मुख्यपृष्ठनए समाचारगड़े मुर्दे : फंसेगी अधिकारियों की गर्दन!

गड़े मुर्दे : फंसेगी अधिकारियों की गर्दन!

जय सिंह

सरकारी महकमा चोरी करने के लिए बदनाम होता है और अधिकारी उस चोरी का पर्दाफाश करने के लिए जी जान लगा देते हैं, लेकिन फरीदपुर के रजिस्ट्री कार्यालय से तीन लाख रुपयों से भरा बैग चोरी का मामला अब सरकारी अधिकारियों के गले की फांस बनता जा रहा है। फरीदपुर रजिस्ट्री कार्यालय से तीन लाख रुपयों से भरा बैग चोरी होने की घटना को अब अफसर और कर्मचारी नकारने लगे हैं। घटना के दूसरे दिन भी तहरीर न देने से इस मामले में तमाम सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, स्थानीय कार्यवाहक थाना प्रभारी सत्य सिंह खुद तहरीर लेने पहुंचे, मगर किसी भी अफसर या कर्मचारी ने तहरीर नहीं दी। उप निबंधक अधिकारी करुणेश वर्मा ने बरेली से पहुंचे एआईजी स्टांप एसके मिश्रा को भी गुमराह कर दिया और लूट की घटना को सिरे से ही नकार दिया, जबकि मंगलवार शाम उन्होंने ही सीओ फरीदपुर गौरव कुमार और एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल को ३.५ लाख रुपए चोरी होने की सूचना दी थी।
साथ ही अधिकारियों को सीसीटीवी फुटेज दिखाते हुए बताया था कि उप निबंधक कार्यालय के बाहर एक अधिवक्ता के बिस्तर पर बैठकर चोर ने रेकी कर घटना को अंजाम दिया। चोरों की संख्या तीन और फरार होने में इस्तेमाल कार का रंग सफेद बताया गया। उप निबंधक करुणेश वर्मा के चालक ने चोरों को भागते हुए भी देखा था। उसने चोरों का पीछा भी किया था, मगर वे शाहजहांपुर की ओर कार दौड़ा ले गए। रजिस्ट्री कार्यालय में गैरकानूनी तरीके से प्राइवेट बाबू रखा गया है, जो रजिस्ट्री कार्यालय का पूरा काम देखता है। साथ ही नकदी का भी हिसाब वही रखता है। यही वजह है कि रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी रिपोर्ट दर्ज कराने से बच रहे हैं। अगर रिपोर्ट दर्ज हुई तो पुलिस पूरे मामले की विवेचना करेगी, जिसमें प्राइवेट बाबू को भी शामिल किया जाएगा। प्राइवेट बाबू को किस नियम के तहत रखा गया है, विवेचना में यह भी शामिल किया जाएगा। जिसमें रजिस्ट्री ऑफिस के अधिकारियों की गर्दन भी फंस सकती है। प्राइवेट बाबू का वेतन कहां से निकल रहा था, इन सभी सवालों से बचने के लिए भी तहरीर नहीं दी जा रही है और मामले को झूठा साबित करने में सब जुट गए हैं। लोगों से रजिस्ट्री के दौरान रुपए वसूलने के लिए भी निजी कर्मचारी लगाए गए हैं। जमीन की रजिस्ट्री के दौरान दो प्रतिशत शुल्क वसूला जाता है, जबकि एक प्रतिशत सरकारी शुल्क है, बाकी एक प्रतिशत शुल्क की कार्यालय के स्टाफ में प्रतिदिन बंदरबांट होती है। रजिस्ट्री ऑफिस से वैâश की पेटी चोरी होने के मामले में इस बात का भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि बॉक्स में स्टांप शुल्क से ज्यादा नकदी हो सकती है, क्योंकि स्टाफ रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों से नियम विरुद्ध दो प्रतिशत शुल्क वसूलता है। ऐसे में अगर पुलिस चोरों को पकड़कर बॉक्स बरामद कर लेती है तो उसमें शुल्क से ज्यादा नकदी मिलने पर भी कार्यालय में चल रहे वसूली का खेल भी खुल सकता है। यही वजह है कि मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जा रही है। कहा तो यह तक जा रहा है कि घटना पर पर्दा डालने के लिए कर्मचारियों ने अपने पास से स्टांप शुल्क कोषागार में जमा कर दिया है। उप निबंधक कार्यालय में लूट या चोरी इसका खुलासा होना बाकी है। बुधवार को उप निबंधक करुणेश वर्मा भी मीडिया के सवालों से बचते रहे। कई बार उनसे घटना को लेकर बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने किसी से बात नहीं की। अफसरों का घटना को सिरे से नकारना और एफआईआर दर्ज न कराना भी कार्यालय में चल रहे किसी बड़े खेल को दबाने की ओर इशारा कर रहे हैं, जबकि सीसीटीवी फुटेज में चोर वैâश बॉक्स लेकर जाते साफ दिखाई दे रहा है। उपनिबंधक करुणेश वर्मा का साफ-साफ कहना है कि हमारे यहां किसी तरह की कोई लूट नहीं हुई है।

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