मुख्यपृष्ठनए समाचारकेंद्र का ‘मिशन बंगाल’... दीदी के २५ नेता एजेंसियों के रडार पर

केंद्र का ‘मिशन बंगाल’… दीदी के २५ नेता एजेंसियों के रडार पर

सामना संवाददाता / कोलकाता
केंद्र  के साथ देश के सभी राज्यों पर एकछत्र शासन करने का भाजपाई मंसूबा अब किसी से छिपा नहीं है। केंद्र की भाजपाई सरकार अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए विरोधी दलों की सरकार वाले राज्यों में केंद्रीय  एजेंसियों के जरिए कुचक्र रचने पर पूरा जोर लगा रही है। महाराष्ट्र, प. बंगाल, झारखंड और दिल्ली सहित कई राज्यों में ऐसा देखने को मिला है। लेकिन अब २०२४ की तैयारियों में जुटी केंद्र सरकार के इशारे पर केंद्रीय  जांच एजेंसियों ने प. बंगाल पर विशेष तौर पर ध्यान केंद्रीय कर दिया है। दीदी यानी प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के करीब २५ विधायक एवं मंत्री एजेंसियों के रडार पर हैं। आशंका जताई जा रही है कि पार्थ चटर्जी के बाद अब १९ नेता जल्द ही बेहिसाबी संपत्ति के मामलों में फंस सकते हैं। इनमें दीदी की ‘टीएमसी’ सरकार के कई बड़े लीडर भी शामिल हो सकते हैं। इसमें कोलकाता हाईकोर्ट का नया आदेश टीएमसी के लिए चिंता का सबसे बड़ा सबब बन गया है।
बता दें कि २०१७ में कोलकाता के एक वकील बिप्लव रॉय चौधरी ने जनहित याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि २०११ से २०१६ के बीच टीएमसी के १९ विधायकों की प्रॉपर्टी बेहिसाब बढ़ी। इनमें ममता के खासमखास और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम का नाम भी है। चौधरी की याचिका का ५ साल से निपटारा नहीं हुआ। पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के पास से ५० करोड़ रुपए और ५ किलो सोना मिलने के बाद चौधरी फिर हाईकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने हाईकोर्ट में पार्थ से मिले कैश के विजुअल्स दिखाए और १९ विधायकों की प्रॉपर्टी की जल्द से जल्द जांच की मांग की। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर ईडी को जांच में शामिल करने को कहा है।

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