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पित्ताशय में पथरी के बढ़ रहे मामले : युवा असमय हो रहे शिकार! …हर महीने मिल रहे दर्जनों मरीज चिकित्सकों ने जताई चिंता

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई में बीते कुछ सालों से पित्ताशय में पथरी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पहले यह समस्या बहुत कम और एक उम्र के बाद दिखाई देती थी, लेकिन अब युवा भी इसका शिकार बन रहे हैं। आलम यह है कि मुंबई में हर महीने औसतन नौ मरीज एसीडिटी की शिकायत के साथ अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। जिस तरह से युवाओं में पित्ताशय में पथरी के मामले बढ़ने लगे हैं, उसे देख चिकित्सकों ने चिंता जताई है।
उल्लेखनीय है कि पित्ताशय में पथरी बनने का मुख्य कारण बदलती जीवनशैली है। इसमें मितली, उल्टी, बुखार, अपच, डकार, सूजन और पीलिया जैसे लक्षण नजर आते हैं, जो एसिड रिफ्लक्स में भी होते हैं। इसके अलावा पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द महसूस होता है। बहुत से लोग सीने में जलन समझकर इलाज में देरी कर देते हैं। मोटापा, तेजी से वजन कम होना और गतिहीन जीवनशैली पित्त पथरी के बनने के पीछे महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
अक्सर सर्जरी की होती है आवश्यकता
जायनोवा शाल्बी अस्पताल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हेमंत पटेल ने बताया कि मुंबई में हर महीने ८ से ९ मरीज खट्टी डकार वाले लक्षणों के साथ इलाज कराने के लिए आते हैं। इनमें पेट दर्द, कंधे का दर्द, पीठ दर्द, दाहिने कंधे का दर्द, मितली और उल्टी की भी शिकायत देखी जा रही है। हालांकि, दवाएं स्थिति को प्रबंधित करने में मदद करती हैं। लेकिन अक्सर पित्ताशय की पथरी के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
इसलिए विकसित होती हैं समस्याएं
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के जनरल सर्जन डॉ. लकिन वीरा ने कहा कि एसिडिटी और पित्ताशय की पथरी दो अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याएं हैं। पुरानी एसिडिटी की समस्या वाले लोगों में पाचन तंत्र की सूजन और सूजन के कारण पित्ताशय में पथरी विकसित होने की अधिक संभावना होती है। दवाएं और सर्जरी पित्ताशय की पथरी को प्रबंधित करने में मदद कर सकती हैं, जबकि अम्लता की समस्याओं को धीरे-धीरे भोजन चबाने, अम्लीय खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों से परहेज करने, भोजन के समय का पालन करने, धूम्रपान, शराब का सेवन कम करने और खाने के तुरंत बाद न सोने जैसे सुझावों का पालन करके नियंत्रित किया जा सकता है।

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