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२०२५ तक टीबी मुक्त हिंदुस्थान पर लग सकता है ग्रहण … बढ़ रहा है टीबी का टेंशन!

महाराष्ट्र में हर घंटे मिल रहे हैं २५ नए मामले
५,५१,३७२ केसों के साथ शीर्ष पर है उत्तर प्रदेश
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में हर घंटे करीब २५ लोगों में टीबी की पुष्टि हो रही है। इस साल जनवरी से लेकर १९ दिसंबर तक प्रदेश में २.१० लाख टीबी के नए मामले दर्ज किए गए। लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या के मामले में महाराष्ट्र देश में दूसरे, जबकि ५,५१,३७२ मामलों के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर है। बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय २०२५ तक टीबी को खत्म करना चाहता है, लेकिन जिस तेजी से टीबी के मामले सामने आ रहे हैं उसे देखते हुए उस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा के टीबी मुक्त अभियान पर ग्रहण लग सकता है।
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में हर साल औसतन दो लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से अधिकांश मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर जैसे मेट्रो शहरों से होते हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टीबी के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। इसके लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ ही परीक्षण में भी तेजी लाई गई है। आदिवासी क्षेत्रों में उन्नत टीबी परीक्षण सुविधा स्थापित की गई है। अधिकारी छिपे हुए मामलों की पहचान करने और बीमारी का शीघ्र पता लगाने के लिए टीबी परीक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विभाग ने संदिग्ध टीबी रोगियों के बारे में सूचित करने के लिए निजी डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं और नागरिकों को भी शामिल किया है।
संभव नहीं २०२५ तक
टीबी मुक्त राज्य या देश का लक्ष्य
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक और टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के पूर्व प्रमुख डॉ. संजीव कांबले ने कहा कि २०२५ तक टीबी मुक्त राज्य या देश का लक्ष्य संभव नहीं लगता है। सरकार को पहले अल्पकालिक और फिर दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बीच में एमडीआर की दवा नहीं मिल रही थी। अगर आप अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं तो परीक्षण, दवाएं, फॉलोअप और परामर्श बहुत महत्वपूर्ण हैं।
मुंबई में मिले हैं ५०,००० मरीज
सूत्रों के मुताबिक, पूरे मुंबई में मनपा, राज्य और निजी अस्पतालों में औसतन ५०,००० से अधिक टीबी रोगी दर्ज किए जाते हैं। इसके अलावा एमडीआर टीबी दवा की भी भारी कमी है। आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए मुंबई २०२५ तक टीबी मुक्त नहीं हो सकता है। चिकित्सकों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में किए गए प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
डॉक्टरों की चेतावनी, संक्रामक है टीबी
मेट्रो शहरों में भीड़भाड़ सबसे बड़ी समस्या है, क्योंकि छोटे घरों में छह से सात लोग रहते हैं। अगर किसी एक व्यक्ति को टीबी का संक्रमण हो जाए तो इसके पैâलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कुपोषित लोगों में टीबी होने का खतरा अधिक होता है, वहीं अधिकारी मामलों की अधिक संख्या के लिए कई कारकों को जिम्मेदार मानते हैं, जिनमें टीबी दवाओं की अनुपलब्धता, देर से बीमारी का पता चलना, कुपोषण, नशीली दवाओं की लत आदि शामिल हैं।

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