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छात्रवृत्ति में केंद्र की कटौती! …छात्र संगठनों का आरोप, नई शिक्षा नीति शिक्षा तंत्र पर है हमला

`इंडिया’ को मिला छात्र संगठनों का साथ,
जंतर-मंतर पर हल्ला बोला

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने हाल ही में नई शिक्षा नीति लागू की। केंद्र नई शिक्षा नीति से देश के छात्र संगठनों में नाराजगी व्याप्त है। छात्रों का आरोप है कि भाजपा सरकार ने कई बार सार्वजनिक शिक्षा पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उनका लक्ष्य केवल सार्वजनिक शिक्षा को पूरी तरह से नष्ट करने के साथ-साथ एक ऐसी निजी शिक्षा की व्यवस्था स्थापित करना है, जो अधिकांश छात्रों को शिक्षा से वंचित कर देगी। एसएफआई ऐसी विचारधारा को शिक्षा-विरोधी और भारतीय शिक्षा के संवैधानिक दृष्टिकोण के खिलाफ मानती है।
छात्र संगठनों का कहना है कि मौलाना अबुल कलाम आजाद फेलोशिप एससी, एसटी, ओबीसी और सांप्रदायिक छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा १ से ८ तक ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी अन्य पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और डी-एन-टी को ४१ फीसदी कटौती की गई है। इन योजनाओं के लिए २८१ करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो २०२२ के बजट की तुलना में ४७८ करोड़ रुपए से कम है।
बता दें कि भाजपा सरकार से मुकाबला करने के लिए बने इंडिया गठबंधन से कई छात्र संगठनों ने भी हाथ मिलाते हुए केंद्र की नीतियों के खिलाफ हल्ला बोला है। कल इंडिया गठबंधन की १६ पार्टियों के छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और मार्च निकाला। विरोध प्रदर्शन में आइसा, एसएफआई, एआईएसएफ, पीएसयू, एनएसयूआई, डीएमके, डीएसफ, पीएसफ, आरएलडी, समाजवादी और ट्राइबल स्टूडेंट शामिल थे।
पाठ्य पुस्तकों में बदलाव
छात्रों का कहना है कि एनसीआरटी की दसवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से मौलिक विषय जैसे मात्रात्मक सारणी, डार्विन के प्रजनन का सिद्धांत, पाइथागोरस का सूत्र, ऊर्जा के स्रोत, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को हटा दिया गया है। हाल ही में एनसीआरटी की ओर से इतिहास और राजनीति की पाठ्यपुस्तकों को संशोधित किया गया है, ताकि गांधीजी द्वारा हिंदू राष्ट्रवाद अस्वीकार्यता के संदर्भों और आधुनिक भारत के बड़े हिस्सों में सैकड़ों वर्षों तक मुस्लिम शासन के अध्याय हटा दिए गए हैं।

ये है छात्रों की मांग
राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० को खारिज किया जाए।
भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम लागू हो और सभी के लिए शिक्षा और रोजगार हो।
फीस बढ़ोतरी को निरस्त की जाए और प्री नर्सरी से स्नातकोत्तर तक मुफ्त, गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित किया जाए।
शिक्षा के साम्प्रदायीकरण-व्यवसायीकरण- केंद्रीकरण का विरोध किया जाए।
शिक्षा में लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील वैज्ञानिक भावना को बचाने के लिए कदम उठाया जाए।
शिक्षा और रोजगार में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के अधिकारों एवं अवसरों को सुरक्षित और सुनिश्चित करें। निजी क्षेत्र में आरक्षण नीति को क्रियान्वित करें।
सभी शैक्षणिक संस्थानों को यौन उत्पीड़न और लिंग आधारित भेदभाव से मुक्त बनाएं। -सुप्रीम कोर्ट द्वारा संदेशित शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न के खिलाफ समितियां बनाएं।
सभी कैंपस में छात्र संघ चुनाव कराया जाए और शैक्षणिक समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।

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