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दिल पर कंट्रोल रखेगा ‘कैप्सूल’! …कैथेटर से दिल तक पहुंचाना हुआ आसान

• कार्डियक वायर की नहीं पड़ेगी जरूरत
सामना संवाददाता / मुंबई
दिल पर कंट्रोल रखने के लिए कैप्सूल के आकार के नए पेसमेकर का ईजाद किया गया है। इस उपकरण को कार्डिएक वायर (लीड) की आवश्यकता नहीं है। इतना ही नहीं, पेसिंग थेरेपी देने के लिए त्वचा के नीचे सर्जिकल जेब की भी आवश्यकता नहीं है। यह उपकरण इतना छोटा है कि इसे वैâथेटर (एक स्ट्रॉ जैसी संरचना) के माध्यम से सीधे हृदय में ट्रांसप्लांट किया जाता है। चिकित्सकों की मानें तो पारंपरिक पेसमेकर के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है। मतलब साफ है कि दिल पर एक ‘कैप्सूल’ कंट्रोल रखेगा।

ज्ञात हो कि कई दशकों से पेसिंग तकनीक लीड (तारों) से जुड़े जनरेटर से बनी है, जो आमतौर पर दिल के अंदर रखी या लगाई जाती है। इन पारंपरिक पेसमेकरों को आपकी त्वचा के नीचे ऊपरी सीने में लगाया जाता है। पेसमेकर एक टी बैग के आकार का कंप्यूटर चिपवाला छोटा उपकरण होता है, जिसमें बैटरी के रूप में एक अंतर्निहित शक्ति स्रोत होता है। यह सिक्के के आकार के बराबर होता है। बैटरी से चलनेवाला यह उपकरण १ या २ तारों के माध्यम से विद्युत ऊर्जा भेजता है, जिसे लीड कहा जाता है। इसे हृदय के दाएं ऊपरी या दाएं निचले (वेंट्रिकल) कक्षों के अंदर रखा जाता है। परंपरागत रूप से यह हृदय में विद्युत गतिविधि की निगरानी करता है और इन्वर्टर के रूप में काम करता है।

नए पेसमेकर में कम हैं जटिलताएं
चिकित्सकों का कहना है कि पारंपरिक पेसमेकर के साथ जटिलताएं बहुत कम होती हैं। लेकिन जब जटिलताएं होती हैं, तो उनका इलाज करना महंगा होता है। विश्व में प्रमुख जटिलताओं में लीडलेस पेसमेकर के उपयोग ने पारंपरिक पेसमेकरों की तुलना में ६३ प्रतिशत की कमी दिखाई है।

३० मिनट में होता है फिट
सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि ८४ वर्षीय एक पुरुष को बार-बार क्षणिक चक्कर आने की समस्या थी, जिसके बाद उनका ईसीजी किया गया तो उसमें दिल में ट्राइफैस्क्युलर ब्लॉक दिखाई दिया। ईसीजी मॉनिटर ने दिल की धड़कन के बीच लंबे अंतराल को दिखाया। यह उसके जीवन के लिए खतरा हो सकता था। ऐसे में पेसमेकर के विकल्प पर चर्चा की गई। साथ ही रोगी के परिवार ने लीड रहित वैâप्सूल पेसमेकर का विकल्प चुना। यह प्रक्रिया ३० मिनट में की गई। मरीज को उसी दिन मरीज को छुट्टी दे दी गई।

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