मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापरीक्षा की पवित्रता कायम रखने की चुनौती!

परीक्षा की पवित्रता कायम रखने की चुनौती!

राजेश माहेश्वरी।  देश में प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में पर्चा लीक की खबरें प्रकाश में आती रहती हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश का है। जनपद बलिया में १२वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का पर्चा लीक हुआ। मामले के तूल पकड़ने के बाद जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया और कुछ थानों में मुकदमा दर्ज कर सत्रह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। हैरानी की बात यह है कि प्रश्नपत्र की बात उजागर होने और उसके सुर्खियों में आ जाने के बाद कार्रवाई में जैसी तेजी देखी गई, उतनी ही सजगता परीक्षा के पहले नहीं थी। पिछले साल नंवबर में उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) का पर्चा लीक होने के बाद खूब हंगामा मचा था। पर्चा लीक होने के कारण परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया और नतीजा बोर्ड परीक्षा में पर्चा लीक होने के रूप में सामने है। सवाल है कि वैâसे पेपर लीक हो जाता है, जो कि शासन और जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी में रखा जाता है।
पिछले साल राजस्थान में रीट-२०२१ का पेपर लीक होने पर खूब बवाल मचा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में ४० से अधिक परीक्षा माफिया सक्रिय हैं। इनके गुर्गे डमी अभ्यर्थी ढूंढ़ते हैं। साथ ही सॉल्वर ढूंढ़ना, हाइटेक उपकरण खरीदी, सेंटर को पर्चा लीक करने के लिए तैयार करना भी इन्हीं के जिम्मा होता है। राजस्थान में पिछले ११ साल में ३८ से ज्यादा बड़ी परीक्षाओं के पर्चे लीक हो चुके। हाल में नीट व एसआई भर्ती के भी पेपर लीक होने की बात सामने आई है।
वर्ष २०१८ में सीबीएसई की दसवीं कक्षा के गणित और बारहवीं कक्षा के अर्थशास्त्र बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक हुआ था। बीती १७ फरवरी को बिहार बोर्ड मैट्रिक की परीक्षा के पहले ही दिन गणित का पर्चा लीक हुआ था। पिछले साल अगस्त में हरियाणा पुलिस कान्स्टेबल भर्ती का पेपर लीक हुआ था। इस मामले में इंडियन नेशनल लोकदल के नेता एवं सदन में पूर्व विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने प्रेस के सामने कहा था कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह २८वां मौका था जब भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ है। बीते दिनों ग्वालियर के एक छात्र ने मध्यप्रदेश टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उसने पेपर लीक का दावा करते हुए परीक्षा में फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया है। मामला उजागर होने के बाद शिवराज सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
वर्ष २०१७ में यूपी में दारोगा पद के लिए हो रही ऑनलाइन परीक्षा के लिए प्रदेश के २२ जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। २५ और २६ जुलाई को तकरीबन १ लाख २० हजार आवेदकों को परीक्षा देनी थी, लेकिन पेपर लीक होने की वजह से इसे निरस्त कर दिया गया था। २ फरवरी २०१८ में यूपीपीसीएल पेपर लीक का मामला सामने आने पर जूनियर इंजीनियर (जेई) परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। जुलाई २०१८ में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। २ सितंबर २०१८ को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत ही नलकूप ऑपरेटरों की भर्ती के लिए होनेवाला पेपर आउट हो गया था।
जमीनी सच्चाई यह है कि देश में नकल का कारोबार बहुत बड़े व्यवसाय के रूप में विकसित हो गया है। बड़े-बड़े कोचिंग सेंटर्स और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता भी कुछ मामलों में मिली है। फिर भी पकड़ में आने पर भी सख्त कार्रवाई नहीं होती। आईपीसी की धारा ४२०, ४६७, ४६८ के तहत ७ साल, सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत ३ साल तक सजा संभव है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में पिछले ११ साल में हर साल पेपर लीक के औसतन १५० केस दर्ज हुए हैं लेकिन सजा किसी को भी नहीं हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार आज के तकनीक के दौर में डिजिटल इंप्रâास्ट्रक्चर डेवलप करके पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है। इससे पेपर सेट होने और उसके परीक्षा केंद्र में वितरित होने के दौरान कम से कम व्यक्तियों का दखल होगा तो लीक होने की संभावना न के बराबर होगी। हालांकि इसके लिए डिजिटल इंप्रâास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है। पर्चा लीक होना दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, यह परीक्षार्थियों की उम्मीद पर पानी फेर देता है। पेपर लीक की घटनाएं आनेवाली पीढ़ी के भविष्य के लिए खतरनाक हैं। समय पर ऐसी घटनाओं को नहीं रोका गया तो यह सरकार के समक्ष चुनौती होगी।
(लेखक उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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