रिश्तेदारों ने उनके सामने ये पेशकश भी की कि वे पैसे लेकर संपत्ति पर अपना दावा छोड़ दें, लेकिन अजय श्रीवास्तव ने इससे इनकार कर दिया। वह आज भी मुकदमा लड़ रहे हैं। संपत्ति का नीलाम होना दाऊद के रुतबे पर एक प्रहार था और अगर उस पर से कब्जा हट जाता है तो डी. कंपनी के लिए ये बेइज्जती वाली बात होती। श्रीवास्तव ने एक बार संपत्ति मुंबई पुलिस को भी दान करने की पेशकश की। लेकिन मुंबई पुलिस ने लेने से मना कर दिया। अजय श्रीवास्तव की तरह ही पीयूष जैन और हेमंत जैन नाम के दिल्ली के दो कारोबारी भाई भी दाऊद की संपत्ति पर बोली लगाकर पछता रहे हैं। २० सितंबर २००१ को हुई नीलामी में उन्होंने ताड़देव इलाके की एक दुकान पर बोली लगाई थी।
अब फिर एक बार दाऊद की संपत्ति की नीलामी हो रही है। इस बार दाऊद की मां अमीना बी के नाम रत्नागिरी जिले की चार संपत्तियों की नीलामी होगी, जिनकी कुल कीमत १९ लाख रुपए के करीब है। इससे पहले साल २०१७ में मुंबई में भी दाऊद की डांबरवाला बिल्डिंग की संपत्ति की नीलामी हुई थी, जिसमें दाऊद का भाई इकबाल कासकर रहता था। ये देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कितने लोग दाऊद की संपत्तियों पर बोली लगाने आते हैं। कितने लोग वास्तव में संपत्ति खरीदना चाहते हैं और कितने लोग सिर्फ स्वप्रचार के लिए नीलामी में शामिल होते हैं।

 

 

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