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राजस्थान में परिवर्तन असंभव! … भाजपा को यात्रा भी नहीं लगा पाएगी पार

रमेश सर्राफ धमोरा
राजस्थान भाजपा में आपसी गुटबाजी खुलकर उजागर हो रही है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित सभी बड़े नेता अपने को फ्रंट में लाने के प्रयास में लगे हुए हैं। वसुंधरा समर्थकों का मानना है कि उनको ताकत दिखाने का अब अंतिम अवसर है। यदि इस बार चूक गए तो फिर मुख्य धारा की राजनीति में पिछड़ जाएंगे। वसुंधरा समर्थक कई विधायकों को तो इस बात का डर भी सता रहा है कि यदि मैडम राजनीतिक रूप से कमजोर होती हैं तो उनका टिकट भी खतरे में पड़ सकता है। इसीलिए वसुंधरा के सभी समर्थक जोर दे रहे हैं कि मैडम पार्टी आलाकमान से दो टूक बात करें।
पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी राजस्थान में भाजपा की फूट को लेकर पूरी तरह सतर्क है। भाजपा आलाकमान जानता है कि राजस्थान में सभी नेताओं के अपने-अपने गुट बने हुए हैं, जिसके चलते सभी एक-दूसरे की टांग खींचाई करने में लगे हुए हैं। भाजपा ने अपने प्रादेशिक नेताओं की आपसी खींचतान के चलते ही प्रदेश के चार क्षेत्रों में निकाली जाने वाली परिवर्तन संकल्प यात्रा का नेतृत्व किसी भी बड़े नेता को नहीं सौंपा है। भाजपा चारों यात्राओं का नेतृत्व सामूहिक रूप से करने का निर्णय लिया है, ताकि यात्रा के बहाने कोई नेता खुद को बड़ा नहीं दिखा सके। यात्रा के संयोजन की जिम्मेदारी पार्टी ने दूसरी पंक्ति के नेताओं को दी है, ताकि बिना गुटबाजी के यात्राओं का समापन हो सके।
ऐसे में अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया सहित किसी भी अन्य नेता के बीच मुख्यमंत्री बनने की होड़ खत्म हो गई है। अब अगर पार्टी सत्ता में आती है तो शीर्ष नेतृत्व ही तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
भाजपा की ओर से निकाली जाने वाली परिवर्तन यात्रा को लेकर चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक नारायण पंचारिया ने बताया कि भाजपा प्रदेश में आगामी दो सितंबर से परिवर्तन यात्रा की शुरुआत करेगी। यह यात्रा चार अलग-अलग स्थानों और दिशाओं से प्रदेश भाजपा के सामूहिक नेतृत्व में ८,९८२ किलोमीटर का सफर तय कर प्रदेश की २०० विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी। परिवर्तन यात्रा के दौरान किसान चौैपाल, युवा मोटरसाईकिल रैली, महिलाओं की बैठक और दलित चौपालें भी आयोजित होंगी।
विधानसभा चुनाव से पहले निकाली जा रही भाजपा की चारों परिवर्तन यात्राओं को केंद्रीय स्तर के नेता रवाना करेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि प्रदेश स्तर की यात्राओं में भाजपा आलाकमान ने किसी भी स्थानीय नेता को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी। इसका मुख्य कारण पार्टी में व्याप्त गुटबाजी को माना जा रहा है। किसी एक नेता के चेहरे को आगे करने से पार्टी के अन्य नेता नाराज हो सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी आलाकमान ने उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी है। इससे राजे और उनके समर्थक नाराज बताए जा रहे हैं। इससे पहले हुए भाजपा के कई कार्यक्रम में राजे शामिल नहीं हुर्इं थीं। कुछ दिनो पूर्व गंगाापुरसिटी में अमित शाह के कार्यक्रम में भी वसुंधरा राजे शामिल नहीं हुर्इं, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उस कार्यक्रम में उपस्थित थे। ऐसे में अभी तक इस पर संशय बना हुआ है कि वसुंधरा राजे परिवर्तन संकल्प यात्रा में शामिल होंगी या नहीं। इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में साफ होगी।
भाजपा आलाकमान विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेहरा बना रहा है, मगर पार्टी के अंदरखाने मची जंग पर अभी तक नियंत्रण नहीं कर पाया है। वसुंधरा राजे दो बार मुख्यमंत्री रहने से उनका आज भी लोगों पर काफी प्रभाव है। ऐसे में यदि पार्टी आलाकमान चुनाव में उनकी उपेक्षा करेगा तो यह पार्टी के लिए घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस की फिर से सरकार बनाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं। कांग्रेस आलाकमान के प्रयासों से सचिन पायलट भी गहलोत के साथ जुट गए हैं। ऐसे में भाजपा अंदरूनी फूट पर कितना काबू कर पाती है, इसी पर भाजपा की अगली सरकार बनने का भविष्य टिका है।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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