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बच्चों में कीमोथेरेपी हुई आसान : दर्द भरे इलाज से मुक्ति दिलाएगा प्रीवॉल मुंह से ली जा सकेगी दवा

सामना संवाददाता / मुंबई
वैंâसर का नाम सुनते ही मरीज के पैरों से जमीन खिसक जाती है। ऐसे में कोई बच्चा जब इस जानलेवा बीमारी का शिकार होता है, यह उनके लिए सबसे तकलीफदेह होता है। इन सबके बीच वैंâसर से पीड़ित बच्चों को दी जानेवाली दर्दनाक कीमोथेरेपी की प्रक्रिया अब आसान हो गई है। इस दर्दभरे इलाज से मुक्ति दिलाने का काम खोजे गए प्रीवॉल करने जा रहा है। इसे मुंह से पावडर के रूप में तैयार किया गया है, जिसे लिक्विड के तौर पर बच्चों को दिया जाएगा। देश में इसके इस्तेमाल को मंजूरी मिल गई है। इतना ही नहीं टाटा अस्पताल में इसे उपलब्ध भी करा दिया गया है, जबकि कुछ महीनों में देश के फॉर्मासिस्ट की दुकानों और बड़े अस्पतालों में मुहैया करा दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बच्चों को होनेवाले ब्लड वैंâसर को चाइल्डहुड ल्यूकेमिया कहा जाता है। चाइल्डहुड ल्यूकेमिया बच्चों और टीनएज में काफी आम है। इस कैंसर की वजह से सफेद ब्लड सेल्स अनियमित रूप से बढ़ने लगते हैं। चाइल्डहुड ल्यूकेमिया की स्थिति में अस्थिमज्जा में असामान्य रूप से सफेद रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं। फिलहाल इसके उपचार के दौरान अब तक बच्चों को कीमोथेरेपी जैसे जटिल उपचार पद्धति से होकर गुजरना पड़ता है। इस तकलीफ को कम करने के उद्देश्य से मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल और नई मुंबई के एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रेनिंग रिसर्च एंड एजुकेशन इन वैंâसर के डॉक्टरों ने बंगलुरू के आईडीआरएस लैब्स के साथ मिलकर इस दवा की खोज की, जिसमें आखिरकार सफलता अर्जित हुई है, जो मील का पत्थर साबित होगा। इसका नाम प्रीवॉल रखा गया है, जो १०० एमएल ओरल सस्पेंशन में उपलब्ध होगी।
दुनिया में उपलब्ध तरल फॉर्मूलेशन से है काफी अलग
टाटा मेमोरियल अस्पताल के बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. गिरीश चिन्नास्वामी ने कहा कि बच्चों के लिए प्रीवॉल फॉर्मूलेशन खुराक अनुकूलन सुनिश्चित करने आदि में मदद करेगा। टाटा सेंटर के क्लीनिक फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. विक्रम गोटा ने कहा कि प्रीवॉल भारतीय बायोफार्मा की अंतर्निहित ताकत और गहराई का प्रकटीकरण है, जो भारतीय परिस्थितियों के लिए सबसे उपयुक्त फॉर्मूलेशन की कल्पना करता है। यह दुनिया में अन्य जगहों पर उपलब्ध तरल फॉर्मूलेशन से काफी अलग है। मुंबई टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. सुदीप गुप्ता ने बेहतरीन सहयोगात्मक प्रयास की सराहना की और नवीन दवाओं और फॉर्मूलेशन तक पहुंच में सुधार के लिए शिक्षा और उद्योग के बीच इस तरह के और अधिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सीएआर-टी सेल थेरेपी का उदाहरण देते हुए कहा कि टाटा मेमोरियल सेंटर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसे हाल ही में इसी तरह के सहयोगात्मक प्रयास में टाटा मेमोरियल सेंटर ने भी आगे बढ़ाया था।

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