मुख्यपृष्ठअपराधगड़े मुर्दे : योगी जी की हत्यारी पुलिस!

गड़े मुर्दे : योगी जी की हत्यारी पुलिस!

जय सिंह

उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी खत्म करने के लिए पुलिस विभाग को काफी छूट दी गई है। इस छूट की आड़ में पुलिस विभाग वाले निर्दोष और निरीह लोगों पर अत्याचार कर रहे हैं। यहां यह कहना गलत न होगा कि योगी जी की पुलिस अब हत्यारी भी हो गई है। पिछले एक साल यानी २०२१ से २२ में ५०१ लोगों की हत्या पुलिस कस्टडी में कर चुकी है और यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब योगी जी की पुलिस को हत्यारी पुलिस कहना गलत नहीं होगा। हाल ही में हुई ऐसी कई मौतों ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर सवालिया निशान लगा दिया है। दौड़ाकर पीटना, थाने के अंदर टॉर्चर करना। मारते-मारते मार देना। इसके बाद पीड़ित को न्याय न मिलने की फेहरिस्त बहुत लंबी है। कानपुर में आजादी के ठीक एक दिन बाद एक व्यक्ति को थाने के अंदर इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई। इसी कानपुर में ८ महीने पहले एक व्यापारी को पुलिस ने इतना पीटा था कि उसका पूरा शरीर नीला पड़ गया। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर चोट के २५ निशान तक ही गिन पाए थे। बदायूं में तो पुलिस ने एक लड़के को पहले करंट लगाया। इसके बाद प्राइवेट पार्ट में डंडा डाल दिया। दिनेश सिंह भदौरिया बिधनू के सीढ़ी लालूपुरवा के थे। दिनेश का बिहार क्षेत्र में २०० गज का एक प्लॉट था। उस प्लॉट को लेकर उनका प्रीति नाम की एक महिला से विवाद चल रहा था। १६ अगस्त को दिनेश उस प्लॉट पर निर्माण कार्य करवा रहे थे, तभी प्रीति ५-६ लोगों के साथ पहुंची और काम को रोकने लगी। दिनेश नहीं माने। प्रीति के साथ गए लोगों की दिनेश से मारपीट हो गई। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को बुला लिया। गल्ला मंडी के थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह भी पहुंच गए। आरोप है कि दिनेश को पहले वहां पीटा गया। इसके बाद उन्हें चौकी लाया गया और कमरे में बंद करके प्रीति के लोग व दारोगा ने लाठियों से बहुत पीटा। दिनेश हाथ-पैर जोड़ते रहे, लेकिन दारोगा ने मारना बंद नहीं किया। वो बेहोश हो गए। कुछ देर होश नहीं आया तो पुलिस के सिपाही उन्हें हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच किया तो पता चला कि दिनेश की मौत हो चुकी है। दिनेश के पिता लाखन सिंह की शिकायत पर दरोगा अशोक सिंह, प्रीति, प्रीति के पिता जगदेव वर्मा, भाई विनोद वर्मा सहित कुल ८ लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। बदायूं के ककराला पुलिस चौकी इलाके में रहने वाले २० साल के रेहान को पुलिस ने २ मई को उठा लिया और चौकी में बंद कर दिया। उस पर बाइक चोरी का आरोप था। आरोप है कि पुलिस ने चौकी के अंदर पहले करंट लगाया और फिर प्राइवेट पार्ट में डंडा डाल दिया। बाद में पता चला कि चोरी के आरोप में गलत व्यक्ति को उठा लिया। रेहान को १०० रुपए देकर छोड़ दिया गया। रेहान घर आया तो उसकी हालत खराब होने लगी। उसके परिवार वाले बदायूं के एसएसपी ओपी सिंह से मिले। उन्होंने दातागंज सीओ प्रेम कुमार थापा को जांच सौंपी। आरोप सही मिले। चौकी इंचार्ज के साथ ४ और सिपाहियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। डॉक्टर कहते हैं कि रेहान के साथ पुलिस ने इस कदर बर्बरता की थी कि उसके नर्वस सिस्टम पर गंभीर असर पड़ा। ५ अक्टूबर २०१९ को झांसी में पुलिस ने पुष्पेंद्र यादव का एनकाउंटर कर दिया। पुष्पेंद्र पर आरोप था कि वह कानपुर-झांसी हाईवे पर मोंठ थाने के इंचार्ज धर्मेंद्र सिंह चौहान पर फायरिंग की और उनकी कार लूट ली। इस मामले की जांच सीबी-सीआईडी कर रही है। पुष्पेंद्र के भाई रवींद्र सीआईएसएफ में हैं। पुष्पेंद्र और पुलिसवालों में विवाद था। उन्होंने पुष्पेंद्र की ट्रक को ओवर लोड बताकर पकड़ा था। छोड़ने के लिए १ लाख रुपए दिए। पैसे लेने के बाद भी चौहान ने नहीं छोड़ा और चालान कर दिया। एनकाउंटर से ३ महीने पहले ही पुष्पेंद्र की शादी जालौन की शिवांगी से हुई थी। शिवांगी ने अपने पति के लिए लड़ाई लड़ी। शिवांगी न्याय के इंतजार में टूट गई और अंत में फांसी लगा ली।

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