मुख्यपृष्ठनए समाचार३२ साल बाद डाला वोट!

३२ साल बाद डाला वोट!

 जम्मू-कश्मीर में बढ़ा वोटिंग आंकड़ा
 अनुच्छेद ३७० खत्म होने के बाद पहली बार हुआ मतदान

सामना संवाददाता / अनंतनाग

लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। कल शनिवार को छठे फेज में जम्मू-कश्मीर की एक सीट पर वोटिंग हुई। अनुच्छेद ३७० खत्म होने के बाद पहली बार राज्य में मतदान हुआ। इसी बीच कश्मीरी हिंदू भी वोट डालने के लिए प्रदेश में पहुंचे। एक कश्मीरी हिंदू ने कहा कि १० सालों में हालात में काफी बदलाव आया है।

अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट पर वोट डालने के बाद एक कश्मीरी हिंदू वीर सराफ ने कहा कि मैंने ३२ साल बाद कश्मीर में अपना वोट डाला है। मैं अल्पसंख्यक समुदाय से आता हूं और आमतौर पर मैं यहां ज्यादा नहीं आता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले १० सालों में कश्मीर के हालात पहले से और भी बेहतर हुए हैं। इसी वजह से हमें कश्मीर में आकर वोट डालने का मौका मिला है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि कुछ दोस्त मेरे साथ वोट डालने के लिए आए हैं।

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट पर १८.३६ लाख वोटर्स अपने मताधिकार का इस्तेमाल किए। साल २०२२ में जम्मू-कश्मीर में किए गए परिसीमन में पुलवामा जिले और शोपियां विधानसभा क्षेत्र को दक्षिण कश्मीर लोकसभा सीट से हटा दिया गया, जबकि राजौरी और पुंछ के सात विधानसभा क्षेत्रों को इस लोकसभा क्षेत्र के साथ जोड़ दिया गया था।
वहा अब बात करें पुराने अनंतनाग लोकसभा क्षेत्र की तो साल २०१९ में लगभग ९ फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं, २०१४ के लोकसभा इलेक्शन में करीब २९ प्रतिशत मतदान हुआ था। इस लोकसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन क्षेत्र में पुंछ और राजौरी क्षेत्रों को शामिल करने के साथ मतदान का प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में बहुत ज्यादा हुआ है।

घाटी में उत्साहजनक रुझान

इस बार सबसे उत्साहजनक रुझान जम्मू-कश्मीर में देखने को मिले हैं, जहां पर एक बार फिर मतदान में भारी उछाल देखने को मिला है। इस बार यहां पर ५९.१ज्ञ् वोटिंग हुई है। ये अपने आप में काफी निर्णायक है, क्योंकि पिछली बार बारामूला में ३४.३ज्ञ् मतदान हुआ था। जानकार मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जो इस बार ज्यादा वोटिंग हुई है, उसका असर भी फाइनल आंकड़ों पर पड़ेगा।

 

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