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मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उड़ाई भाजपाइयों की धज्जियां!…रावण की जान नाभि में, वैसे भाजपा की जान मुंबई में

•  सत्ता के लिए साजिश न रचें
•   शिखंडी की तरह केंद्रीय जांच एजेंसी की आड़ में न लड़ें

सामना संवाददाता / मुंबई । महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी के मंत्री नवाब मलिक के इस्तीफे की मांग को लेकर राज्य का विपक्ष पिछले कई दिनों से हंगामा कर रहा है। विधानसभा में ग्रीष्मकालीन अधिवेशन से पहले विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यपाल अपना अभिभाषण पूरा नहीं कर सके। विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान जिस तरह से हंगामा मचाया, राज्यपाल को बोलने नहीं दिया और वे अपना अभिभाषण बीच में ही छोड़कर चले गए। वे राष्ट्रगीत के लिए भी नहीं रुके। यह अशोभनीय कृत्य इतिहास में पहली बार हुआ है, ऐसा कहते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कल महाराष्ट्र के विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री ने महाविकास आघाड़ी सरकार की शिकायत करने के लिए बार-बार राज्यपाल के पास भागनेवाले विपक्षी नेताओं की चुटकी लेते हुए कहा कि राज्यपाल का पद संवैधानिक पद है और उसकी गरिमा विपक्ष के लोग अधिक जानते हैं। उस गरिमा को बनाए रखना चाहिए था। राज्यपाल के भाषण में राज्य सरकार के विकास कार्यों की सूची थी, जिसे आप लोग सुनना ही नहीं चाहते थे। इसलिए आपने दाऊद के बहाने हंगामा करके राज्यपाल को बोलने से रोक दिया।

विपक्ष को अच्छे काम नहीं दिखते हैं
हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे स्मृति महामार्ग के कार्य का जायजा इस दौरान मुख्यमंत्री ने लिया। कोस्टल रोड, पुणे स्थित रिंग रोड, शिक्षण योजना ऐसी कई योजनाएं अमल में लाई गईं, परंतु सुनना ही नहीं है, ऐसा तय कर लिया तो ये सब बातें विपक्ष को समझ में आएगी ही नहीं। परंतु जिनके लिए हम ये सब कर रहे हैं, वे इन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। हमें उस जनता का आशीर्वाद मिल रहा है, इससे मैं संतुष्ट हूं। सरकार प्रमुख के रूप में मेरे सहयोगी काम कर रहे हैं। खासकर मेरे ऑपरेशन के दौरान सभी ने सहयोग किया। सहयोगी मंत्रियों ने मेरी कमी का एहसास नहीं होने दिया, बेहतरीन काम किया, इन शब्दों में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों की प्रशंसा की। कई काम सरकार ने किए परंतु उसकी अनदेखी करने के नाकारापन के चलते नकारने का नाकारापन न करें। इन शब्दों में उन्होंने विरोधियों को खरी-खरी सुनाई।

मुख्यमंत्री ने नवाब मलिक के इस्तीफे की मांग करनेवाले भाजपाई नेताओं से सवाल पूछते हुए कहा कि अगर नवाब मलिक का दाऊद इब्राहिम से पुराना नाता था तो इतने साल से केंद्रीय एजेंसियां क्या कर रही थीं? कहा कि दाऊद कहां है? क्या किसी को पता है? जब चुनाव आता है तो आप दाऊद को खड़ा कर देते हो, जैसे इससे पहले आप लोग राम मंदिर के मामले में करते थे। आपने राम मंदिर के नाम पर पिछला चुनाव लड़ा था। अब क्या आप दाऊद के नाम पर वोट मांगने जा रहे हैं?
भाजपा द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों का किया जा रहा दुरुपयोग और विपक्ष की ओर से मनपा पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अच्छी तरह चीर-फाड़ की। रावण की नाभि में जैसे उसकी जान थी, उसी तरह केंद्र में सरकार होने के बावजूद उनकी जान मुंबई में फंसी है। इन शब्दों में उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधा। कोरोना काल में मुंबई ने जो किया वह मुंबई मॉडल पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हुआ, परंतु विपक्ष को द्वेष की ज्वॉइंडिस हो गया होगा तो वह वैâसे ठीक होगा, ऐसा तंज उन्होंने कसा। ईडी का घर के चौकीदार के रूप में उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता चाहिए होगी तो बेवजह पेन ड्राइव इकट्ठा न करें। पेन ड्राइव की आवश्यकता नहीं है। मैं आपके साथ चलता हूं। इतनी आपको पीड़ा हो रही होगी तो विवाद मुझसे है न, फिर मुझे जेल में डालो। परिजनों को बदनाम क्यों करते हो? मर्द होंगे तो मर्दों की तरह लड़ो, इन शब्दों में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विरोधियों को ललकारा।
अधिवेशन के अंतिम दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विरोधियों के पहले दिन से समापन तक का हिसाब चुकता किया। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के अभिभाषण से शुरू करते हुए उन्होंने कहा, राज्यपाल एक संवैधानिक पद है। इसका क्या महत्व होता है ये विपक्ष को पता है क्योंकि विपक्ष के नेता शिकायतें लेकर बार-बार पूरे अधिकार के साथ उनके पास जाते हैं। इसी के साथ उन्होंने दुख व्यक्त किया कि राज्यपाल द्वारा अभिभाषण शुरू करने के साथ ही जो हंगामा हुआ, वह राज्य की संस्कृति को शर्मसार करनेवाला था। उन्होंने विरोधियों को फटकारा कि राज्यपाल का इतना घोर अपमान देश की किसी और विधानसभा में नहीं हुआ होगा। उन्होंने विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि देवेंद्र जी कल आप जो कविता पढ़े थे, ‘तेच ते, आणि तेच ते…’ आपने भी महीने भर यही किया। उन्होंने कहा राज्यपाल के पास आप पूरे अधिकार के साथ राज्य सरकार की शिकायत करते हो लेकिन राज्य की सरकार क्या करती है, इसकी प्रगति की रिपोर्ट जब राज्यपाल आपके समक्ष रख रहे थे तब विरोधियों ने राज्यपाल का भाषण ही नहीं होने दिया। राज्यपाल राष्ट्रगीत के लिए भी नहीं रुके और उन्हें रुकने भी नहीं दिया।
छत्रपति के अपमान के निषेध में भाषण नहीं होने देना था क्या?
छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा की अवमानना और बेलगाव के मध्यवर्ती महाराष्ट्र एकीकरण समिति के अध्यक्ष पर स्याही फेंकने के कृत्य का मेरी सरकार तीव्र निषेध करती है, ऐसा राज्यपाल के भाषण में था। सरकार मतलब उसमें सभी लोग आ गए। जो कोई छत्रपति का अपमान करेगा उसका निषेध ही नहीं, बल्कि कानून के अनुसार जो कुछ भी करना संभव होगा वो करने की आवश्यकता होने के बावजूद उनके द्वारा दिया गया भाषण होने नहीं देना था क्या? ऐसा सवाल महाराष्ट्र की जनता के समक्ष उठ रहा है।
मुख्यमंत्री कोई भी होगा, तंत्र वही रहता है
कोरोना काल में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी विरोधियों को देते समय मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का सरकारी तंत्र दिन-रात काम कर रहा था, इस पर मुझे अभिमान है। मुख्यमंत्री कोई भी होगा परंतु तंत्र वही रहता है। पर्यावरण क्षेत्र में स्कॉटलैंड स्थित परिषद में राज्य को प्रेरणादायी नेतृत्व का पुरस्कार मिला। राज्यपाल को इस पर अभिमान होता है। कोरोना काल में जनता को लाखों की संख्या में शिवभोजन थाली दी। इसका आशीर्वाद हमें मिला, ऐसी जानकारी विरोधियों को दी।
आईने में भी भ्रष्टाचार दिखता है
विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने अपने भाषण में सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इसका मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। इस बार आजादी के अमृत महोत्सवी वर्ष के लिए राज्य सरकार ने ५०० करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। अब इसमें भी विपक्ष को भ्रष्टाचार दिख सकता है क्योंकि कुछ लोगों को इसकी आदत होती है। कुछ लोग आईना देखते हैं तो भ्रष्टाचार हुआ, ऐसा चिल्लाते हैं। परंतु भ्रष्टाचार किसमें दिखा तो आईने के उत्पादन में, किंतु आईना देखनेवाला अपना चेहरा देखे बगैर भ्रष्टाचार वैâसे दिखेगा, ऐसा सवाल मुख्यमंत्री ने पूछा।
तो मध्य प्रदेश को मद्य प्रदेश कहें क्या?
सुधीर मुनगंटीवार ने वाइन नीति का उल्लेख करते हुए बेवड़ों का राज्य, मद्य राष्ट्र ऐसा उल्लेख किया। इसकी खबर लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, वाइन किराने की दुकान पर नहीं, बल्कि सुपर मार्वेâट में मिल रही है। आपके चंद्रपुर के बगल में मध्य प्रदेश है। वहां कितनी मात्रा में शराब बेची जाती है मतलब वह अपना बच्चा और दूसरे का शैतान, ऐसा नहीं चलेगा। इन शब्दों में मुख्यमंत्री ने फटकारा। कर्नाटक में ७.१०, मध्य प्रदेश में ५.०७, उत्तर प्रदेश में २.६०, तमिलनाडु में ९.४३ ये देखते हुए हमारे राज्य की बदनामी करना उचित नहीं है। महाराष्ट्र में सबसे कम शराब बेची जाती है। आप हमारी आलोचना करो परंतु महाराष्ट्र की आलोचना मत करो। महाराष्ट्र को बदनाम मत करो। इन शब्दों में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विरोधियों को चेतावनी दी।
केंद्र में सरकार परंतु मुंबई में जान!
विरोधियों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों की खबर लेने के दौरान मुख्यमंत्री ने रावण की कहानी की मदद ली। ऐसा कहते हैं कि रावण की जान उसकी नाभि में थी। राम-रावण युद्ध के दौरान राम के एक तीर ने रावण का सिरच्छेद किया। तो उसकी जगह नए सिर आते हुए हमने सीरियल में देखे हैं। ठीक उसी तरह केंद्र में सरकार है फिर भी कुछ लोगों की जान मुंबई में है, ऐसा जबरदस्त तंज मुख्यमंत्री द्वारा कसते ही सभागृह ठहाकों से गूंज उठा। मुंबई जैसा शहर दुनिया में नहीं है, मैं खुद मुंबईकर हूं। मुझे मेरे देश, राज्य और मुंबई पर अभिमान है। मेरी मुंबई दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होनी ही चाहिए, परंतु विरोधियों को कुछ नजर नहीं आता होगा तो मुझे इस ओर ध्यान दिलाने की आवश्यकता नहीं है।
मनपा स्कूल दुनिया में सर्वश्रेष्ठ
मनपा स्कूलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पहले मनपा स्कूलों को अलग नजर से देखा जाता था। परंतु आज मनपा स्कूलों में दाखिले के लिए अभिभावकों की कतार लगती है। आठ भाषा में शिक्षा प्रदान करनेवाली यह दुनिया की इकलौती महानगरपालिका है। ४८० स्कूलों में वर्चुअल ट्रेनिंग दी जाती है। अत्याधुनिक सिलेबस वाले टैब भी हमने लिए वो भी टेंडर निकालकर। घनकचरा व्यवस्थापन कर रहे हैं। झोपड़पट्टियों में बीते कुछ वर्षों में १५ हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण किया तो ८ हजार शौचकूपों का कार्य प्रगति पर है। यदि कोई तैयार हुआ तो हम उसे उद्घाटन के लिए ले जा सकते हैं, ऐसा तंज विरोधियों पर कसते ही सभागृह हंसी के फौवारों से गूंज उठा।
विरोधियों को द्वेष का ज्वॉइंडिस
कोरोना काल में मुंबई मनपा द्वारा किए गए कार्यों का भी मुख्यमंत्री ने इस दौरान उल्लेख किया। कोरोना काल में दुनियाभर में मुंबई मनपा का नाम रोशन हुआ। सर्वोच्च न्यायालय, मुंबई उच्च न्यायालय ने तारीफ की। कोविड में लोग अच्छे होते हैं, परंतु किसी को द्वेष का ज्वॉइंडिस हुआ होगा तो उसका इलाज हमारे किसी भी अस्पताल में नहीं किया जा सकता है, ऐसा तंज मुख्यमंत्री ने कसा। जंबो कोविड सेंटर पर लगाए गए आरोपों की भी उन्होंने खबर ली। कोविड काल में आवश्यकता हो तो सेना की मदद लो, ऐसा सुझाव मैंने दिया था। परंतु उस मामले में भी हमारे तंत्र ने जंबो कोविड सेंटर शुरू किया। देश में ऐसा जंबो कोविड सेंटर किसी ने शुरू होगा, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। लेकिन जंबो कोविड सेंटर हमने नहीं बनाए होते तो इसका विचार करें। कुछ जगहों पर नदी में लाश फेंकने की नौबत आई। हमारे लिए उस दौर में जो करना संभव था वो किया और आगे भी करेंगे। और आनेवाले समय में कोविड न आए, परंतु जनता के हित के लिए हमें जो उचित लगेगा वो करेंगे, ऐसा वचन मुख्यमंत्री ने दिया।
मेट्रो कार्य में १० हजार करोड़ कैसे बढ़े?
गृह निर्माण योजना से संबंधित कार्यों का भी उन्होंने जिक्र किया। मराठी भाषा भवन नहीं बन सकता है, ऐसी टिप्पणी की जा रही थी। परंतु आनेवाले २ अप्रैल को उसका भूमिपूजन किया जाएगा। उस जगह शानदार मराठी भाषा भवन का निर्माण होगा। वर्ली डेयरी की जमीन पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मत्स्यालय बनाया जा रहा है। मेट्रो कारशेड के लिए कांजुरमार्ग का विकल्प है। यह जगह देने के लिए केंद्र तैयार नहीं है। मेट्रो रेलवे का काम बंद नहीं होने दिया। मेट्रो के कार्य के खर्च में वृद्धि होने के आरोपों का उन्होंने कड़े शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मेट्रो के कार्य में १० हजार २६९ करोड़ रुपए की वृद्धि का प्रस्ताव सितंबर, २०१८ में मतलब तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के काल में लाया गया था। हमारे काल में नहीं। इसकी जांच करने का निर्देश उन्होंने नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे को दिया।
केंद्र सरकार प्रतिसाद नहीं देती
धारावी पुनर्विकास प्रकल्प साकार करना है। उसके लिए ४५ एकड़ रेलवे की जमीन पाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। परंतु समस्या हल नहीं हो रही है। आधा पैसा भर दिया है। जमीन मिलने पर शेष रकम देनी है। परंतु केंद्र प्रतिसाद नहीं दे रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट का मुंबई उच्च न्यायालय करने के लिए पत्राचार कर रहे हैं। महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद हल करने के लिए केंद्र कुछ नहीं कर रहा है। न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है। केंद्र सरकार को अभिभावक के रूप में निष्पक्ष भूमिका अपनानी चाहिए। परंतु केंद्र सरकार किसका पक्ष ले रही है। न्यायालय का काम देखने के बाद यह समझ में आता है। लेकिन इस पर कोई बोलनेवाला है क्या, ऐसा सवाल उन्होंने विरोधियों से किया।
दहिसर की जमीन की कीमत फडणवीस के समय तय हुई
दहिसर स्थित भूखंड को लेकर किसने वैâसे क्या किया? २०११ में इस भूखंड की जानकारी लेनी शुरू हुई। खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस पर डू द नीड फुल ऐसा रिमार्क किया है। विधान परिषद में उस समय विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने एक पत्र लिखा था। उसका भी जवाब फडणवीस ने दिया था। उस समय अजोय मेहता ने भी नहीं कहा। उसकी कीमत कौन तय करता है, जमीन की कीमत तय करनेवाला तंत्र तत्कालीन राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील के हाथों में था। कीमत आपने तय की। वह कीमत तय करने के बाद में विवाद हुआ तो मामला कोर्ट में गया। इन सबकी जानकारी भाजपा विधायक मनीषा चौधरी के पास से आई। दहिसर के हॉस्पिटल के बारे में हॉस्पिटल चाहिए या नहीं? मैं आपके सुझाव का सम्मान करता हूं। यह विवाद कोर्ट में गया है। वहां हॉस्पिटल होना चाहिए, यह आपकी तरह हमारी भी इच्छा है। मनपा में हम आपके साथ थे। उस समय भालचंद्र शिरसाट मनपा में सुधार समिति के अध्यक्ष थे। इसमें भ्रष्टाचार कहां से आया? कीमत तय करने का काम मनपा नहीं करती है। राजस्व विभाग का तंत्र करता है, ऐसा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस दौरान स्पष्ट किया।
कोई डूबता हो तो टेंडर निकालते रहें क्या?
कोरोना काल में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया जा रहा है। मनपा ने इतना शानदार काम किया। अपेडमिक एक्ट में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इस दौर में आप जो कर सकते हैं, उस पर आक्षेप लेने की कोई वजह नहीं है। कोविड से लड़ते समय माननीय प्रधानमंत्री ने भी पक्ष भेद भूलकर सभी को अच्छी मदद की। उस समय पीपीई किट, एन-९० मास्क मिलना भी मुश्किल था। केंद्र ने सचिवों का एक समूह जीएफआर तैयार किया। उस समूह ने पीपीई किट किससे लेनी है, दवाइयां किससे लेनी हैं, दुर्भाग्य से वेंटिलेटर्स इतने चले नहीं, परंतु इसकी सूची उन्होंने तैयार की। फिर सूची की कंपनियों से वो सामान खरीदकर जब आवश्यकता थी, उसके अनुसार उपलब्ध कराया। केंद्र ने एचएलएल कंपनी को जिम्मेदारी दी थी। उसके अनुसार उन्होंने प्रबंध किया। परंतु मुझे पूछना है कि यदि कोई डूबता हो तो उसे बचाने के लिए लकड़ी या टायर फेंकना चाहिए अथवा ऐसे समय में टायर के लिए टेंडर जारी करते रहना चाहिए, ऐसा सवाल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया। उस समय जान बचाना प्राथमिकता थी, वही काम मनपा ने किया। मनपा ने एक भी काम टेंडर जारी किए बिना नहीं किया। शॉर्ट नोटिस पर टेंडर निकाले गए और उन्हें वो काम दिए गए, ऐसा मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया।
घर की वृद्धा का काल मत बनो
मुंबई ने जो काम किया उसकी सराहना पूरी दुनिया ने की। मुंबई में धारावी जैसी सघन आबादी वाली बस्ती है। उस धारावी झोपड़पट्टी को बचाया, यह कितना बड़ा काम हुआ। केंद्रीय टीम आती थी तो कांपने लगती थी। कहते थे आपको जो करना है करो और अभिमान से कहना होगा कि मनपा के आयुक्त से कर्मचारी तक धारावी में उतरे और धारावी को बचाया। इसका अभिमान किसे नहीं है। सराहना मत करो परंतु घर की वृद्धा का काल बनने का पाप मत करो। इन शब्दों में विरोधियों को उन्होंने सुनाया।

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