मुख्यपृष्ठटॉप समाचारमुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का शिवसैनिकों से संवाद; कहा ‘वर्षा’ छोड़ा, जिद नहीं!

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का शिवसैनिकों से संवाद; कहा ‘वर्षा’ छोड़ा, जिद नहीं!

सामना संवाददाता / मुंबई
मुख्यमंत्री पद मेरे लिए गौण है, वर्षा निवासस्थान छोड़ दिया फिर भी जिद नहीं छोड़ी, ऐसा स्पष्ट रूप से कहने के साथ ही शिवसेनापक्षप्रमुख व राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ‘तैयार हो जाओ! हमारे साथ कोई नहीं है, ऐसा मानकर शिवसेना खड़ी करेंगे!’ ऐसा आह्वान कल तमाम शिवसैनिकों से किया। शिवसेना जिलाप्रमुखों की बैठक कल दादर स्थित शिवसेना भवन में हुई। उस बैठक को उद्धव ठाकरे ने ऑनलाइन संबोधित किया। किस व्यक्ति ने किस वक्त हमारे साथ वैâसा बर्ताव किया? ये याद रखो। ठाकरे और शिवसेना इन नामों का इस्तेमाल किए बगैर जीकर दिखाओ, ऐसा आह्वान उद्धव ठाकरे ने इस दौरान बागियों को किया। उस दिन हमने मन की सारी बातें कह दी थीं। आज मन से सब निकाल देना है, ऐसा कहते हुए उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों से संवाद शुरू किया। कुछ भी हुआ, फिर भी शिवसेना नहीं छोड़ेंगे, ऐसा कहनेवाले छोड़कर चले गए। ऐसे लोगों का क्या किया जाए? ऐसा सवाल उन्होंने पूछा। सिर्फ विधायक, मंत्री ही नहीं, बल्कि पार्टी का काम करने के लिए जिलाप्रमुखों को भरपूर पैसा दो, ऐसा निर्देश हमने संबंधितों को दिया था, ऐसा उन्होंने इस दौरान स्पष्ट किया।

जितने चाहिए उतने विधायक ले जाओ, मेरे शिवसैनिक मेरे साथ हैं
बागियों को चेतावनी देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘विधायक ले जाने हैं, तुम्हें जितने चाहिए, उतने विधायक ले जाओ। तुम पेड़ के फल-फूल तोड़ सकते हो, परंतु पेड़ की जड़ें नहीं ले जा सकते क्योंकि ये जड़ें शिवसेनाप्रमुख द्वारा मजबूती से लगाई गई हैं और मेरे साथ हैं। वर्षा छोड़ते समय मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगा क्योंकि वह मेरा था ही नहीं। जो मेरा नहीं था वो चला गया, इसका मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा है। मेरे शिवसैनिक मेरे साथ हैं।’ ऐसी भावना उद्धव ठाकरे ने व्यक्त की। शिवसेना के कारण कई बड़े हुए, अब उनके सपने बड़े हो गए हैं परंतु मैं उन्हें पूरा नहीं कर सकता हूं।
उनके सपने पूरा करने के लिए शिवसेनाप्रमुख ने मुझे ये जिम्मेदारी नहीं दी है, शिवसैनिकों के सपनों के लिए यह जिम्मेदारी दी है। ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।

फिर भाजपा के साथ जाने के लिए मैं मूर्ख नहीं
भाजपा के साथ जाने के लिए विधायकों का हम पर दबाव होने का दावा एकनाथ शिंदे ने कुछ दिन पहले निजी तौर पर किया था। इस संदर्भ में बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘जिस भाजपा ने हमारे परिवार के खिलाफ आरोप लगाए, उनके साथ जाना चाहिए? मेरे परिवार पर, मातोश्री पर आरोप लगानेवालों के साथ फिर बैठूं? और मेरे बगल में कौन, वह तोतला बैठेगा? बिल्कुल नहीं। इसकी बजाय मैं जनता के साथ जाऊंगा। मैं शांत हूं परंतु मूर्ख नहीं।’ ऐसा दृढ़तापूर्वक उद्धव ठाकरे ने कहा।

शिवसेना से लड़ने की हिम्मत नहीं इसलिए लोग तोड़ रहे हैं
शिवसेना के लोगों को फोड़नेवाली भाजपा की भी इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने खबर ली। ‘भाजपा में शिवसेना से लड़ने की हिम्मत नहीं है। इसलिए हमारे लोग तोड़ना और हमारे खिलाफ छोड़ना, ऐसी उनकी रीत बन गई है, मतलब तुम लड़ते रहो और हम मुक्त होकर चरते रहें। ऐसे किराए पर लेना आपस में मारामारी कराना। कुछ परिणाम हुआ तो किराएदारों को भुगतना पड़ता है। भाजपा के मूल अस्तित्व को कुछ भी नहीं होता है।’ ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।

तुम्हारे सिर पर मारे बगैर नहीं रहेंगे
‘हर बार हमने उन्हें महत्वपूर्ण विभाग दिए, जो हमेशा मुख्यमंत्री के पास होते हैं। वह नगर विकास विभाग भी उन्हें दिया। सामान्य विभाग अपने पास रखे, इसके बाद भी आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं। इस सबसे अब मुझे घृणा हो रही है लेकिन यह घृणा अब लोगों के सिर पर मारे बगैर नहीं रहेंगे।’ ऐसी चेतावनी भी उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे के नाम का जिक्र किए बिना दी। ‘पहले बालासाहेब को विट्ठल और मुझे पुजारी कहते थे। अब उनके लिए आदित्य पुजारी हो गया है। मतलब खुद का बेटा सांसद और मेरा बेटा कुछ नहीं करना चाहिए क्या? मैं किसी शिवसैनिक के बेटे को रोकता हूं क्या?’ ऐसा सवाल उद्धव ठाकरे ने किया।

विष्ठा निकल जाने दें, निष्ठावान मेरे साथ ही रहेंगे!
‘कई बार पराजय हमारे सिर आई परंतु शिवसेना कभी भी हताश नहीं हुई। हार-जीत मन पर निर्भर करती है क्योंकि मन दृढ़ होगा तो कल का चुनाव जीतने की जिद दे सकता है।’ ऐसा कहते हुए उद्धव ठाकरे ने इस मौके पर शिवसेना के पहले विधायक प्रिंसिपल वामनराव महाडिक के वक्तव्य का उदाहरण दिया। ‘जो डूबता है, वह निष्ठा है और जो तैरता है, वह विष्ठा है’, ऐसा वामनराव कहते थे। यह विष्ठा उनके साथ तैर रही है, उस विष्ठा को तैरते हुए जाने दें, निष्ठावान हमेशा मेरे साथ रहेंगे।’ ऐसा तंज उद्धव ठाकरे ने बागियों पर कसा।

सावधान रहो, यह भाजपा का दांव है!
‘विधायकों के बाद अब जिलाप्रमुख, विभागप्रमुख, पूर्व नगरसेवकों को फोन आने लगे हैं। डराया-धमकाया जा रहा है। ठाणे के पदाधिकारियों को तो हमें उद्धव ठाकरे ने कहा है, ऐसा कहकर उन्हें बागियों के साथ जाने को कहा जा रहा है, परंतु ऐसा कुछ भी नहीं है। यह खुले तौर पर भाजपा का दांव है। अब उनकी कैद से विधायकों की रिहाई कैसे कराई जाए, यह देखना होगा। जब तक कोई मेरे सामने नहीं आता, तब तक मैं विश्वास करने को तैयार नहीं हूं।’ ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।

विशेष बॉक्स-
मैं बालासाहेब का पुत्र हूं, फिर भी शिवसेना ही उनके लिए मुझसे ज्यादा प्यारी संतान हैं। शिवसेना चलाने के लिए मैं नालायक हूं, ऐसा लगता होगा तो अभी के अभी कहो। मैं पद छोड़ने को तैयार हूं। मुख्यमंत्री का पद मेरे लिए गौण है। मैं भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल नहीं करता हूं। केवल बालासाहेब की तस्वीर मेरे पीछे लगी है इसलिए मोह मे न फंसें। बालासाहेब की तस्वीर हटाकर एक तरफ रख दें और मैं बालासाहेब का पुत्र हूं, यह भूल जाएं। शिवसेना का पहला नारियल फूटा था, ऐसी ही अवस्था आज है, ऐसा समझें। तैयार हो जाएं, हमारे साथ कोई भी नहीं है, ऐसा समझकर शिवसेना खड़ी करेंगे।’

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