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दिल्ली तक पहुंची आंच सीबीआई करेगी जांच! …रु. १०९ करोड़ के गबन का ‘दोपहर का सामना’ ने किया था खुलासा

सामना संवाददाता / कोलकाता । एशिया के सबसे विशाल म्यूजियम से जुड़े करीब १०९ करोड़ रुपए के घोटाले की जांच करने में सीबीआई को कोई आपत्ति नहीं है। इस म्यूजियम के रखरखाव और नियमों को ताक पर रखकर कई घोटाले हुए हैं, जिसका खुलासा ‘दोपहर का सामना’ ने २४ मार्च २०२१ को ‘इंडियन म्यूजियम में १०९ करोड़ का घोटाला’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद जब ये मामला कोलकाता हाईकोर्ट में गया था तब पहली सुनवाई में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने सीबीआई से पूछा था कि क्या वह इस मामले की जांच करेगी? जिसका जवाब सीबीआई ने ५ अप्रैल २०२२ की सुनवाई में दिया और कहा कि उन्हें इस मामले की जांच करने में कोई आपत्ति नहीं है।
कैग की रिपोर्ट में खुलासा
२०२० के कैग की रिपोर्ट में भी इस घोटाले का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इंडियन म्यूजियम की मूर्तियां आस-पास में मौजूद होटल में रखी हुई पाई गई थीं लेकिन सारे खुलासे होने के बाद भी इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। इंडियन म्यूजियम के अस्थायी एजुकेशन ऑफिसर सायन भट्टाचार्य और वर्तमान अस्थायी डायरेक्टर ए.डी. चौधरी को पद से हटाकर जल्द से जल्द सीबीआई जांच करने की बात कही गई है।
पैसे खर्च, काम बाकी
ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि इंडियन म्यूजियम डिपार्टमेंट ने दो परियोजनाएं बनाई थीं, जिसमें एक है म्यूजियम का आधुनिकीकरण जो कि ९९.७६ करोड़ और दूसरी है मेट्रो संग्रहालय परियोजना, जिसकी लागत ९ करोड़ रुपए बताई गई है। यहां गौर करनेवाली बात यह है कि भारतीय संग्रहालय ने संस्कृति या बीओटी या विकास मंत्रालय की मंजूरी के बिना दोनों परियोजनाओं को एक ही परियोजना में शामिल किया था। सारे कार्य एनबीसीसी द्वारा उसी एमओयू के तहत किया गया था, जबकि नियम के मुताबिक ऐसा नहीं होना चाहिए। यह खुलासा केवल भुगतान जारी करने से स्पष्ट हुआ था, इसके अलावा दोनों परियोजनाओं के लिए जितने फंड आवंटित हुए थे, वे सारे खत्म हो गए लेकिन इन परियोजनाओं से जुड़े सारे काम बाकी हैं।

ये है मामला
इंडियन म्यूजियम में सैकड़ों साल पुरानी गौतम बुद्ध की मूल्यवान मूर्ति थी, जो कि लंबे समय से गायब है। यह म्यूजियम अपनी बनावट से विश्व में मशहूर है। म्यूजियम में रखी प्राचीन वस्तुएं, युद्ध सामग्री, आभूषण, कंकाल, ममी, जीवाश्म और मुगल पेंटिंग का शानदार कलेक्शन पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कोलकाता में बंगाल की एक एशियाटिक सोसायटी ने १८१४ में इसकी स्थापना की थी, लेकिन जादूघर कहे जानेवाले इस म्यूजियम से धीरे-धीरे संजोकर रखी गई ऐतिहासिक धरोहर जादू की तरह गायब हो रही हैं। इस म्यूजियम में मूर्तियों से लेकर मनुष्य तक के गायब होने का सिलसिला जारी है। इस म्यूजियम के पिजर्वेशन हेड सुनील उपाध्याय अब तक गायब हैं। इतना ही नहीं फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर यहां अपने करीबियों को नौकरी दिए जाने का खुलासा भी हुआ है। इंडियन म्यूजियम में प्रसांतो शाहा नामक व्यक्ति को ४४ साल की उम्र में स्थाई नौकरी दी गई, जो की नियम के खिलाफ है। आरटीआई से हुए खुलासे में यह जानकारी भी सामने आई थी कि एजुकेशन ऑफिसर (इंडियन म्यूजियम) सायन भट्टाचार्य को वोएसडी प्रोजेक्ट ऑफिसर नियुक्त कर रहा है, जबकि इसकी नियुक्ति डायरेक्टर या फिर चेयरमैन (राज्यपाल) को करना चाहिए। उपरोक्त सभी बातों का खुलासा करनेवाले भारतीय कामगार सेना बेस्ट बंगाल प्रेसिडेंट सुमन पाल को जान से मारने की धमकी भी दी गई, लेकिन धमकी देनेवालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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