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तिरंगा साथ ले चलो

तुम बढ़ चलो, सम्भल चलो
तिरंगा साथ ले चलो,
बिगुल बज रहा है,
ये देश कह रहा है
उठो तुम जवानों
इसे तुम पहचानो
कुछ मां की आशाएं
ये देश के हैं साएं
भर लो जोश बाजुओं में
तुम हाथ से हाथ
ले चलो…
तुम बढ़ चलो, सम्भल चलो
तिरंगा साथ ले चलो
न कोई है हिंदू यहां
न कोई हैं मुस्लमां
रगों में दौड़ते हैं,
गुल बनके हिंदोसितां
बारूद बनके तुम
निकल पड़ो,
जय हिंद तुम
कह चलो
तुम बढ़ चलो, सम्भल चलो
तिरंगा साथ ले चलो
तुम भारत के मशाल हो
उन माताओं के लाल हो
जिसने तुम्हें जनम दिया
तुम उसी के ही खयाल हो
सोचो नहीं तुम बढ़ चलो
कदम-कदम, कदम चलो
शेर की तुम भांति हो..
तुम शेर से भी ना डरो,
तुम बढ़ चलो, सम्भल चलो
तिरंगा साथ ले चलो
ये चमन है अपना ही,
ये अमन के जो हैं रास्ते
दीए नहीं तुम सूरज बनो
इस वतन के ही वास्ते
ये उठ रही लहर जो
इस जोश-ए-वतन में
कुछ कह रही सांसें मेरी
तुम बढ़ चलो जतन से
तुम जय हिंद, जय-जय कह चलो
तुम बढ़ चलो, सम्भल चलो
तिरंगा साथ ले चलो
आसमां के ललाट पर
तुम बांध दो तिरंगा ये
मुस्कुराओ तुम बार-बार
जो तिरंगा का है प्यार ये
लिख चलो ऐतिहास तुम
दिला दो विश्वास तुम
तुम ले चलो दिलो में आग
तुम गाते चलो जय हिंद राग
जयघोष करके तुम…
आगे यूं ही तुम बढ़े चलो
तुम बढ़ चलो, सम्भल चलो
तिरंगा साथ ले चलो
– मनोज कुमार
गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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