" /> शिलालेख

शिलालेख – जगत पदार्थ नहीं, विचार है!

मनोनुकूल वक्तव्य प्रिय लगते हैं। प्रिय लगने का कारण मनोनुकूलता है। हम सब वरिष्ठों के भाषण या वक्तव्य सुनते हैं।

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हिंदुस्थान के मन की सुंदर गतिविधि है अध्यात्म!

हिंदुस्थानी अध्यात्म आंतरिक आनंद है। आध्यात्मिक प्रभाव के कारण लोग गाते-बजाते नृत्य भी करते हैं। हिंदुस्थान के गांव-गांव में नृत्य

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शुद्ध स्वीकार्य नहीं अशुद्ध प्रिय है!

आहार का अर्थ सामान्यत: भोजन होता है लेकिन इन्द्रियद्वारों से हमारे भीतर जाने वाले सभी प्रवाह आहार हैं। आहार व्यापक

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मानुष गंध के संचरण का उपकरण हैं ‘वायु देव!’

कोरोना पीड़ित विश्व का ध्यान ऑक्सीजन पर है। यह महामारी फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर विपरीत प्रभाव डालती है। स्वाभाविक

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असाधारण होते हैं आनंदित मनुष्य!

व्यक्ति असाधारण संरचना है। शरीर प्रत्यक्ष है। अंत:करण अप्रत्यक्ष है। हमारे कर्म तप भौतिक हैं। इनके प्रेरक तत्व हमारे भीतर

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