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आरोप साबित नहीं कर पाई सीबीआई : निठारी कांड में फांसी रद्द … सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर बरी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश और दुनिया को हिलाकर रख देने वाले नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपियों के खिलाफ सीबीआई आरोप साबित नहीं कर पाई, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों आरोपियों सुरेंद्र कोली ओर मोनिंदर सिंह पंढेर को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कोली को १२ और पंढेर को दो मामलों बरी करते हुए इन मामलों में उन्हें सुनाई गई फांसी की सजा भी रद्द कर दी। गौरतलब है कि गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने लड़कियों के साथ रेप और हत्या के मामले में दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद कोली और पंढेर ने इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
सीबीआई कर रही थी जांच
करीब १७ साल पहले रोंगटे खड़े कर देने वाले इस केस में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस एसए हुसैन रिजवी की बेंच ने पैâसला सुनाया। बता दें कि सीबीआई ने कुल १६ मामले दर्ज किए थे और उनमें से सभी में कोली पर हत्या, अपहरण और बलात्कार के अलावा सबूत नष्ट करने और एक मामले में पंढेर पर अनैतिक तस्करी का आरोप लगाया था।
क्या था मामला?
२००५ से २००६ के बीच हुए निठारी कांड तब सामने आया जब दिसंबर २००६ में नोएडा के सेक्टर ३० स्थित ग्राम निठारी में कोठी नंबर डी ५ के पास नाले में कुछ कंकाल पाए गए। बाद में, यह पाया गया कि मोनिंदर पांढेर घर का मालिक था और कोली उसका घरेलू नौकर था। दोनों को २९ दिसंबर २००६ को गिरफ्तार किया गया था। पंढेर और उसके नौकर कोली पर महिलाओं और मासूम बच्चियों के साथ रेप के बाद उनकी हत्या कर शव के टुकड़े-टुकड़े करके नाले में फेंक देने के आरोप लगे थे। बताया गया था कि कई को कोठी में ही दफन कर दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले की जांच की थी।

वकील ने जांच प्रक्रिया पर उठाया सवाल
दोनों आरोपियों ने अपने बचाव में कहा था कि इन घटनाओं का कोई चश्मद्दीद गवाह नहीं है। सिर्फ वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। दोनों की याचिकाओं पर लंबी सुनवाई चली। वरिष्ठ अधिवक्ता मनीषा भंडारी ने कहा कि अब इनके खिलाफ कोई सजा लंबित नहीं है। उम्मीद है कि जल्द से जल्द वे बाहर आ जाएंगे। अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में पूरी जांच प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

कोठी पर फेंका पत्थर
कोर्ट के फैसले से आहत हर्ष के पिता रामकिशन ने निठारी गांव पहुंचकर डी-५ कोठी पर पत्थर फेंका। जानकारी के अनुसार, हर्ष जब ३ साल का था तब उसका अपहरण हुआ था और निठारी कांड के खुलासे में पता चला कि उसकी मौत हो गई है। वहीं, एक पीड़ित महिला ने हाई कोर्ट के पैâसले पर नाराजगी जताई और कहा कि इन दोनों आरोपियों को वैसी ही सजा मिले जैसे हमारी बच्चियों के साथ इन्होंने किया।

 

 

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