मुख्यपृष्ठनए समाचारथम सकता है मरीजों का इलाज!आरएमपी के लिए जारी किए गए नए...

थम सकता है मरीजों का इलाज!आरएमपी के लिए जारी किए गए नए नियम

डॉक्टरों से हिंसा पर कसेगी नकेल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
धरती पर डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, गंभीर बीमारी से ग्रस्त अपने किसी परिजन के जीवनदान की उम्मीद लोग डॉकट्रों से ही लगाते हैं लेकिन इसके बावजूद अलग-अलग हिस्सों से डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा की खबरें लगातार आती रहती हैं। लेकिन अब इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए डॉक्टरों के संघ ने पुख्ता तैयारी कर ली है। संघ ने इस संबंध में बड़ा फैसला लिया है। ‘नेशनल मेडिकल कमीशन रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर’ ने ऐलान किया है कि डॉक्टर अब ‘अपमानजनक, अनियंत्रित और हिंसक व्यवहार करनेवाले मरीजों और हिंसकर व्यवहार करनेवाले तीमारदारों या रिश्तेदारों’ के मरीजों का इलाज करने से इनकार कर सकते हैं।
डॉक्टरों पर हो रहीं हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन ने नोटिफिकेशन जारी किया है। रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर्स (आरएमपी) उन मरीजों का इलाज करने से इनकार कर सकते हैं, जो मरीज या उनके तीमारदार, रिश्तेदार डॉक्टरों के साथ गाली-गलौज, मारपीट व हिंसा करने पर उतारू हो जाते हैं। आरएमपी की ओर से जारी नॉटिफिकेशन में कहा गया है कि रोगी की देखभाल करने वाला आरएमपी अपने कार्यों के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होगा और उचित शुल्क का हकदार होगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि, अपमानजनक, अनियंत्रित और हिंसक रोगियों या रिश्तेदारों के मामले में आरएमपी उनके व्यवहार का दस्तावेजीकरण और रिपोर्ट कर सकता है और रोगी का इलाज करने से इनकार कर सकता है। ऐसे मरीजों को आगे के इलाज के लिए कहीं और रेफर किया जाएगा। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इमरजेंसी केस को छोड़कर डॉक्टर ये तय करने के लिए स्वतंत्र है कि वह किस मरीज का इलाज करें। लेकिन डॉक्टर को यह जरूर देखना होगा कि ऐसा करने से कहीं उस मरीज की जान का जोखिम तो नहीं बढ़ जाएगा। ये नए नियम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के मेडिकल एथिक्स कोड २००२ की जगह लेंगे। यह पहली बार है कि डॉक्टरों को अनियंत्रित और हिंसक मरीजों का इलाज करने से इनकार करने का अधिकार होगा। इस कदम का उद्देश्य डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को हतोत्साहित करना है। नए नियमों के मुताबिक, सर्जरी या उपचार की लागत के बारे में पूरी जानकारी मरीज को देनी जरूरी है। यहां तक कि मरीज की जांच करने या इलाज शुरू करने से पहले उसे परामर्श शुल्क के बारे में बताना होगा। इसके बाद भी अगर कोई मरीज शुल्क नहीं देता है तो डॉक्टर के पास यह अधिकार है कि वह उपचार के लिए इनकार कर सकता है।

अन्य समाचार