" /> शिलालेख

मानुष गंध के संचरण का उपकरण हैं ‘वायु देव!’

कोरोना पीड़ित विश्व का ध्यान ऑक्सीजन पर है। यह महामारी फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर विपरीत प्रभाव डालती है। स्वाभाविक

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असाधारण होते हैं आनंदित मनुष्य!

व्यक्ति असाधारण संरचना है। शरीर प्रत्यक्ष है। अंत:करण अप्रत्यक्ष है। हमारे कर्म तप भौतिक हैं। इनके प्रेरक तत्व हमारे भीतर

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रंग-तरंग में प्रकृति के गाल लाल!

उत्सव प्रिय है हिंदुस्थान का मन। उत्सव उत्स की अभिव्यक्ति है। उत्स का अर्थ है-मूल। मौलिक। हमारा अंत:करण। अंत:करण का

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आस्था अंध विश्वास नहीं होती!

हिंदुस्थानी परंपरा को अंधविश्वासी कहनेवाले लज्जित हैं। कथित प्रगतिशील श्रीराम व श्रीकृष्ण को काव्य कल्पना बताते थे। वे हिंदुत्व को

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प्रार्थना की शक्ति अनूठी है

सभी सभ्यताओं में प्रार्थना है। मैं विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूं। ईश्वर को जाना नहीं लेकिन प्रार्थना करता हूं। भारत

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