मुख्यपृष्ठसमाचारनीति आयोग का सेंसरशिप! अखबारों में लेख छपने से पहले जांच अनिवार्य

नीति आयोग का सेंसरशिप! अखबारों में लेख छपने से पहले जांच अनिवार्य

सामना संवाददाता / मुंबई
नीति आयोग ने अब अपने अधिकारियों को लिखने पर सेंसरशिप लगा दी है! उसके अनुसार वर्तमान पत्र के संपादकीय पन्ने पर छपने वाले लेख से पहले आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी या संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से जांच करवाना आवश्यक है। इस संदर्भ में १२ मई को सरकार ने नीति आयोग के अधिकारियों को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में सरकार के टॉप के नीति निर्धारण कर्ताओं ने कहा है कि अखबार की संपादकीय अथवा मासिक पत्रिका या फिर न्यूज पोर्टल पर नाम के साथ छपने वाले लेख उनकी पहचान को उजागर करते हैं लेकिन इस प्रकार के बाहरी प्रकाशन में छपकर आने वाले लेखों की संबंधित सलाहकारों के माध्यम से कम से कम २ बार जांच करानी आवश्यक है, इसी तरह वरिष्ठ सलाहकार और अधिकारियों का लेख सीईओ के माध्यम से जांच करवाना आवश्यक है। सरकार ने पत्र में यह भी कहा है कि सभी ओ पी / ईडी एस / लेख केवल नीति आयोग के कम्युनिकेशन वर्टिकल द्वारा भेजा जाए। ओपी-ईडीएस लेख बाहरी प्रकाशन के लिए न्यूनतम गुणवत्ता के मानक को पूरा करता है या नहीं, इस पर कम्युनिकेशन वर्टिकल अंतिम निर्णय लेगा। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने यह आदेश लिखित न देकर मौखिक आदेश को पालन करने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक नीति आयोग की सोमवार को हुई बैठक में यह मौखिक आदेश दिया गया है, इस बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, सीईओ परमेश्वर अय्यर और अन्य सदस्य व अधिकारी उपस्थित थे।

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