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जानबूझकर मौत के मुंह में धकेले गए चीते! … सुप्रीम कोर्ट के हाथ लगी विदेशी विशेषज्ञों की खुफिया जानकारी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कूनो नेशनल पार्क में नामिबिया से लाए गए चीतों की मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब इस सिलसिले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि सरकारी लापरवाही के कारण जानबूझकर कूनो के चीतों को मौत के मुंह में धकेला गया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में विदेशी विशेषज्ञों की ‘खुफिया जानकारी’ साझा की गई है।
विदेशी विशेषज्ञों ने अपने लिखे पत्र में बताया है कि कूनो में चीतों की चिकित्सा में भारी लापरवाही बरती गई है। चीतों की चिकित्सा में जो पशुचिकित्सक लगाए गए, वे अनुभवहीन हैं। इन चीतों की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए दक्षिण अप्रâीकी विशेषज्ञों द्वारा कूनो में चीतों के प्रबंधन पर लिखे दो अलग-अलग पत्र सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हैं। ये पत्र दक्षिण अप्रâीका में प्रिटोरिया विश्वविद्यालय के पशु वन्यजीव विशेषज्ञ प्रोफेसर एड्रियन टॉर्डिफ और नामीबियाई चीता संरक्षण कोष के कार्यकारी निदेशक डॉ. लॉरी मार्क द्वारा भेजे गए थे। इनका कहना है कि चीता परियोजना की संचालन समिति विशेषज्ञों की राय की अनदेखी कर रही है। विदेशी विशेषज्ञ विंसेंट वैन डी मेरवे और डॉ. एंडी प्रâेजर ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति को पत्र लिखकर कहा है कि कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान प्रबंधन में वैज्ञानिक प्रशिक्षण का अभाव है।
अब तक ९ चीते तोड़ चुके हैं दम
गत कुछ महीनों में कूनो नेशनल पार्क में नामिबिया से लाए ९ चीते दम तोड़ चुके हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां केंद्र सरकार ने बेशर्मी से कह दिया कि चिंता की बात नहीं है। दो दिन पहले कूनो में एक मादा चीता की मौत हो गई। इसके पहले कूनो में एक मादा चीते ने चार शावकों को जन्म दिया था। इनमें से तीन शावकों की मौत हो चुकी है।

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